बिना बुलाए शादी में घुसा फर्जी डीआईजी, वर्दी और गनमैन संग स्टेज पर झाड़ा रौब

Aman Vaishnav | Jun 12, 2026, 13:52 IST
बिना बुलाए शादी में घुसा फर्जी डीआईजी
झांसी में एंटी करप्शन फोर्स का फर्जी डीआईजी बनकर मनीष कुमार नामक शख्स ने व्यापारी से 29 लाख 50 हजार रुपए ठग लिए। वह शादी में भी बिन बुलाए वर्दी और गनमैन के साथ रौब झाड़ने पहुंच गया था।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • दतिया के कई कारोबारियों को ठगी का निशाना बनाने वाले फर्जी DIG का पर्दाफाश हुआ है।
  • आरोपी मनीष कुमार खुद को एक एनजीओ का फर्जी डीआईजी बताता था।
  • उसने सर्राफा कारोबारी को फर्जी एफआईआर दिखाकर 29 लाख 50 हजार रुपए ऐंठ लिए।
  • मनीष कुमार प्रियांश की शादी में बिना बुलाए अपनी वर्दी और चार गनमैन के साथ पहुंच गया।
  • आरोपी ने केस की फाइल दिल्ली भेजने के नाम पर भी चार लाख 50 हजार रुपए हड़प लिए।
  • कलेक्ट्रेट में जब प्रियांश की मुलाकात असली प्रोफेसर से हुई तब जाकर भंडाफोड़ हुआ।

काली वर्दी और चार गनमैन, बन गया DIG

जानकारी के अनुसार आरोपी मनीष कुमार हमेशा काली वर्दी में रहता था। उसके साथ चार गनमैन भी होते थे। इस वीआईपी लुक को देखकर कोई भी धोखा खा जाता था।



मनीष कुमार खुद को एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स संस्था का डीआईजी बताता था। इस संस्था का नाम सुनकर हर कोई इसे सरकारी एजेंसी समझ लेता था। इसी भारी-भरकम नाम का फायदा उठाकर वह डेढ़ साल तक ठगी कर रहा था।



फर्जी FIR से जीता भरोसा, 29.5 लाख लूटे

बता दें कि डतिया के पीड़ित प्रियांश सिंघल के पिता और एक रिटायर्ड प्रोफेसर के बीच पुराना लेन-देन था। उस प्रोफेसर ने इसी संस्था से मदद मांगी थी और कुछ कागज भी दिए थे। वही कागज मनीष के हाथ लग गए।



मनीष कुमार जब प्रियांश की दुकान पर पहुंचा तो उसने वही बातें बताईं जो सिर्फ प्रोफेसर और प्रियांश के बीच हुई थीं। उसने फर्जी एफआईआर की कॉपी भी दिखाई। प्रियांश पूरी तरह उसके झांसे में आ गए।



अलग-अलग मौकों पर मनीष ने रुपए लिए। एफआर (FR – Final Report) लगाने और दिल्ली फाइल भेजने के नाम पर अकेले चार लाख 50 हजार रुपए और हड़प लिए।



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शादी में पहुंचा, मंच पर खिंचवाई फोटो

बता दें कि फरवरी में प्रियांश की शादी थी। मनीष बिना बुलाए वर्दी पहनकर और चार गनमैन लेकर पहुंच गया था।



उसने मंच पर दूल्हे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। शादी के माहौल में भी उसने अपना रुतबा दिखाया। कोई शक नहीं कर सका।



झांसी जाकर खुला राज

जानकारी के अनुसार एक दिन प्रियांश की कलेक्ट्रेट में रिटायर्ड प्रोफेसर से मुलाकात हुई। बातचीत में पता चला कि वह ठगी के शिकार हो गए हैं।



प्रियांश झांसी स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो के दफ्तर पहुंचे। वहां पता चला कि इस नाम का कोई इंस्पेक्टर वहां पदस्थ ही नहीं है।



क्या है यह एनजीओ जिसके नाम पर हुई ठगी

एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स एक गैर सरकारी संगठन है। इसका दफ्तर झांसी के सीपरी बाजार में है। इसे एक सेवानिवृत्त कर्मचारी चंद्रशेखर आजाद ने बनाया है।



यह संस्था भ्रष्टाचार और अपराध के शिकार लोगों को कानूनी सलाह देती है। यह पीड़ितों की शिकायतें पुलिस और विजिलेंस तक पहुंचाती है। इस संस्था के पास गिरफ्तारी का कोई सरकारी अधिकार नहीं है।



मनीष कुमार ने इसी संस्था के नाम का गलत इस्तेमाल किया। उसने खुद को डीआईजीबताया जो पूरी तरह झूठ था।



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