एमपी में 42 डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट की मुहर
समझें क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश में 42 डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीधी भर्ती कोटे के अफसरों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इन अफसरों ने पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आशंका के आधार पर प्रक्रिया नहीं रोकी जा सकती। अब राज्य शासन इसी सप्ताह DPC कर सकता है।
प्रदेशभर में पदस्थ 42 डिप्टी कलेक्टरों को लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह इंतजार जल्द खत्म होने वाला है।
क्या था पूरा विवाद
एमपी में सीधी भर्तीकोटे से बने डिप्टी कलेक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी मांग थी कि पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उनका कहना था कि अगर पदोन्नत अफसरों (Deputy Collector) को 10 साल पुरानी तारीख से वरिष्ठता (promotion) दी गई, तो वे खुद नीचे चले जाएंगे।
सीधी भर्ती वाले अफसरों का तर्क था कि वे करीब 10 साल से डिप्टी कलेक्टर के पद पर काम कर रहे हैं। जबकि पदोन्नति पाने वाले अफसर अभी तक इस पद पर नहीं थे। उनका यह भी कहना था कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही आदेश दे दिया था।
MP High Court का आदेश क्या था
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए थे। 42 पदों के लिए DPC (Departmental Promotion Committee) गठित करने को कहा गया था। 45 दिन के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया था।
पदोन्नत होने वाले अफसरों को 1 जनवरी 2016 से वरिष्ठता देने का भी आदेश था। असल में 2016 में गठित DPC में ये 42 पद खाली रह गए थे। अगस्त 2023 में हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना। कोर्ट ने तुरंत पदोन्नति के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
न्यायमूर्ति कुमार अरविंद और न्यायमूर्ति विपुल बी. पंचोली की युगलपीठ ने इस मामले की विस्तृत सुनवाई की। कोर्ट ने सीधी भर्ती अफसरों की याचिकाओं को समय से पहले यानी प्री-मैच्योर बताया।
कोर्ट के मुताबिक याचिका सिर्फ आशंका पर आधारित थी। कोर्ट ने साफ कहा कि अफसरों का कोई अधिकार तभी बनेगा, जब पदोन्नति के आदेश जारी होंगे और संबंधित अफसर पद ग्रहण कर लेंगे। उससे पहले प्रक्रिया को चुनौती देने का कोई आधार नहीं बनता।
हालांकि कोर्ट ने राहत का एक रास्ता भी खुला रखा। अगर पदोन्नति के बाद अफसरों को कोई शिकायत हो, तो वे हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं।
50-50 फीसदी कोटे से भरते हैं पद
मध्यप्रदेश में डिप्टी कलेक्टर के पद दो तरह से भरे जाते हैं। 50 प्रतिशत पद MPPSC (मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ) की परीक्षा से सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। बाकी 50 प्रतिशत पद तहसीलदार और सर्वेयर-भू-अधीक्षक अफसरों (सीनियरिटी) को पदोन्नति देकर भरे जाते हैं। यही कोटा व्यवस्था इस पूरे विवाद की जड़ रही है।
अब आगे क्या होगा
राज्य शासन अब हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार इसी सप्ताह DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) करने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब रास्ता साफ है। जल्द ही 42 पदों पर पदोन्नति के आदेश जारी होने की संभावना है।
FAQ
- प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी कलेक्टर पदोन्नति मामले में क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने सीधी भर्ती अफसरों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि आशंका के आधार पर प्रक्रिया नहीं रोकी जा सकती। इससे 42 डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया। - प्रश्न 2: एमपी में पदोन्नत अफसरों को वरिष्ठता कब से मिलेगी?
पदोन्नत होने वाले अफसरों को 1 जनवरी 2016 से वरिष्ठता मिलेगी। यह आदेश पहले हाईकोर्ट ने दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक नहीं लगाई है। - प्रश्न 3: मध्य प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर के पद कैसे भरे जाते हैं?
50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती यानी MPPSC परीक्षा से भरे जाते हैं। बाकी 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाते हैं। यह पदोन्नति तहसीलदार और सर्वेयर-भू-अधीक्षक अफसरों को दी जाती है।
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