CBI ने SDOP अस्थाना को बचाया: देवा पारदी हत्याकांड के आरोपी टीआई संजीत मवई का खुलासा
मध्यप्रदेश के गुना जिले के म्याना पुलिस थाने में 14 जुलाई 2024 की शाम को देवा पारदी की पुलिस की कस्टडी में मौत हुई थी। इस केस में सितंबर 2024 में पुलिस ने तत्कालीन टीआई संजीत सिंह मवई, एएसआई उत्तम सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था।
मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट गया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद फरार टीआई मवई और उत्तम सिंह ने 5 अक्टूबर 2025 को सरेंडर किया था। तभी से मवई जेल में हैं।
मवई ने एसडीओपी अस्थाना पर लगाए आरोप
बता दें कि जमानत याचिका जिला कोर्ट इंदौर में पेश हुई। इसमें मवई की ओर से कहा गया कि जब देवा पारदी की मौत हुई, तब वह 13 व 14 जुलाई को वीआईपी ड्यूटी के लिए ग्वालियर में थे।
मवई ने आगे कहा कि जब पारदी को यातना दी गई और उसकी मौत हुई, उस दौरान उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इस दौरान एसडोपी विवेक अस्थाना ही पूरा केस देख रहे थे।
साथ ही मवई ने बताया कि अस्थाना और एएसआई उत्तम सिंह के बीच लगातार 15 बार बात हुई। इसी दौरान पारदी को यातनाएं दी गईं और उसकी मौत हुई। जबकि वह तो थाने में थे ही नहीं। ऐसे में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी।
सीबीआई पर यह लगाए आरोप
मवई ने कहा कि मामले में सीबीआई ने अस्थाना और वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया है। उनके पास सीसीटीवी, सीडीआर सब मौजूद हैं। इसमें सब साफ है कि पुरानी बिल्डिंग में जहां पारदी को रखा था, वहां कौन आ-जा रहा था। मैं वहां था ही नहीं और न ही मेरी किसी से इस दौरान बात हुई।
संजीत सिंह मवई ने कहा कि इससे साफ है कि यह पूरा ऑपरेशन मेरी जानकारी में नहीं था। वहीं सीबीआई ने इन आरोपों का खंडन किया। CBI ने बताया कि इस घटना के लिए मवई जिम्मेदार हैं। उन्हें आरोपी बनाया गया है। सभी तर्क सुनने के बाद मवई की जमानत याचिका खारिज हो गई।
यह है केस...
दरअसल पारदी की शादी 15 जुलाई 2024 को होनी थी, लेकिन इसके पहले ही पुलिस ने 14 जुलाई को उसे और उसके चाचा को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में 14 जुलाई की शाम को ही उसकी मौत हो गई।
परिजनों को खबर दी गई कि उसका शव पीएम (पोस्टमार्टम) के लिए लाए हैं। इसके बाद घटना ने तूल पकड़ा और प्रदर्शन हुए। मजिस्ट्रियल जांच बैठी।
इसके बाद चार सितंबर को टीआई मवई, एएसआई उत्तम सिंह, एसआई देवराज सिंह व अन्य को लाइन अटैच किया गया। अगले दिन 5 सितंबर को पुलिसवालों पर केस दर्ज हुआ। इसके बाद ही मवई और सिंह फरार हो गए।
देवा की मां हंसुबाई ने सुप्रीम कोर्ट में केस लगाया और वहां से यह केस मई 2025 में सीबीआई को चला गया। लेकिन मवई और सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई। दो-दो लाख रुपए का इनाम भी घोषित हुआ।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जमकर फटकार लगाई और 8 अक्टूबर तक दोनों को गिरफ्तार करने के लिए कहा। इससे पहले 5 अक्टूबर 2025 को दोनों ने सरेंडर कर दिया। इसके बाद से मवई जेल में ही हैं।
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