बोले पंडोखर सरकार-राज करेंगे युवराज, देवकीनंदन ठाकुर ने भी लॉन्च किया अपना बेटा
समझें क्या है पूरा मामला...
- मशहूर कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं।
- उन्होंने अपने 19 साल के बेटे देवांश ठाकुर को कथावाचक के रूप में लॉन्च किया है।
- कथावाचक पंडोखर बाबा भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
- पंडोखर बाबा ने भी अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है।
- कुछ लोग इसे परंपरा बता रहे हैं, तो कुछ इसे परिवारवाद कह रहे हैं।
देश के बड़े कथावाचकों में गिने जाने वाले देवकीनंदन ठाकुर और पंडोखर बाबा इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं। उनकी कथा नहीं, बल्कि उनके बेटे की एंट्री सुर्खियां बटोर रही है।
एक तरफ बीते दिनों गुजरात के सोमनाथ में एक धार्मिक आयोजन हुआ था। इसी मंच से देवकीनंदन ठाकुर के 19 वर्षीय बेटे देवांश ठाकुर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से भागवत पाठ किया।
इसी के बाद से सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर नई नई प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वहीं दूसरी और कथावाचक पंडोखर बाबा ने भरे मंच से उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है।
सोमनाथ से हुई शुरुआत
दरअसल देवांश ठाकुर के कार्यक्रम का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देवकीनंदन ठाकुर ऊंचे मंच पर विराजमान नजर आए। पंडोखर सरकार
वहीं उनसे कुछ ही दूरी पर एक सफेद सोफे पर देवांश ठाकुर बैठे दिखे। इस दौरान देवांश भजन करते नजर आए। यह पहला मौका था जब देवांश को इतने बड़े मंच पर देखा गया।
वीडियो सामने आते ही यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि धार्मिक क्षेत्र में भी अब परिवारवाद बढ़ता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
देवांश की एंट्री के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। एक यूजर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि बेटा प्रतियोगी परीक्षाएं नहीं निकाल पाएगा, इसलिए पिता का काम आसान विकल्प है।
यह पोस्ट सीधे तौर पर परिवार का बयान नहीं है। यह एक यूजर की टिप्पणी है, जो व्यंग्य के तौर पर शेयर की गई है।
वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि अब कथावाचन के क्षेत्र में भी यही ट्रेंड दिख रहा है। उसका कहना था कि आम परिवारों के बच्चे मेहनत करते रहते हैं, जबकि बड़े नामों के बच्चों को सीधा मौका मिल जाता है।
पंडोखर बाबा भी चर्चा में
देवकीनंदन ठाकुर के मामले के साथ ही एक और कथावाचक पंडोखर बाबा भी चर्चा में आ गए हैं। बाबा का असली नाम गुरुशरण शर्मा है। जानकारी के अनुसार पंडोखर बाबा ने भी अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। एक वीडियो में उनके पुत्र आयुष्मान उनके बगल में बैठे नजर आ रहै हें।
वीडियो में बाबा कहते सुनाई देते हैं कि यह उनके छोटे गुरुजी हैं। आगे चलकर यही गद्दी का संचालन करेंगे। बाबा ने यह भी कहा कि उनके बेटे को प्रेत बाधाओं से जुड़े मामलों का अनुभव है। उन्होंने दावा किया कि बेटे के देखने मात्र से ही प्रेत बाधाएं गुलाठी खाने लगती हैं।
बाबा ने वीडियो में यह भी बताया कि वे खुद भी अपने पिता के साथ इसी तरह बैठा करते थे। बाद में पिता ने राजतिलक करके उन्हें गद्दी पर बिठाया।
इस वीडियो पर भी लोगों ने खुलकर टिप्पणियां कीं। कई यूजर्स ने लिखा कि इस तरह बाबा ने अपने बेटे को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा दिया है। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक दरबार से जुड़ा एक बड़ा कारोबार बताते हुए तंज कसा है।
दोनों मामलों में मिलती-जुलती बहस
देवकीनंदन ठाकुर और पंडोखर बाबा, दोनों के मामलों में एक जैसी बहस देखी जा रही है। समर्थकों का तर्क है कि यह गुरु-शिष्य और पिता-पुत्र की पुरानी परंपरा है। आलोचकों का कहना है कि इससे नए और संघर्षशील कथावाचकों को मौका मिलना मुश्किल हो जाता है।
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