सनातन बोर्ड होता तो नहीं होती चोरी, राम मंदिर चंदा विवाद पर बोले देवकीनंदन ठाकुर
समझें क्या है पूरा मामला...
- अयोध्या श्रीराम मंदिर में करोड़ों रुपए के चंदे की चोरी का मामला चर्चा में है।
- इस पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने बयान दिया है।
- कथावाचक ने कहा कि अगर सनातन बोर्ड बना होता तो यह चोरी नहीं होती।
- देवकीनंदन ठाकुर के मुताबिक चारों शंकराचार्यों में से कोई एक इस बोर्ड का संचालन करता।
- इसी बीच में देवकीनंदन ठाकुर ने बच्चों की संख्या पर भी अपनी राय रखी।
भोपाल में इन दिनों कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की कथा चल रही है। इसी दौरान उनका एक बयान बड़े चर्चा का विषय बना हुआ है।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में देवकीनंदन ठाकुर ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। सबसे ज्यादा चर्चा अयोध्या राम मंदिर में चंदे की चोरी के मामले पर हुई।
जानकारी के अनुसार देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज सनातन बोर्ड होता तो राम मंदिर में चंदे की चोरी नहीं होती। उन्होंने इसकी वजह भी बताई।
देवकीनंदन ठाकुर का कहना है कि इस बोर्ड का संचालन चारों शंकराचार्यों में से कोई एक देख रहा होता। उनकी देखरेख में ऐसी चोरी संभव नहीं थी।
धर्म और राजनीति पर विचार
जब देवकीनंदन ठाकुर से पूछा गया कि क्या धर्म आस्था से ज्यादा राजनीति का विषय बन गया है, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया। उनका कहना है कि आजादी के बाद से धर्म, संस्कृति और परंपराओं को कभी खुलकर सामने नहीं रखा गया। धार्मिक भावनाओं को हमेशा छिपाया गया।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अब सनातन की बात खुलकर होनी चाहिए। उनके मुताबिक अगर किसी भी पार्टी में कोई सनातनी है और परंपरा का पालन करता है तो यह उनके लिए सबसे अच्छी बात है।
चंदा चोरी से आहत हुई आस्था
राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना से जुड़े सवाल पर देवकीनंदन ठाकुर भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि भगवान राम पूरे जगत के हैं। मंदिर से आ रही चोरी की खबरें भक्तों की भावना को ठेस पहुंचाने वाली हैं।
देवकीनंदन ठाकुर का कहना है कि जिन कार्यकर्ताओं ने यह काम किया है, उन्हें धन वापस भेंट कर खुद वहां से हट जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि इसीलिए सनातन बोर्ड बनना जरूरी है।
शादी की उम्र पर सलाह
देवकीनंदन ठाकुर ने बेरोजगारी के दौर में शादी की सही उम्र को लेकर भी बयान दिया। देवकीनंदन ठाकुर ने माता-पिता को बच्चों की शादी 20 से 25 साल की उम्र में करने की सलाह दी है।
देवकीनंदन ठाकुर ने आगे कहा कि शादी कब करनी है, यह हर किसी की अपनी मर्जी है। लेकिन उनकी राय में सही उम्र 20 से 25 साल ही है। उन्होंने विदेशी समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 16 साल का बच्चा खुद अपने खर्चे उठाने लगता है।
देवकीनंदन ठाकुर के मुताबिक इंसान उस दिन सेटल होता है, जब वह खुद कमाकर घर लौटता है। बड़ा मकान या बड़ी गाड़ी होना सेटल होने की निशानी नहीं है।
महंगाई में ज्यादा बच्चों की सलाह
महंगाई के दौर में पांच बच्चे पैदा करने की सलाह पर भी देवकीनंदन ठाकुर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पांच नहीं, दस बच्चे भी हो जाएं तो कोई बुराई नहीं है। कम से कम दो-तीन बच्चे जरूर होने चाहिए।
देवकीनंदन ठाकुर ने एक उदाहरण देकर अपनी बात समझाई। उन्होंने बताया कि एक परिवार में इकलौते बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद माता-पिता का जीवन बहुत मुश्किल हो गया।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान ने दो आंख, दो किडनी, दो हाथ और दो पैर इसीलिए दिए हैं। ताकि एक के खराब होने पर दूसरे से काम चल सके। उनके मुताबिक यही तर्क बच्चों की संख्या पर भी लागू होता है।
ये खबरें भी पढ़िए...
भोपाल में बोले देवकीनंदन ठाकुर: रात की शादी से दंपती में बढ़ता है तनाव
भोपाल में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर बोले- बिना तिलक पूजा स्वीकार नहीं होती
साधना से निकले तो कॉकरोच जनता पार्टी बन गई, धीरेंद्र शास्त्री का बयान, कहा- बेरोजगारी बढ़ रही
धीरेंद्र शास्त्री बोले- बड़े घर की माताएं भी पी रहीं शराब, बजरंगबली इनसे बचाए, विरोध शुरू