असली बोतलों में जहर भरकर गांवों में करते थे सप्लाई, देवास शराब कांड पर ग्रामीण बोले- 40 साल से चल रहा था अवैध कारोबार
देवास जहरीली शराब कांड
जानकारी के अनुसार जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क (Dewas liquor scandal) को चलाने वाले आरोपियों ने शराब बनाने में उस थिनर का इस्तेमाल किया था, जो आमतौर पर पेंट को पतला करने के काम आता है। यह थिनर इंदौर से सिर्फ 6 हजार 800 रुपए में खरीदा गया था। लालच में अंधे होकर आरोपियों ने इसी केमिकल से नकली शराब तैयार की। इसके बाद उसे लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाकर गांव-गांव में खपा दिया।
AI से खोजा शराब बनाने का नुस्खा
कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के मुताबिक, जब पकड़े गए आरोपी अजय राठौर से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने बेहद चौंकाने वाली बात बताई। अजय ने बताया कि उसने AI का सहारा लेकर शराब बनाने का तरीका ढूंढा था।
तरीका पता चलने के बाद उसने कबाड़ी से खाली बोतलें खरीदीं। इसके बाद उसने अपने बाकी साथियों को भी इस काले कारोबार में जोड़ लिया। वे असली शराब की बोतलों के बीच अपनी बनाई हुई जहरीली शराब मिला देते थे ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद जैसे ही लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों की खबर फैली तो आरोपी गांव छोड़कर भाग निकले।
चंदाना गांव बना था अवैध शराब का बड़ा अड्डा
इस पूरे काले धंधे का मुख्य केंद्र चंदाना गांव में रहने वाले विनोद जायसवाल का घर था। गांव के एकदम बीचों-बीच स्थित इस घर से सुबह 6 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक शराब की खुलेआम बिक्री होती थी।
- 40 साल पुराना नेटवर्क: गांव वालों का कहना है कि विनोद के घर से पिछले करीब 40 सालों से अवैध शराब बेची जा रही थी।
- छुट्टी के दिन भी सप्लाई: चाहे कोई त्योहार हो या सरकारी छुट्टी, यहां शराब मिलना कभी बंद नहीं होता था।
- सस्ती शराब का लालच: लाइसेंसी दुकानों से कम दाम में शराब मिलने की वजह से चंदाना और आसपास के कई गांवों के लोग यहीं से शराब खरीदते थे।
लाइसेंसी दुकानों से सांठगांठ और इंदौर से थिनर की खरीद
पुलिस जांच में पता चला है कि विनोद जायसवाल के साथ अजय राठौर, गोविंद और रामेश्वर सोनगरा भी मिलकर काम करते थे। ये लोग आसपास की सरकारी लाइसेंसी शराब दुकानों के मैनेजरों, कर्मचारियों और सेल्समैनों से मिलीभगत रखते थे।
वे लाइसेंसी दुकानों से शराब की पेटियां बाइक पर लादकर विनोद के घर लाते थे। फिर उसमें अपनी जहरीली शराब मिलाकर सेल्समैन के जरिए गांवों में भेजते थे। इस पूरे लेनदेन का बाकायदा एक डायरी में हिसाब-किताब रखा जाता था।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने इंदौर के केमिकल व्यापारी अमन कासलीवाल को धर दबोचा। अमन के पिता आनंद कासलीवाल ने बताया कि 30 अक्टूबर को गोविंद नाम के व्यक्ति ने 6 हजार 800 रुपए देकर 220 किलो का एक थिनर का ड्रम खरीदा था। आनंद का कहना है कि उनकी फर्म कई राज्यों में पेट्रोकेमिकल भेजती है। इसके बाद वे ग्राहकों से यह नहीं पूछते कि वे इसका क्या इस्तेमाल करेंगे। पुलिस को पूरा शक है कि इसी 220 किलो थिनर से वह जानलेवा शराब तैयार की गई थी।
27 सितंबर से शुरू हुआ था मौतों का सिलसिला
जानकारी के अनुसार मौतों का यह सिलसिला 27 सितंबर को शुरू हुआ था। इस हादसे में सबसे पहले किशोर परमार नाम के शख्स की जान गई थी। इसके बाद अक्टूबर के महीने में 30 से लेकर 40 साल तक के कई तंदुरुस्त युवाओं की एक के बाद एक मौत होने लगी।
शराब पीने के बाद लोगों को अचानक पेट में तेज दर्द, सिर चकराना, घबराहट और लगातार उल्टियां होने लगती थीं। देखते ही देखते उनकी तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ जाती थी कि अस्पताल पहुंचने से पहले या इलाज के दौरान ही वे दम तोड़ देते थे।
मास्टरमाइंड विनोद पहले भी जा चुका है जेल
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी विनोद जायसवाल पहले भी अवैध शराब बेचने के आरोप में पकड़ा जा चुका था, लेकिन छूटने के बाद वह दोबारा इसी धंधे में लग जाता था।
इस बार जब मौतों (जहरीली शराब पीने से मौत) का आंकड़ा बढ़ा, तो विनोद अपने एक साथी के साथ कार में बैठकर देवास से भागने की फिराक में था। हालांकि पुलिस ने नाकाबंदी करके उसे प्रताप नगर-आंबेडकर नगर इलाके से दबोच लिया। मामले से जुड़ा आरोपी गोविंद फिलहाल फरार है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जड़ें तलाशने में जुटी है।