टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड: ड्राइवर समेत दो आरोपियों का शॉर्ट एनकाउंटर, बंदूक छीनकर पुलिस पर किया था फायर
कैसे हुए दोनों आरोपियों के शॉर्ट एनकाउंटर?
पुलिस की जांच में सामने आया कि इस मामले के मुख्य आरोपी और उसके साथी ने अलग-अलग समय पर भागने का दांव चला था, लेकिन पुलिस ने उन्हें मौके पर ही काबू कर लिया।
पंक्चर ठीक करते वक्त अक्कू ने छीन ली थी बंदूक
जानकारी के अनुसार मुख्य आरोपी ट्रक ड्राइवर गजेंद्र उर्फ अक्कू राठौड़ को पुलिस टीम अलीराजपुर से खातेगांव लेकर आ रही थी। रास्ते में पुलिस की गाड़ी अचानक पंक्चर हो गई। जब पुलिसकर्मी पहिया बदलने और पंक्चर सुधारने में लगे थे, तभी अक्कू ने मौका देखकर एक ASI की बंदूक छीन ली और पुलिस टीम पर गोली चला दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें गोली उसके दाहिने पैर के निचले हिस्से में लगी। उसे रात 10:30 बजे पहले देवास के जिला अस्पताल ले जाया गया और फिर वहां से उसे इंदौर के अरबिंदो अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सह आरोपी धीरज का भी एनकाउंटर
इसी मामले से जुड़े दूसरे आरोपी धीरज को पुलिस जब लेकर जा रही थी, तब उसने BNP थाना इलाके में भागने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक धीरज ने पुलिस जवान से हथियार छीनकर वार करने की कोशिश की थी। पुलिसकर्मियों ने उसे रुकने की चेतावनी दी लेकिन वह नहीं माना। अपनी जान बचाने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी जो सीधे उसके दाहिने पैर में लगी। धीरज को इलाज के लिए देवास के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
TI दिलीप पुरी को बेरहमी से कुचल दिया था
बता दें कि यह दर्दनाक घटना 1 और 2 नवंबर की दरमियानी रात की है। खातेगांव टीआई दिलीप पुरी (TI Dilip Puri) को खबर मिली थी कि इलाके से अवैध शराब से भरी गाड़ी गुजरने वाली है। वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और नाकाबंदी की। जब उन्होंने आईसर वाहन को रोका और चालक को नीचे उतरने को कहा, तो चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय डिवाइडर पर चढ़ा दी और रफ्तार बढ़ा दी।
इस दौरान आईसर का पिछला पहिया सीधे टीआई दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। साथी पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया और करीब दो घंटे तक सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान (टीआई दिलीप पुरी की मौत) नहीं बच सकी। पुलिस ने गाड़ी को तो जब्त कर लिया था, लेकिन चालक अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला था।
शराब तस्करों और लापरवाह अफसरों पर गिरी गाज
इस वारदात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस अफसरों की आपात बैठक बुलाई थी। साथ ही शराब माफियाओं के खिलाफ पूरी छूट दे दी थी। इसके बाद पूरे नेटवर्क पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरू हुआ।
- शराब कारोबारी गिरफ्तार: पुलिस ने अलीराजपुर से शराब कारोबारी केरम सिंह को पकड़ा। जांच में सामने आया कि जिस ट्रक से टीआई को कुचला गया, उसमें भरी शराब केरम सिंह की ही थी।
- हरदा से जुड़ा नेटवर्क: देवास की एसआईटी (SIT) टीम ने हरदा के शराब कारोबारी राहुल जायसवाल को भी अपनी जांच के दायरे में लिया है।
- दुकानों के लाइसेंस रद्द: हरदा जिला आबकारी विभाग ने भारतींद्र जायसवाल से जुड़ी तीन शराब दुकानों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। साथ ही टिमरनी की शराब दुकान को सील कर दिया गया है।
- अधिकारी-कर्मचारी स suspend: ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर एडीईओ (ADEO) अमरसिंह बघेल और दो आबकारी आरक्षकों (अरुण कुंभारे व कृष्णपाल सिंह डोडिया) को निलंबित कर दिया गया है।
- एसआईटी का गठन: देवास एसपी आदित्य मिश्रा ने मामले की तह तक जाने के लिए एसआईटी बनाई ह। जबकि डीजीपी उपेंद्र जैन ने साफ किया है कि इस तस्करी नेटवर्क के हर तार को काटा जाएगा।
परिवार को 1 करोड़ की सहायता
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहीद टीआई के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई है। सरकार ने परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता राशि देने की बात कही। साथ ही उनकी पत्नी कविता को अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर सब इंस्पेक्टर बनाने का ऐलान किया है।
पुलिस सेवा से पहले शिक्षक थे TI दिलीप पुरी
बता दें कि दिलीप पुरी मूल रूप से धार जिले की सरदारपुर तहसील के बरमंडल गांव के रहने वाले थे। पुलिस सेवा में आने से पहले वे धार जिले के बदनावर में एक सरकारी शिक्षक के तौर पर सेवाएं दे रहे थे। उनके पिता ओमप्रकाश पुरी एक किसान और स्थानीय कांग्रेस नेता हैं। परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा-बेटी हैं। शहीद टीआई का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बरमंडल में पूरे राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया।