भोजशाला मामले की अंतिम सुनवाई आज: ASI रिपोर्ट भरोसे लायक नहीं- मुस्लिम पक्ष
समझें क्या है पूरा मामला...
- धार की भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद को लेकर विवाद है।
- 2022 में हिंदू पक्ष ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
- कोर्ट के आदेश पर ASI (Archaeological Survey of India) ने 98 दिन सर्वे किया था।
- मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और अविश्वसनीय बताया है।
- आज यानी मंगलवार, 12 मई को इस मामले में अंतिम सुनवाई होनी है।
भोजशाला विवाद क्या है?
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर दशकों से विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का दावा है कि परमार वंश के राजा भोज ने 1034 में यहां मंदिर बनवाया था। उनका यह भी आरोप है कि 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के हमले के दौरान मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।
2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मांग थी कि परिसर का धार्मिक स्वरूप तय किया जाए और उसका अधिपत्य हिंदू समाज को सौंपा जाए। हाईकोर्ट ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे का निर्देश दिया था।
ASI सर्वे और रिपोर्ट
ASI ने 22 मार्च 2024 को भोजशाला परिसर का सर्वे शुरू किया था। 98 दिनों की जांच के बाद 15 जुलाई 2024 को 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिसर में परमार राजाओं के काल की विशाल संरचना के अवशेष मिले हैं। ASI के अनुसार वर्तमान ढांचा मंदिरों के अवशेषों से बनाया गया है।
मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है?
सोमवार, 11 मई को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहस की। धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि ASI ने अपनी पूरी रिपोर्ट में भोजशाला मंदिर शब्द का इस्तेमाल किया था।
मुस्लिम पक्ष का तर्क था कि ऐसा साबित करने वाला कोई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है। उनका आरोप है कि रिपोर्ट हिंदू पक्ष के दावों को मजबूत करने के लिए तैयार की गई और इसके निष्कर्षों का कोई कानूनी आधार नहीं है।
मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला?
मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में यह भी कहा कि यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि विवादित परिसर मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला। उनका तर्क था कि यदि यह मंदिर होता तो वहां किसी देवी-देवता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई होती। परिसर में ऐसी कोई मूर्ति नहीं है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अयोध्या मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहां रामलला की मूर्ति स्थापित थी, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि परिसर के स्वामित्व का फैसला सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।
खुदाई में प्लास्टिक और कागज मिले
सुनवाई का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा खुदाई से जुड़े दावों को लेकर था। सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने परिसर का स्वरूप बदले बिना सर्वे करने का आदेश दिया था, लेकिन ASI ने फिर भी खुदाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक स्लैब के नीचे मिले पुरावशेषों के वीडियो में कागज, प्लास्टिक की बोतलें और कप भी दिखाई दे रहे थे। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि 13वीं-14वीं सदी में प्लास्टिक का आविष्कार नहीं हुआ था।
उन्होंने यह भी कहा कि बरामद वस्तुएं बिल्कुल साफ थीं और उन पर मिट्टी तक नहीं लगी थी। जो चीज सदियों से जमीन के नीचे दबी होती, वह इतनी साफ नहीं हो सकती।
वीडियो और तस्वीरों पर भी आपत्ति
मुस्लिम पक्ष ने ASI द्वारा उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि कई वीडियो क्लिप 45 सेकंड से भी कम समय की थीं। रंगीन तस्वीरें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसके अलावा सर्वे प्रक्रिया पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि सर्वे दोनों पक्षों की मौजूदगी में होना था, लेकिन उन्हें कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली। जानकारी केवल सोशल मीडिया के जरिए मिली है।
बुद्ध की मूर्ति का जिक्र रिपोर्ट में नहीं
मुस्लिम पक्ष ने एक और अहम बात कोर्ट के सामने रखी। उनका दावा था कि सर्वे के दौरान गौतम बुद्ध की एक प्रतिमा मिली थी, लेकिन ASI ने उसका उल्लेख अपनी रिपोर्ट में नहीं किया। इसे रिपोर्ट की बड़ी कमी बताया गया। कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट ने कार्बन डेटिंग कराने का निर्देश दिया था, लेकिन ASI ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की।
अब आज होगी अंतिम बहस
इस मामले में हाईकोर्ट में पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर सुनवाई चल रही है। मंगलवार, 12 मई को अंतिम बहस होनी है। सभी पक्षों की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हैं क्योंकि इसके बाद कोर्ट फैसले की तरफ बढ़ेगा।
FAQ
- धार भोजशाला विवाद क्या है?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है और दावा करता है कि इसे परमार वंश के राजा भोज ने 1034 में बनवाया था। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। फिलहाल यह परिसर ASI की देखरेख में है। 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर परिसर का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को सौंपने की मांग की थी।
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