भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दी बड़ी दलील, अगली सुनवाई 11 मई को तय
भोजशाला विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्टकी इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार, 08 मई को सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष ने कोर्ट में कहा कि भोजशाला एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। इसलिए इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता है।
साथ ही 07 अप्रैल 2003 के एएसआई के आदेश को रद्द कर भोजशाला को हिंदू समाज को सौंपने की मांग फिर से उठाई गई।
11 मई को होगी सुनवाई
हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों पर अपना जवाब पेश किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए थे।
अधिवक्ता जैन ने कहा कि प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल अवशेष अधिनियम-1951 में भोजशाला को शामिल किया गया है, इसलिए 2024 के अश्विनी उपाध्याय मामले का यहां कोई असर नहीं पड़ता है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
क्या है भोजशाला विवाद की जड़?
धार की यह ऐतिहासिक इमारत लंबे समय से दो समुदायों के बीच आस्था का केंद्र और विवाद का कारण रही है। हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान में यह स्थल ASI के संरक्षण में है। यहां विशेष व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को पूजा और नमाज की अनुमति है।
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