भोजशाला में शासन की ओर से एजी बोले- यह मंदिर है जिसे तोड़ा गया, जैन समाज ने जैन मंदिर बताया
Indore.धार भोजशाला मामले में बुधवार 6 मई को परिसर को जैन गुरुकुल एवं जैन देवी अंबिका का मंदिर बताने वाले सलेकचंद जैन देहली की याचिका पर सुनवाई हुई। साथ ही शासन पक्ष की ओर से एजी प्रशांत सिंह ने भी तर्क रखे।
जैन समाज ने कहा- अंबिका देवी की प्रतिमा है
जैन समाज की ओर से अधिवक्ता दिनेश राजभर ने बताया कि भोजशाला परिसर मूल रूप से प्राचीन गुरुकुल और जैन मंदिर है। इसे मुस्लिम शासकों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। हिंदू समाज जिसे वागदेवी की मूर्ति होना बता रहा है वास्तव में वह जैन देवी अंबिका की है। अंबिका देवी जैन समाज में बहुत प्रचलित हैं। ASI की सर्वे रिपोर्ट में बताए गए चिह्न इसे जैन तीर्थंकरों का होना दर्शाते हैं।
ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्ति अंबिका देवी की
जैन समाज की ओर से अधिवक्ता राजभर ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में केवल हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों शुक्रवार को नमाज़ करने की अनुमति प्रदान की गई है। राजभर ने बताया कि राजा भोज ने वर्ष 1034 ईस्वी में यहां जैन देवी अंबिका की प्रतिमा स्थापित की थी। यह प्रतिमा 1875 में ब्रिटिश सरकार को मिली थी और वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है।
एजी सिंह ने रामजन्म भूमि फैसले की रखी बात
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बात रखी। उन्होंने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर उठाए गए सवालों पर कहा कि यह मेंटेनेबल है क्योंकि सभी याचिकाकर्ताओं ने राइट टू वर्शिप की मांग की है। उन्होंने रामजन्म भूमि के निर्णय के आधार पर कोर्ट को बताया कि मूर्ति के खंडित /नष्ट/विस्थापित होने से पूजा/आस्था का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
यह मंदिर है जिसे तोड़ा गया
एजी सिंह ने ASI की रिपोर्ट के अनुसार खुदाई में मिले शिलालेख, चिह्न और साक्ष्य का उल्लेख किया। कहा कि यह सारे सबूत यह बताते हैं कि यहां स्थित मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का निर्माण किया गया है। गुरुवार 7 मई को भी एजी सिंह एवं सलेक चंद जैन के अधिवक्ता दिनेश राजभर अपनी बहस जारी रखेंगे।
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