धार भोजशाला में नया मोड़, मुस्लिम पक्ष ने कहा, मंदिर पूजा के सबूत नहीं, वाग्देवी प्रतिमा परिसर में नहीं मिली
News in Short
- भोजशाला केस में मुस्लिम पक्ष के तर्क शुरू।
- याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाए।
- मंदिर पूजा के सबूत नहीं होने का दावा।
- वाग्देवी प्रतिमा परिसर में नहीं मिलने की बात।
- हाईकोर्ट में सुनवाई सोमवार को जारी रहेगी।
News In Detail
धार भोजशाला में नया मोड़ आ गया है। अभी तक हिंदू पक्ष की ओर से सुनवाई चल रही थी। अब इसमें इंटरवीनर के तौर पर मुस्लिम पक्ष की ओर से भी तर्क रखे जाने शुरू हो गए हैं। आरोप लगाए कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी प्रतिमा भोजशाला परिसर से मिली ही नहीं और इस संबंध में पेश दस्तावेज कूटरचित हैं।
धार भोजशाला को लेकर चल रही याचिका में शनिवार को भी सुनवाई जारी रही। इसमें सबसे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने अपने तर्क जारी रखे। उन्होंने मुख्य तौर पर सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया।
साथ ही मांग की है कि इसके लिए हाईकोर्ट कोई निर्देश जारी करे कि ऐसी व्यवस्था हो कि विवाद, तनाव नहीं हो। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से भी तर्क रखे जाने शुरू हो गए।
पहले याचिका के मेंटेनेबिलिटी पर ही सवाल
इसमें इंटरवीनर जिब्रान अंसारी की ओर से अधिवक्ता अजहर वारसी ने तर्क रखे। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर ही सवाल खड़े किए। वारसी ने कहा कि यह वक्फ संपत्ति घोषित हो चुकी है। ऐसे में यदि अपील होना थी तो वक्फ ट्रिब्यूनल में जाना चाहिए था। वहीं यह संपत्ति के टाइटल का मामला है तो जिला कोर्ट में पक्ष रखना चाहिए। वहां पहले ही केस लगा हुआ है जिसमें 10 मई को सुनवाई है।
मंदिर पूजा के कोई सबूत नहीं
वहीं अधिवक्ता ने यह भी बात रखी कि यह मंदिर नहीं था। ऐसे कभी भी कोई सबूत नहीं मिले कि यहां पर पूजा होती थी। स्कूल कहना अलग बात है, जैसे हम कोर्ट को न्याय का मंदिर कहते हैं लेकिन वह मंदिर नहीं है। भोजशाला शब्द भी ब्रिटिश समय में ही आया, यह पहले से नहीं था।
वाग्देवी की प्रतिमा तो वहां मिली ही नहीं
वहीं इसमें गंभीर आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की प्रतिमा कभी भोजशाला परिसर में मिली ही नहीं। याचिकाकर्ताओं द्वारा जो इसमें दस्तावेज ब्रिटिश म्यूजियम के लगाए गए हैं वह कूटरचित हैं।
असली दस्तावेज बताते हुए अधिवक्ता ने ब्रिटिश म्यूजियम की साइट के कुछ रिकॉर्ड भी हाईकोर्ट के सामने रखे। इसमें बताया गया कि वाग्देवी की प्रतिमा धार के सिटी पैलेस एरिया से मिली जो मौजूद परिसर से बाहर है। यानी वाग्देवी की प्रतिमा भोजशाला परिसर में कभी थी ही नहीं।
सोमवार को फिर जारी रहेगी सुनवाई
इस मामले में फिर सोमवार को सुनवाई जारी रहेगी। अधिवक्ता पूर्वी असाटी ने कहा कि अभी कई अहम बिंदुओं पर बहस बाकी है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी द्वारा इसमें सुनवाई की जा रही है।
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