धार भोजशाला अब हिंदुओ की, जानें भोजशाला की पूरी टाइमलाइन
धार की ऐतिहासिक भोजशाला मामले पर इंदौर हाईकोर्ट आज बड़ा फैसला दे दिया है। आज हम भोजशाला बनने से लेकर विवाद तक की कहानी जानेंगे। राजा भोज ने इसे 1034 में बनवाया था। उन्होंने यहां मां सरस्वती की आराधना की थी। भोजशाला एक विशाल आवासीय संस्कृत विश्वविद्यालय था।
सभा भवन की दीवारों पर सुंदर मूर्तियां उकेरी गई थीं। यहां कालिदास और वाणभट्ट जैसे विद्वान पढ़ते थे। भवन के बीच में एक विशाल यज्ञकुंड स्थित था। राजा भोज आयुध विज्ञान में भी बहुत निपुण थे। 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने यहां हमला किया था।
जानिए पूरी टाइमलाइन...
1034 – स्थापना और निर्माण
राजा भोज ने ज्ञान की साधना और मां सरस्वती की आराधना के लिए भोजशाला का निर्माण करवाया।
संरचना और विश्वविद्यालय
भोजशाला नालंदा और तक्षशिला की तरह विशाल आवासीय संस्कृत विश्वविद्यालय था।
सजावट और मूर्तिकला
सैकड़ों अलंकृत लाल स्तंभों पर आधारित सभा भवन की छत और दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई थीं।
शिक्षक और अध्ययन केंद्र
भवन में माध, वाणभट्ट, कालिदास, भवभूति, भास्कर भट्ट, धनपाल, मानतुजाचार्य जैसे विद्वान अध्ययन करते थे।
यज्ञकुंड और प्रतिमा स्थापना
भवन के मध्य में विशाल यज्ञकुंड था। 1035 में मां सरस्वती की सुंदर प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा वसंत पंचमी के दिन हुई।
महाराजा भोज के पास था आयुध विज्ञान
भोज 72 कलाओं और 36 तरह के आयुध विज्ञान में निपुण थे। उन्होंने 1065 तक शासन किया और मंदिर, तालाब, घाट व विद्यालयों का निर्माण करवाया।
1305 – अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण
अलाउद्दीन खिलजी ने मालवा पर आक्रमण कर इस्लामी राज्य की स्थापना की। भोजशाला सहित कई ऐतिहासिक स्थलों को ध्वस्त किया गया।
भोजशाला पर बाद के प्रभाव
1401 में दिलावर खां गौरी ने विजय मंदिर को नष्ट किया। 1514 में मेहमूद शाह खिलजी ने भोजशाला को मस्जिद में बदलने का प्रयास किया। कमाल मौलाना की याद में 204 वर्ष बाद मकबरा बनवाया गया।
हिंदू और मुस्लिम पक्ष में विवाद
इसके बाद से ही धार भोजशाला पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चल रहा है।
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