भोजशाला पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखी सामाजिक सौहार्द की दलील, कहा ऐसे नियम बनाएं कि विवाद ना हो

Sanjay Gupta | Apr 17, 2026, 22:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. धार भोजशाला मामले की सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दलील दी। उन्होंने कोर्ट से समिति बनाकर ऐसे नियम बनाने की मांग की, जिससे विवाद और तनाव की स्थिति से बचा जा सके।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता ने सामाजिक सौहार्द पर जोर दिया।
  • विवाद टालने के लिए नियम बनाने की मांग।
  • कोर्ट ने संविधान की भावना का जिक्र किया।
  • इंटरविनर को बहस की अनुमति नहीं मिली।

धार भोजशाला मामले में चल रही अंतिम सुनवाई में शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने बात रखी। वह अंतर सिंह यादव व अन्य की याचिका में अपने तर्क रख रहे थे। उनका मुद्दा धार में शांति व्यवस्था को लेकर था।



धार भोजशाला मामले में शुक्रवार 17 अप्रैल को तीसरी याचिका में तर्क रखे गए। याचिका अंतर सिंह यादव, अनवर हुसैन, मजरूल्ला खान, नंदराम परमार, पुरुषोत्तम हिरवले, रामानारायण धाकड़ व रियाज मोहम्मद खान की है। इनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने बेंच के सामने बात रखी। सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने की।



यह बात रखी गई

वरिष्ठ अधिवक्ता चितले ने कहा कि भोजशाला एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्ष इसका उपयोग करते हैं। बसंत पंचमी मंगलवार या शुक्रवार को आने पर कई बार तनाव और संघर्ष की स्थिति देखी जाती है।



ऐसे में मुख्य मुद्दा है कि शांति व्यवस्था बनी रहे और सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहे। इसलिए कोर्ट द्वारा उच्च स्तरीय समिति या आयोग गठित कर केंद्र व राज्य शासन को निर्देशित किया जाए कि वह ऐसे नियम बनाएं, विधायी व्यवस्था करें, ताकि विवाद ना हो।



यह अलग तरह की याचिका है, यह संविधान की खूबी

उनके तर्क सुनने के बाद बेंच ने भी कहा कि यही हमारे संविधान की खूबी है कि हम सभी धर्मों को साथ में लेकर चलते हैं। यह अलग तरह की याचिका है, जिसमें आपने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की मांग की है। अभी इस याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता चितले के तर्क जारी रहेंगे।



इंटरविनर को किया मना

याचिका पर सुनवाई के दौरान इंटरविनर ने बहस की मंजूरी मांगी, जिसे बेंच ने खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि आप पक्षकार नहीं हैं, पहले पक्षकारों को सुनेंगे और इसके बाद ही इंटरविनर को समय दिया जाएगा। हम सभी की बात सुनेंगे। उधर एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन को भी बेंच ने कहा कि आप भी पक्षकार हैं, तो आप भी अपनी रिपोर्ट और तर्क रख सकते हैं।



ये खबरें भी पढ़ें...



महाकाल लोक बनाने वाली बाबरिया कंपनी 67 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी में उलझी, जमानत खारिज



हाईकोर्ट में रखे तर्क- भोजशाला संस्कृत सीखने का केंद्र, इसका उज्जैन के महाकाल मंदिर से संबंध



भोजशाला पर हाईकोर्ट बेंच बोली- यह मामला हिंदू-मुस्लिम का नहीं, हिंदू पक्ष के तर्क पूरे



भोजशाला वक्फ संपत्ति नहीं, यहां प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट नहीं होता लागू, हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट ने रखे तर्क



Tags:
  • हाईकोर्ट
  • धार
  • एएसआई
  • भोजशाला
  • संविधान
  • जस्टिस विजय कुमार शुक्ला