भोजशाला पर हाईकोर्ट बेंच बोली- यह मामला हिंदू-मुस्लिम का नहीं, हिंदू पक्ष के तर्क पूरे
Indore. धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में गुरुवार को भी सुनवाई हुई। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर तर्क पूरे हो गए। सोमवार से गुरुवार तक वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने तर्क रखे। गुरुवार को मुख्य रूप से पुरातत्व सर्वे की रिपोर्ट के तथ्य रखे गए। वहीं, सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि यह मामला हिंदू-मुस्लिम पक्ष का नहीं है। संबंधित स्मारक को लेकर है। अब शुक्रवार को अन्य याचिकाकर्ता अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद पक्षकारों को मौका मिलेगा। एजी प्रशांत सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, शोभा मेनन भी वीसी से जुड़े। सुनवाई अभी लंबी चलेगी।
हिंदू फ्रंट की ओर से यह बात रखी गई
अधिवक्ता जैन ने तर्क रखते हुए न्यायालय को बताया कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर ही है। एएसआई द्वारा लगभग 2100 पेज की सर्वे रिपोर्ट वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन पर आधारित है। रिपोर्ट में इस स्मारक के मंदिर होने के कई प्रमाण और साक्ष्य मौजूद हैं। साल 1904 में लॉर्ड कर्जन ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें मंदिर होने के प्रमाण हैं।
श्री राम जन्मभूमि के निर्णय का दिया हवाला
अधिवक्ता जैन ने सुप्रीम कोर्ट के श्री राम जन्मभूमि मंदिर मामले के फैसले का हवाला दिया। श्री राम जन्मभूमि निर्णय में पैराग्राफ 675 से 679 तक एएसआई रिपोर्ट की मान्यता का उल्लेख है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 11 मार्च 2024 के आदेश के बाद सर्वे किया था। 22 मार्च 2024 से 27 जून 2024 तक 98 दिन सर्वे चला।
इस तरह हुआ था भोजशाला का सर्वे
यह सर्वे जीपीएस, जीपीआर और कार्बन डेटिंग तकनीक से किया गया। सर्वे भोजशाला की 50 मीटर परिधि में हुआ। दोनों पक्षों की उपस्थिति में यह प्रक्रिया पूरी हुई। एएसआई रिपोर्ट में इसे 11वीं और 12वीं शताब्दी का परमारकालीन ढांचा बताया गया। मंदिर के मलबे का उपयोग कर इसे मस्जिद बनाने का प्रयास बताया गया। उत्खनन में गणेश जी और ब्रह्मा जी की मूर्तियां मिलीं।
नमाज बंद हो, पूरे समय पूजा का अधिकार मिले
वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने कहा कि धारा 25 के तहत पूजा का अधिकार मिले। भोजशाला पर हिंदू समाज का पूर्ण अधिकार हो। नमाज बंद की जाए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विनय जोशी, पार्थ यादव, मनी मुंजाल, सौरभ सिंह और याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहे।
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