भोजशाला में आज नहीं होगी नमाज, फैसले के बाद पहला शुक्रवार, चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात
धार की भोजशाला में अब मुस्लिम समाज जुम्मे की नमाज नहीं पढ़ सकेगा। हाईकोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाया था कि यह पूरा परिसर मंदिर है। इस फैसले के बाद आज शुक्रवार को पहली बार यहां नमाज नहीं होगी।
इस दिन को देखते हुए धार का जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है।
चूंकि शुक्रवार का दिन दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसलिए शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां बहुत बड़े स्तर पर की गई हैं। प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी कीमत पर शहर का माहौल बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।
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हिंदू संगठनों का सामूहिक पूजा का आह्वान
हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद हिंदू संगठनों में काफी उत्साह है। इसी के चलते हिंदू संगठनों ने इस शुक्रवार को भोजशाला मंदिर परिसर में एक बड़ी और सामूहिक अखंड पूजा करने का आह्वान किया है।
दूसरी तरफ पुलिस और जिला प्रशासन ने भी अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे हाई कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से पालन करवाएंगे।
इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि परिसर में किसी भी तरह की नई परंपरा को शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जो व्यवस्था पहले से तय है चीजें उसी के दायरे में रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम समाज
वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। लोगों से कहा है कि जुम्मे की नमाज मोहल्लों की मस्जिदों में पढ़ें। वहीं हिंदू समाज ने धानमंडी में होने वाला सभा कार्यक्रम रद्द कर दिया है और अब लोग सीधे भोजशाला जाकर पूजा-अर्चना करेंगे।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए पूरी धार नगरी को एक तरह से छावनी में बदल दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती की गई है।
पहले जहां सुरक्षा के लिए 1200 जवान तैनात किए गए थे। वहीं अब संवेदनशीलता को देखते हुए जवानों की संख्या बढ़ाकर दो हजार कर दी गई है।
भोजशाला परिसर और उसके आस-पास के जितने भी संवेदनशील इलाके हैं। उन सभी पर आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए पैनी नजर रखी जाएगी।
प्रशासन ने धार में बिल्कुल वैसी ही सुरक्षा व्यवस्था लागू की है, जैसी हर साल बसंत पंचमी के मौके पर आने वाले शुक्रवार को की जाती है। यानी सुरक्षा का स्तर सबसे ऊंचा रखा गया है।
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मां वाग्देवी की प्रतिकृति भी स्थापित
बता दें कि धार भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद वहां पूजन शुरू हो गया है। साथ ही मां वाग्देवी की प्रतिकृति की भी स्थापित हो गई है। वहीं याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने कुछ मांगे सामने रखी हैं।
मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने एएसआई को पत्र लिखकर कई मांगे रखी हैं। साथ ही हाईकोर्ट के फैसले को अभी तक पूरी तरह लागू नहीं होने की बात कही है।
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अभी भी एक रुपए शुल्क लग रहा है
जानकारी के अनुसार श्रद्धालु और दर्शनार्थियों से अभी भी एक रुपए का टिकट लिया जा रहा है, जो आदेश की अवहेलना है। सभी को नि:शुल्क पूजा और प्रवेश का अधिकार हो।
कमरा खोला जाए, यह मंदिर
भोजशाला में दक्षिण पूर्व दिशा में कमरे को खोलने की मांग भी पत्र की गई है। बताया गया है कि वह मूल रूप से मंदिर है। सर्वे में सामने आए सभी अवशेषों के दर्शन की व्यवस्था करने की मांग की गई। साथ ही हिंदू धर्म के अवशेषों को परिसर में स्थापित करने कि मांग की गई।
मुस्लिम धर्म के चिह्न हटाए जाएं
साथ ही मांग की गई है कि इंदौर हाईकोर्ट ने अब इसे मंदिर घोषित किया है। इसके चलते यहां अनधिकृत रूप से लगाए गए मुस्लिम धर्म के प्रतीक चिह्न की जगह नहीं बनती है। इन्हें तत्काल हटाया जाए।
जो भी देवी देवताओं की प्रतिमाएं, धार्मिक चिह्न धार म्यूजियम में हैं, उन्हें भी परिसार में स्थापित किया जाए। श्रद्धालुओं को नियमित पूजा की मंजूरी दी जाए।