भोजशाला की सुरक्षा में बड़ी चूक! गर्भगृह में चुपके से रखी वाग्देवी की प्रतिमा
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोजशाला परिसर के गर्भगृह में चुपके से मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा रख दी गई।
- सुरक्षा व्यवस्था तैनात होने के बाद भी किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
- प्रतिमा के पास पूजा सामग्री भी मिली,-वहां बाकायदा पूजा-अर्चना भी की गई थी।
- अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को वहां से हटवाया।
- हाल ही में हाईकोर्ट ने भोजशाला को सरस्वती मंदिर माना है।
मध्य प्रदेश के धार जिले से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शनिवार, 06 जून को एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने वहां की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरक्षा के बावजूद किसी अज्ञात व्यक्ति ने भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित कर दी। चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी सुरक्षा होने के बाद भी किसी को इस बात का पता तक नहीं चला।
शाम को जब यह बात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ध्यान में आई, तो विभाग के बड़े अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रतिमा को वहां से हटवा दिया गया।
हाल ही में हाई कोर्ट ने भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यहां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान बनाने का बड़ा ऐलान किया है। इस माहौल में अचानक मूर्ति का रखा जाना और फिर हटाया जाना एक नई बहस को जन्म दे गया है।
दोपहर में कम भीड़ का उठाया फायदा
जानकारी के मुताबिक शनिवार दोपहर के समय धार की भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ थोड़ी कम थी। माना जा रहा है कि बस इसी बात का फायदा उठाया गया है। चुपके से कोई व्यक्ति परिसर के अंदर अष्टधातु से बनी मां वाग्देवी की प्रतिमा लेकर पहुंच गया और उसे गर्भगृह में रख दिया।
इतना ही नहीं प्रतिमा के आगे फूल, चावल और बाकी पूजन सामग्री भी चढ़ाई गई थी। इससे यह पूरी तरह साफ है कि मूर्ति रखने के बाद वहां बकायदा अच्छे से पूजा-पाठ भी किया गया।
शाम को लगभग साढ़े छह बजे एएसआई के अधिकारियों को इस बात का पता चला था। हालांकि अब तक यह पहेली बनी हुई है कि इतनी भारी मूर्ति अंदर कौन लाया? सुरक्षाकर्मियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
कैसे पार हुआ सुरक्षा घेरा?
भोजशाला की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां हमेशा सुरक्षा की कई परतें तैनात रहती हैं। परिसर के बाहरी हिस्से की जिम्मेदारी पुलिस चौकी और सुरक्षा बलों के पास है। वहीं अंदरूनी हिस्से की निगरानी एएसआई के अपने सुरक्षा गार्ड करते हैं।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि इतनी भारी मूर्ति सुरक्षा घेरे को भेदकर अंदर तक कैसे पहुंच गई?
मुख्य बातें और घटनाक्रम
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | भोजशाला परिसर, धार जिला, मध्य प्रदेश |
| घटना का समय | शनिवार दोपहर (शाम 6:30 बजे एएसआई ने हटाया) |
| क्या हुआ? | गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा चोरी-छिपे रखी गई |
| सुरक्षा स्थिति | पुलिस और एएसआई गार्ड्स की मौजूदगी के बावजूद चूक हुई |
| हालिया संदर्भ | हाई कोर्ट द्वारा सरस्वती मंदिर घोषित करना और 'सरस्वती लोक' की घोषणा |
भोज उत्सव समिति ने मामले से पल्ला झाड़ा
इस घटना के सामने आने के बाद भोज उत्सव समिति ने पल्ला झाड़ लिया है। समिति का कहना है कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
वहीं समिति के संयोजक गोपाल शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि समिति पहले से स्थापित की गई मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक मूर्ति की ही नियमित पूजा कर रही है।
गोपाल शर्मा ने बताया कि बीते 17 मई को समिति ने मैहर की अखंड ज्योत यहां स्थापित की थी। शनिवार को जो अष्टधातु की नई प्रतिमा देखी गई है उससे समिति का कोई वास्ता नहीं है।
कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा तनाव
पिछले कुछ हफ्तों से भोजशाला को लेकर हलचल काफी तेज है। 15 मई को ही हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में इस ऐतिहासिक परिसर को सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता दी थी।
इसके ठीक बाद 25 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान बनाने की बड़ी घोषणा की।
इसके साथ ही, मां वाग्देवी की असली प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम (London Museum) से भारत वापस लाने की मांग भी बहुत समय से चल रही है। ऐसे माहौल में अचानक इस प्रतिमा का मिलना कई तरह के संशयों को पैदा करता है।
निरीक्षण के तुरंत बाद हुई घटना
इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। शनिवार की दोपहर को ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पुरातत्व अधीक्षक डॉ. शिवाकांत बाजपेई खुद भोजशाला के दौरे पर आए थे।
शिवाकांत बाजपेई ने पूरे परिसर का निरीक्षण किया था। साथ ही सुरक्षा के इंतजामों को देखा था। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की थी।
वहीं उनके जाने के कुछ ही घंटों बाद यह मूर्ति मिलने की घटना हो गई। इससे मामला और ज्यादा रहस्यमयी हो गया है।
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