प्रॉपर्टी कारोबारी मनोज मंडलोई ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में BJP नेता का नाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- पीथमपुर के सांवरिया नगर में एक प्रॉपर्टी व्यवसायी ने आत्महत्या कर ली।
- मौके से मिले कथित सुसाइड नोट में दो लोगों के नाम लिखे मिले हैं।
- नोट में करोड़ों रुपए के लेनदेन और भुगतान न होने का जिक्र है।
- पुलिस अब नोट की सत्यता की जांच कर रही है।
सल्फास खाकर दी जान
पीथमपुर के घाटबिल्लौद क्षेत्र में सांवरिया नगर के रहने वाले मनोज मंडलोई ने सोमवार को सल्फास खा लिया। इलाज से पहले ही उनकी मौत हो गई। बता दें कि मनोज प्रॉपर्टी का काम करते थे। उनकी मौत की खबर से इलाके में सनसनी फैल गई है।
नोट में दो नाम, करोड़ों की बात
बताया जा रहा है कि पुलिस को मौके से एक पेज का कथित सुसाइड नोट मिला है। नोट में मनोज ने दो लोगों का नाम लिखा है। पहला नाम है पूर्व भाजपा जिला महामंत्री उमेश गुप्ता का है। दूसरा नाम प्रॉपर्टी कारोबारी राम खंडेलवाल का है।
नोट के मुताबिक मनोज का उमेश गुप्ता के साथ प्रॉपर्टी कारोबार में सात करोड़ 50 लाख रुपए का लेनदेन हुआ था। इसमें से 3 करोड़ 50 लाख रुपए मिल चुके थे। बाकी रकम नहीं मिली ऐसा नोट में लिखा है।
मंडलोई ने राम खंडेलवाल पर भी आरोप लगाया है। नोट के अनुसार उनसे एक करोड़ 20 लाख रुपए लेने थे। यह रकम भी वापस नहीं मिली थी।
नोट में मनोज ने लिखा है कि उसने कई बार दोनों से रुपए मांगे थे। लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसी वजह से वह लंबे समय से मानसिक तनाव में था। नोट के अंत में उसने अपनी मौत के लिए दोनों को जिम्मेदार बताया है।
बता दें कि यह अभी तक सिर्फ एक कथित सुसाइड नोट है। इसमें लिखी बातें आरोप हैं, साबित तथ्य नहीं।
परिवार का दावा
वहीं मनोज के भाई अनिल मंडलोई ने मीडिया को घटना की जानकारी दी है। एक और परिजन अजय मंडलोई भी साथ मौजूद थे।
परिवार के मुताबिक मनोज ने बिचौली इलाके में जमीन का सौदा कराने के लिए रुपए जुटाए थे। ये रुपए उसने अलग-अलग लोगों से ब्याज पर उधार लिए थे। यह रकम उसने उमेश गुप्ता और राम खंडेलवाल को दी थी।
परिवार का कहना है कि मनोज पिछले तीन साल से अपनी रकम वापस मांग रहा था। लगातार चक्कर लगाने के बावजूद उसे पैसे नहीं मिले। इससे वह मानसिक रूप से टूटता चला गया।
पहले भी सुर्खियों में रहा नाम
बता दें कि राम खंडेलवाल का नाम इससे पहले भी एक बड़े मामले में आ चुका है। 20 जून 2014 को आजाद पटेल की हत्या हुई थी। यह हत्या लेनदेन के विवाद में हुई थी।
इस मामले में शुरुआत में राम खंडेलवाल फरियादी बने थे। लेकिन बाद में पुलिस जांच में उनकी भूमिका सामने आई। पुलिस ने उन्हें हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
अब मनोज मंडलोई के कथित सुसाइड नोट में फिर से उनका नाम आने से यह मामला और सुर्खियों में आ गया है।
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