धार के धामनोद में बवाल : अतिक्रमण हटाने गई टीम पर भारी पथराव, थाना प्रभारी घायल

Sanjay Dhiman | Mar 07, 2026, 15:42 IST
Photograph: (the sootr)
धार के धामनोद में अतिक्रमण हटाने आई प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों ने पथराव किया। इस घटना में थाना प्रभारी समेत 12 लोग घायल हो गए। विवाद की जड़ सरकारी जमीन पर कब्जा था।

News in Short

  • धार के धामनोद में अतिक्रमण हटाने पर ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम पर पथराव किया।
  • पथराव में थाना प्रभारी और महिला पुलिसकर्मी सहित 12 लोग घायल हो गए।
  • तहसीलदार की गाड़ी के शीशे तोड़े गए, प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
  • विवादित जमीन पर कब्जा हटाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई जारी थी, कोर्ट का आदेश था।
  • अतिक्रमण हटाने के विरोध में जयस और कांग्रेस नेताओं ने समर्थन दिया।

News in Detail

DHAR. धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र के सिरसोदिया गांव में अतिक्रमण हटाने के दौरान शनिवार को एक बड़ा विवाद हो गया। प्रशासनिक टीम ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने मकान को हटाने की कोशिश की, लेकिन इस कार्रवाई का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। इस हमले में थाना प्रभारी प्रवीण ठाकरे और महिला पुलिसकर्मी सहित कुल 12 लोग घायल हो गए। थाना प्रभारी को इंदौर रेफर किया गया, जबकि तहसीलदार की गाड़ी के शीशे भी तोड़ दिए गए।



टीम पर पथराव क्यों हुआ?

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर यह विवाद तब बढ़ा जब यह पता चला कि जिस मकान को हटाया जा रहा था, उसका 25 प्रतिशत हिस्सा विधायक कालू सिंह ठाकुर की कृषि भूमि में आता था। इसके अलावा, अन्य जमीन का भी विवाद था, जिसे लेकर लंबे समय से दो पक्षों के बीच तनातनी थी। इस जमीन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद जारी था, और यह विवाद अब एक बड़ी घटना का रूप ले चुका था।



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ग्रामीणों ने आरोप लगाया

मकान में रहने वाली पिंकी ने आरोप लगाया कि अधिकारी उन्हें जबरदस्ती गाड़ी में बैठाकर अस्पताल ले आए। उन्होंने कहा कि उनके परिवार की हालत गंभीर है और विधायक कालू सिंह इस पूरे घटनाक्रम के जिम्मेदार हैं। पिंकी का कहना था कि अगर उनकी मां को कुछ हुआ तो इसके लिए विधायक कालू सिंह को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।



प्रशासन की कार्रवाई

नायब तहसीलदार कृष्णा पटेल ने कहा कि सिरसोदिया गांव में अनिल, अनीता, धर्मेंद्र और पल्लवी की निजी जमीन का सीमांकन कराया गया था। सीमांकन के बाद यह पाया गया कि कुछ लोग इस जमीन पर अवैध कब्जा कर रहे थे। इसके बाद, कब्जा हटाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके खिलाफ कब्जाधारियों ने सिविल न्यायालय में वाद दायर किया, लेकिन कोर्ट ने उनकी आपत्ति खारिज कर दी और आदेश दिया कि कब्जा हटाया जाए।



सिविल कोर्ट का फैसला और अतिक्रमण की स्थिति

यह विवाद करीब दो बीघा जमीन का था, जो पटवारी हल्का नंबर 14 के सर्वे नंबर 99 में आती है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन अनिल और उनके परिवार के नाम दर्ज है। आरोप है कि संतोष और उसके परिवार ने इस जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बना लिया था। संतोष का कहना था कि वे पिछले 50 सालों से इस जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन अदालत ने उनके दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए।



अतिक्रमण के विरोध में राजनीतिक हस्तक्षेप

इस घटना के बाद जयस और कांग्रेस के कुछ नेता भी मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण करने वालों के पक्ष में समर्थन जताया। इसके बाद प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए और पुलिस बल तैनात किया। अब, एएसपी विजय डाबर और मनावर एसडीएम प्रमोद गुर्जर समेत 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घटनास्थल पर तैनात हैं।



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अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद की स्थिति

पथराव के दौरान महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुईं और आठ महिलाओं को पुलिस ने अभिरक्षा में लिया। पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया, और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। इस विवाद के समाधान के लिए अब पुलिस और प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।



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