DPC ने शौचालय प्रमाणपत्र देने के बदले मांगे 17 लाख, लोकायुक्त ने एक लाख लेते दबोचा
समझें पूरा मामला...
- धार शिक्षा अधिकारी एक लाख रिश्वत लेते पकड़े।
- 122 शौचालय निर्माण में 17 लाख मांगी थी।
- लोकायुक्त ट्रैप दल ने रंगे हाथ दबोचा।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 लागू।
- समग्र शिक्षा अभियान में घोटाला उजागर हुआ।
मध्य प्रदेश के धार जिले में लोकायुक्त (Lokayukta) ने एक बड़ी भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई की है। समग्र शिक्षा केंद्र (Samagra Shiksha Kendra) के जिला परियोजना समन्वयक प्रदीप कुमार खरे को एक लाख रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने 122 शासकीय शौचालय निर्माण के कार्य पूर्ण प्रमाण पत्र के बदले 17 लाख रुपए की मांग की थी।
धार में लोकायुक्त की कार्रवाई
मध्य प्रदेश लोकायुक्त (Madhya Pradesh Lokayukta) ने 18 मई 2026 को धार जिले में एक बड़ी भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार राय के निर्देश पर यह ट्रैप ऑपरेशन किया गया।
आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह लोकायुक्त कार्रवाई भ्रष्टाचार (Corruption) के विरुद्ध सख्त नीति का हिस्सा है। इस गिरफ्तारी से जिले में हड़कंप मच गया है।
कौन है आरोपी अधिकारी
गिरफ्तार आरोपी प्रदीप कुमार खरे समग्र शिक्षा केंद्र (Samagra Shiksha Kendra), जिला शिक्षा केंद्र धार में जिला परियोजना समन्वयक (District Project Coordinator) के पद पर कार्यरत था। शिकायतकर्ता दिलीप साधव उसी कार्यालय में प्रभारी सहायक यंत्री के पद पर पदस्थ हैं। दोनों के बीच विवाद शौचालय निर्माण कार्य की फाइल को लेकर था।
शौचालय निर्माण घोटाला
समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha Abhiyan) के तहत धार जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालय परिसरों में 122 शौचालयों के निर्माण हेतु लगभग 3 करोड़ 42 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे।
यह निर्माण कार्य अभी चल रहा था। इसका सुपरविजन (Supervision) शिकायतकर्ता दिलीप साधव कर रहे थे। काम पूरा होने से पहले ही आरोपी खरे ने कार्य पूर्ण प्रमाण पत्र (Completion Certificate) पर हस्ताक्षर के बदले रिश्वत की मांग शुरू कर दी।
17 लाख रिश्वत की मांग
आरोपी प्रदीप कुमार खरे ने शौचालय निर्माण की कुल स्वीकृत राशि का 5 प्रतिशत यानी 17 लाख रुपए रिश्वत (Bribery) की मांग की थी। यह मांग कार्य पूर्ण होने के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के बदले में की गई थी।
शिकायतकर्ता ने यह अनुचित मांग मानने से इनकार किया और लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत दर्ज कराई। सत्यापन में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद ट्रैप दल का गठन किया गया।
रंगे हाथ गिरफ्तारी
लोकायुक्त ट्रैप दल (Lokayukta Trap Team) ने 18 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए आरोपी खरे को रिश्वत की प्रथम किश्त के रूप में एक लाख रुपए लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 (Prevention of Corruption Act 2018) की धारा 7 में मामला दर्ज किया गया।
लोकायुक्त की अपील
लोकायुक्त संगठन (Lokayukta Organization) ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। आम नागरिकों से अपील है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत (Bribe) की मांग करे, तो वे लोकायुक्त कार्यालय इंदौर से तुरंत संपर्क करें।
इस गिरफ्तारी से शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने का संकेत मिलता है। समग्र शिक्षा जैसे जनहित कार्यक्रमों में पारदर्शिता जरूरी है। यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।
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