आदिवासी बहुल धार जिला में कुपोषण का संकट: 25 हजार बच्चे चपेट में, आंगनवाड़ी केंद्र धार से हो रही निगरानी
समझें क्या है पूरा मामला
- धार कुपोषण के आंकड़े विभागीय रिपोर्ट से सामने आए हैं।
- जिले में करीब 25 हजार बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं।
- 5 हजार से ज्यादा बच्चे अति गंभीर कुपोषण श्रेणी में हैं।
- NRC में पांच महीनों में 250 बच्चे भर्ती हुए।
- पोषण आहार आपूर्ति में तीन महीने की रुकावट की बात सामने आई।
धार में कितने बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं?
धार आदिवासी बहुल जिला लंबे समय से कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में करीब 25 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनमें से 5 हजार से अधिक बच्चे सबसे गंभीर कुपोषण श्रेणी में हैं। करीब 19 हजार से अधिक बच्चों को कम वजन की श्रेणी में रखा गया है।
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, इससे पता चलता है कि कई बच्चों को सही पोषण नहीं मिल रहा है। जिला प्रशासन और डब्ल्यूएसीडीडी ऐसे बच्चों की पहचान कर रहे हैं। उनके इलाज और पोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पोषण पुनर्वास केंद्र NRC में बढ़ा भार
जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चों का इलाज होता है। पिछले पांच महीनों में करीब 250 गंभीर कुपोषित बच्चों को यहां भर्ती किया गया। इन बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम पाया गया है। उनमें कमजोरी और संक्रमण जैसी समस्याएं भी मिलीं है। ऐसे बच्चों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है। उन्हें पौष्टिक खाना, दवाएं और जरूरी इलाज दिया जाता है। इसका मकसद उनकी सेहत जल्द सुधारना है।
परी की कहानी, उम्मीद की एक मिसाल
धार जिले के खेड़ी बलवारी गांव की परी भी गंभीर कुपोषण से जूझ रही थी। परी की उम्र साढ़े तीन साल है। उसकी मां का नाम रानूबाई है। कुपोषण की पहचान के बाद परी का इलाज शुरू हुआ। उसे पोषण पुनर्वास कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। लगातार निगरानी और पौष्टिक आहार दिया गया।
डॉक्टरों की देखरेख में भी उसका इलाज हुआ। इसके बाद उसके वजन और सेहत में सुधार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग इस मामले को एक मिसाल मान रहा है। विभाग के मुताबिक, समय पर कुपोषण की पहचान जरूरी है। इससे समय पर कुपोषण का असर कम किया जा सकता है।
बच्चों के साथ माताओं को भी ट्रेनिंग
जिला अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र सिर्फ बच्चों का इलाज नहीं करता है। यहां बच्चों की माताओं और परिजनों को भी ट्रेनिंग दिया जाता है। केंद्र में बच्चों को ज्यादा प्रोटीन वाला खाना दिया जाता है। उन्हें मल्टीविटामिन और जरूरी दवाइयां भी दी जाती हैं। इसके अलावा बच्चे को अस्पताल से रिलीज करते वक्त उसके देखरेख का दिशानिर्देश भी दिए जाते हैं। उन्हें घर में मौजूद चीजों से पौष्टिक खाना बनाना सिखाया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि कुपोषण से लड़ने में परिवार की बड़ी भूमिका है।
आंगनवाड़ी केंद्रों से हो रही निगरानी
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास बुधौलिया ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धार एमपी के बड़े जिलों में शामिल है। जिले में तीन हजार 863 आंगनवाड़ी केंद्र चल रहे हैं। जिले की आबादी और क्षेत्रफल दोनों काफी बड़े हैं। इस वजह से यहां बच्चों की संख्या भी ज्यादा है। जिले में बच्चों का वजन और स्वास्थ्य का रिकॉर्ड रखा जाता है। इसी जानकारी से कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है।
पोषण आहार की सप्लाई पर उठे सवाल
कुपोषण की समस्या के बीच पोषण आहार की सप्लाई पर सवाल उठे हैं। जानकारी के मुताबिक, करीब तीन महीने तक सप्लाई में रुकावट रही। आंगनवाड़ी केंद्रों से बच्चों को पोषण आहार दिया जाता है। यह आहार छह महीने से तीन साल तक के बच्चों को मिलता है। गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी यह आहार दिया जाता है। इसे टेक होम राशन यानी घर ले जाने वाला आहार कहते हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, यह व्यवस्था कई परिवारों के लिए जरूरी है। खासकर आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए। ऐसे में पोषण आहार की नियमित सप्लाई जरूरी है। सवाल यह है कि ऐसी रुकावट फिर नहीं होगी। इसकी गारंटी आखिर कौन देगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी अपनी बात रखी है। विभाग के मुताबिक, कुपोषण सिर्फ खाना कम मिलने से नहीं होता। इसमें स्वास्थ्य और साफ-सफाई की भी बड़ी भूमिका है। टीकाकरण और जागरूकता भी इसमें अहम हैं। विभाग परिवारों से भी सावधानी बरतने की अपील कर रहा है। बच्चों को पौष्टिक खाना देने की सलाह दी जा रही है। साफ-सफाई का ध्यान रखने को भी कहा गया है। स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानियां बरतने की अपील भी की गई है।
यह खबर क्यों जरूरी है
बच्चों का पोषण उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। यह देश के मानव संसाधन से भी जुड़ा मुद्दा है। मध्य प्रदेश के ऐसे आंकड़े बड़ी तस्वीर दिखाते हैं। इनसे सरकार की नीतियों की जमीनी स्थिति समझ आती है। आदिवासी और कमजोर परिवारों तक पोषण पहुंचाना जरूरी है। यह समानता के अधिकार से भी जुड़ा मुद्दा है। पोषण आहार की रुकावट बच्चों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। समय पर जानकारी मिलने से ऐसी गलतियां रोकी जा सकती हैं। जवाबदेही तय होने से भी ऐसी चूक दोबारा रोकी जा सकती है।
FAQs
- धार जिले में कुपोषण की स्थिति क्या है?
धार जिले में करीब 25 हजार बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं, जिनमें से 5 हजार से अधिक बच्चे अति गंभीर कुपोषण श्रेणी में हैं। - पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में किस तरह का इलाज किया जाता है?
पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चों का इलाज किया जाता है, जहां उन्हें पौष्टिक भोजन, दवाएं और आवश्यक चिकित्सा दी जाती है। - कुपोषण से लड़ने के लिए माताओं को क्या प्रशिक्षण दिया जाता है?
कुपोषण से लड़ने के लिए माताओं को प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें पोषण संबंधी जानकारी, पौष्टिक भोजन बनाने के तरीके और बच्चों की देखभाल का दिशानिर्देश शामिल है।