आधी रात खिड़की से कूदी 40 छात्राएं, पैदल पहुंची थाने, कहा...
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के धार जिले के निसरपुर स्थित एक कन्या छात्रावास में हड़कंप मच गया।
- बीती रात करीब 40 छात्राएं खिड़की से कूदकर बाहर निकल गईं।
- छात्राएं पैदल ही कुक्षी थाने की ओर चल पड़ीं।
- छात्रावास में तय क्षमता से करीब तीन गुना ज्यादा छात्राएं रह रही हैं।
- छात्राएं खाने की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से नाराजगी थी।
रात में अचानक भागीं छात्राएं
बता दें कि धार जिले के निसरपुर में माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर है। यहां बीती रात करीब 10 बजे अफरातफरी मच गई।
छात्रावास में रहने वाली कुल 91 छात्राओं में से लगभग 40 छात्राएं कमरे की खिड़की से नीचे कूद गईं। इसके बाद वे अंधेरे में पैदल ही कुक्षी थाने की ओर निकल पड़ीं।
सड़क पर छात्राओं को अचानक चलते देख आसपास के लोग चौंक गए। स्थानीय लोगों को उनकी सुरक्षा की चिंता हुई। वे भी छात्राओं के साथ चलने लगे ताकि रास्ते में कोई परेशानी न हो।
50 बेड में 140 छात्राएं ठूंसी गईं
थाने पहुंचने पर छात्राओं ने छात्रावास की पूरी पोल खोल दी। उनका आरोप है कि यह छात्रावास सिर्फ 50 छात्राओं की क्षमता के हिसाब से बना है। लेकिन यहां 140 छात्राओं को ठूंस-ठूंस कर रखा जा रहा है।
छात्राओं ने बताया कि उन्हें तय मेन्यू के अनुसार खाना और नाश्ता नहीं मिलता। जब वे इसकी शिकायत करती हैं तो जवाब मिलता है कि खाना पसंद नहीं है तो मत खाओ।
छात्राओं का यह भी कहना है कि जिस दिन अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, उस दिन व्यवस्था अचानक सुधर जाती है। अधिकारियों के जाते ही सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।
रास्ते में छात्रा की तबीयत बिगड़ी
निसरपुर से खंडवा-बड़ौदा मार्ग पर पैदल चलते समय एक छात्रा अचानक बीमार पड़ गई। उसे तुरंत कुक्षी के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने छात्राओं को कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन छात्राएं अपनी शिकायत लेकर थाने जाने पर अड़ी रहीं।
आखिरकार पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने वाहनों का इंतजाम किया। इसके बाद सभी छात्राओं को सुरक्षित तरीके से कुक्षी थाने तक पहुंचाया गया।
थाने पहुंचा पूरा प्रशासनिक अमला
घटना की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। तहसीलदार प्रवीण पाटीदार, एसडीओपी सुनील गुप्ता, टीआई दीपक चौहान और चौकी प्रभारी भुवानसिंह चौहान थाने पहुंचे।
इसके अलावा जयस संगठन के रविराज बघेल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं का पूरा समर्थन किया।
अधिकारियों ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि एसडीएम के साथ छात्रावास का निरीक्षण किया जाएगा। व्यवस्थाओं की गहराई से जांच होगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
जयस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
आश्वासन मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से छात्राओं को वापस छात्रावास भेज दिया गया। लेकिन मामला अभी शांत नहीं हुआ है। जयस नेता ((जय आदिवासी युवा शक्ति)) ने साफ चेतावनी दी है कि अगर व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा।
नेता ने यह भी कहा कि अगर वार्डन ने छात्राओं पर किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिश की, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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