धीरेंद्र शास्त्री पर बिफर गईं साध्वी हर्षा रिछारिया : बोलीं- संतों को सेवादारों पर भरोसा नहीं तो सुरक्षा कौन देगा?

Amresh Kushwaha | Oct 05, 2026, 14:55 IST
धीरेंद्र शास्त्री की अपील पर हर्षा रिछारिया का सवाल।
बागेश्वर धाम की अपील के बाद अब आश्रमों की सुरक्षा पर बहस छिड़ गई है। साध्वी हर्षा रिछारिया ने इस पर खुलकर बात की है। हर्षा का सवाल सीधा है। यदि संतों को अपने ही सेवादारों पर भरोसा नहीं, तो श्रद्धालुओं की सुरक्षा कौन करेगा? हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी संत, आश्रम या बागेश्वर धाम का नाम नहीं लिया है।
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हर्षा रिछारिया का बयान क्या है?

साध्वी हर्षा रिछारिया (Harsha Richhariya) ने अपने बयान में कहा कि उनकी किसी से कोई बुराई नहीं है। लेकिन कुछ आश्रमों से जो बयान आ रहे हैं, उन पर उन्हें बात करनी है।



उन्होंने कहा कि इन बयानों में माताओं और बहनों को आश्रम न आने की सलाह दी जा रही है। यदि आएं भी, तो किसी सेवादार पर भरोसा न करने को कहा जा रहा है। साथ ही सुरक्षा की जिम्मेदारी न लेने की बात भी हो रही है।



हर्षा ने इसी बात पर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक यदि किसी संत को अपने आश्रम के सेवादारों पर भरोसा नहीं, तो लोग अपने बच्चों और परिवार को वहां कैसे भेजें? उन्होंने पूछा कि कौन ले रहा है सुरक्षा की गारंटी आश्रम के अंदर?



दर्शन करो और घर लौट जाओ

हर्षा ने साफ किया कि वे हर आश्रम को बुरा नहीं कह रहीं। लेकिन उनका कहना है कि कुछ आश्रम सही नहीं हैं। ऐसे में यह उलझन क्यों पालनी कि कौन सी जगह सुरक्षित है और कौन सी नहीं?



उनकी सलाह थी कि लोग आश्रमों में रुकें ही नहीं। जाएं, दर्शन करें और वापस घर आ जाएं। उन्होंने कहा कि आश्रम की पंचायत और राजनीति में फंसने की जरूरत नहीं है।



सुरक्षित रहना है तो घर पर रहकर मंत्र जाप करें। घर पर ही पूजा-पाठ करें। बयान के आखिर में हर्षा ने कहा कि जिन्होंने खुद आश्रम बनाया, वे आश्रम को नहीं संभाल पा रहे। फिर "जय श्री राम" कहकर बात खत्म की।



धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा था?

छतरपुर जिले के गढ़ा में सिद्धपीठ बागेश्वर धाम है। इसके पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 3 अक्टूबर, शनिवार की रात अपील की थी। यह अपील श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं से थी।



उन्होंने कहा था कि महिलाएं अकेली धाम न आएं। यदि अकेली आती हैं, तो किसी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यही सलाह धाम के सेवादारों के लिए भी थी।



बागेश्वर धाम धीरेंद्र शास्त्री की महिलाओं से अपील में कुछ और बातें भी थीं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु मंदिर परिसर और हॉल के अलावा कहीं न जाएं। साथ ही धाम में लंबे समय तक न रुकें। अपनी सुरक्षा और सामान की जिम्मेदारी खुद उठाएं।



5 किलोमीटर की सुरक्षा पर सफाई

धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया था कि बागेश्वर धाम के करीब 5 किलोमीटर के पूरे परिसर की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी नहीं है। वे सिर्फ हॉल और मंदिर की जिम्मेदारी ले सकते हैं।



उन्होंने वृंदावन जैसी धार्मिक नगरियों में सामने आई घटनाओं का हवाला दिया। उनका कहना था कि वे नहीं चाहते कि किसी अप्रिय घटना से बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज की बदनामी हो।



धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म पर हमलों का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि कई लोग उपद्रव करते रहते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को खुद सावधान रहना होगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि धाम प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं से सामान की देखरेख खुद करने को कहा है।



दोनों बयानों में फर्क क्या है?

शास्त्री की अपील श्रद्धालुओं को सतर्क करने पर टिकी थी। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी की सीमा भी बताई। हर्षा का बयान उसी बात को दूसरी तरफ से देखता है।



उनका सवाल यह है कि जब संत ही सुरक्षा की गारंटी नहीं ले रहे, तो भरोसा किस पर हो। यानी एक तरफ सावधानी की सलाह है। दूसरी तरफ जवाबदेही का सवाल है।



ध्यान रहे कि हर्षा ने अपने बयान में शास्त्री या बागेश्वर धाम का नाम नहीं लिया है। बयान की टाइमिंग शास्त्री की अपील के बाद की है। इसी वजह से दोनों को जोड़कर देखा जा रहा है।



पहले भी रहे हैं चर्चित बयान

हर्षा रिछारिया इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। 14 जनवरी 2026 को जबलपुर में उन्होंने कहा था कि पिछले एक साल में उन्हें विरोध और मानसिक दबाव झेलना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि मैं सीता माता नहीं हूं कि बार-बार परीक्षाएं देती रहूं।



21 जनवरी को भोपाल में उन्होंने कहा कि कुछ संत उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहे थे। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। 24 अप्रैल को सन्यास पर विवाद के बीच उन्होंने अपने खिलाफ टिप्पणियों को ईर्ष्या और टीआरपी (Television Rating Point) का खेल बताया था।



26 अप्रैल को उन्होंने चुनौती दी कि एक भी आरोप साबित हुआ तो वे सारी संपत्ति समर्पित कर देंगी। साबित न होने पर एक करोड़ रुपए की मानहानि का दावा करने की बात भी कही थी। 10 सितंबर को उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर विवाद में उन्होंने सरकार और प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया था।



अब आगे क्या?

अभी तक इस बयान पर बागेश्वर धाम या किसी संत की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में बहस आगे कहां जाएगी, यह देखना बाकी है।



फिलहाल श्रद्धालुओं के सामने दोनों बातें हैं। एक तरफ सतर्क रहने की अपील है। दूसरी तरफ आश्रमों की जवाबदेही का सवाल। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर यह चर्चा आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

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