धीरेंद्र शास्त्री का विवादित बयान: लोगों को याद आया कथावाचक प्रदीप मिश्रा का किस्सा, जब नाक रगड़कर मांगनी पड़ी थी माफी

Aman Vaishnav | Nov 02, 2026, 14:58 IST
शिवपुरी कथा में राम-कृष्ण की तुलना पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान चर्चा में, प्रदीप मिश्रा के पुराने विवाद के बाद माफी को लेकर उठे सवाल।
Dhirendra Shastri sparks controversy with Ram-Krishna comparison remarks reviving Pradeep Mishra apology debate
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर माहौल एक बार फिर गरमा गया है। शिवपुरी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण की तुलना करते हुए कुछ ऐसी बातें कह दीं, जिस पर अब लोग सवाल उठा रहे हैं। इस बयान के सामने आते ही लोगों को कथावाचक प्रदीप मिश्रा का पुराना मामला याद आने लगा है।

दरअसल जून 2024 में प्रदीप मिश्रा ने राधारानी को लेकर एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि राधारानी की शादी भगवान कृष्ण से नहीं, बल्कि मथुरा के छाता निवासी अनय घोष से हुई थी। इसके बाद भारी विवाद खड़ा हुआ था।



उस समय विवाद इतना बढ़ गया था कि कथावाचक प्रदीप मिश्रा को खुद बरसाना के राधारानी मंदिर जाना पड़ा था। वहां उन्हें जमीन पर नाक रगड़कर माफी मांगनी पड़ी थी। अब लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या भगवान कृष्ण पर टिप्पणी करने के बाद धीरेंद्र शास्त्री को भी उसी तरह नाक रगड़कर माफी मांगनी पड़ सकती है?



प्रदीप मिश्रा ने नाक रगड़कर मांगी थी माफी

कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री का बयान

दरअसल पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने शिवपुरी में कथा के दौरान यह बयान दिया है। उन्होंने सामने बैठे श्रद्धालुओं से बात करते हुए कहा कि उनके राम जी सीधे हैं और कृष्ण जी टेढ़े हैं।



इसके बाद उन्होंने भगवान राम से तुलना करते हुए कहा कि...



हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा, चलना भी सीधा और दिखते भी सीधे हैं। तुम्हारे वालों का तो नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े और खड़े भी टेढ़े होते हैं। हमारे वालों का धाम भी सीधा अयोध्या है और तुम्हारे वालों का धाम वृंदावन है।



बंसी बजाना खेल, धनुष चलाना बड़ी बात

धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने कथा में मौजूद बांसुरी वादक की तरफ इशारा किया और कहा कि बंसी बजाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि सुनो, तुम्हारे ठाकुर जी क्या करते हैं, बंसी बजाते हैं? तो बंसी बजाना कोई बड़ी बात थोड़ी है। देख हमारे यहां तो यह कलाकार भी बंसी बजा रहा है।



इसके बाद उन्होंने उस कलाकार से भरी सभा में बंसी बजवाई। फिर उन्होंने वहां बैठे लोगों से पूछा कि राम जी को मानने वाले कितने लोग हैं और कहा कि आज तुम लोग खुशी से फूले नहीं समाओगे।




गाय चराना आसान, बंदरों को नचाना खेल नहीं

भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने और गाय चराने के प्रसंग पर भी धीरेंद्र शास्त्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोग कहेंगे कि हमारे भगवान तो गाय चराते हैं, लेकिन गाय तो कोई भी चरा सकता है। उन्होंने गाते हुए कहा कि गायों को चराना तो खेल भी है, पर बंदरों को नचाना खेल नहीं है।



जब पर्वत उठाने की बात आई, तो उन्होंने कहा कि तुम कहोगे कि हमारे वाले पर्वत उठा लेते हैं, तो यह कोई बड़ी बात है क्या? हमारे वाले भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया था।



विवाद बढ़ने पर दी सफाई: यह सिर्फ विनोद था

अपने इन सभी बयानों के बाद जब बात आगे बढ़ी, तो धीरेंद्र शास्त्री ने तुरंत यह भी साफ करने की कोशिश की कि उनका इरादा गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम ठाकुर जी के विरोधी हैं। हम उनके विरोधी कतई नहीं हैं, बस हंसी-मजाक और विनोद की बात आ गई, इसलिए हमने यह कह दिया। हालांकि उनके इस बयान के बाद अब तुलना और विवाद दोनों शुरू हो चुके हैं।



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