रिटायर्ड महिला ऑफिसर से 1.58 करोड़ लूटने वाला निकला कारोबारी: 33 दिन तक किया था डिजिटल अरेस्ट

Amresh Kushwaha | Jun 30, 2026, 14:15 IST
ग्वालियर ठगी कांड में बड़ा खुलासा
ग्वालियर की रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.58 करोड़ रुपए की डिजिटल अरेस्ट ठगी हुई थी। नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार हुआ है। उसके खाते में ठगी के 19.50 लाख मिले हैं। साथ ही 1.10 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन भी सामने आए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ग्वालियर की 69 साल की रिटायर्ड महिला से 1.58 करोड़ की ठगी हुई थी।
  • ठगों ने खुद को IPS और CBI अफसर बताकर महिला को डिजिटल अरेस्ट रखा था।
  • क्राइम ब्रांच ने नासिक से लोहा कारोबारी को गिरफ्तार किया है।
  • उसके खाते में ठगी के 19.50 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे।
  • उसी खाते में 1.10 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन भी मिले हैं।

ठगी के मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी

ग्वालियर की एक बुजुर्ग महिला को ठगने वाले गिरोह से जुड़ा पहला आरोपी पकड़ में आ गया है। यह महिला 69 साल की रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन हैं। उन्हें दिल्ली पुलिस का आईपीएस अधिकारी और सीबीआई ऑफिसर बनकर ठगा गया था। ठगों ने उन्हें पूरे 33 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा था। इस दौरान उनसे एक करोड़ 58 लाख रुपए की ठगी कर ली गई थी। अब इस मामले में महाराष्ट्र के एक लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार किया गया है।



पकड़े गए आरोपी से पूछताछ में कई नई बातें सामने आई हैं। बुजुर्ग महिला से ठगी गई रकम में से 19 लाख 50 हजार रुपए इसी कारोबारी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में गए थे। यह खाता उसका करंट अकाउंट है। सोमवार, 28 जून की देर रात पुलिस आरोपी को लेकर नासिक से ग्वालियर पहुंची है।



खाते में मिले 1.10 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन

लोहा कारोबारी पुलिस के सामने खुद को निर्दोष बता रहा था। वहीं, उसके अकाउंट की जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई है। पिछले छह महीने में इस खाते से एक करोड़ 10 लाख रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि यह कारोबारी सिर्फ इस एक ठगी में नहीं, बल्कि कई दूसरी वारदातों में भी शामिल हो सकता है। अब ग्वालियर क्राइम ब्रांच इन एक करोड़ 10 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन की भी अलग से जांच करेगी।



133 खातों में बांट दी गई ठगी की रकम

जांच में पता चला है कि बुजुर्ग महिला का पूरा पैसा सबसे पहले चार राज्यों में भेजा गया था। यह राज्य पश्चिम बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र थे। यहां चार करंट खातों में रकम ट्रांसफर हुई थी। यह पहली लेयर के खाते माने जाते हैं। इसके बाद साइबर एक्सपर्ट की टीम ने और गहराई से जांच की।



पता चला कि ठगों ने एक ही दिन में यह पूरी रकम 133 खातों में बांट दी। यह खाते देश के 11 राज्यों के 40 से ज्यादा शहरों में फैले हुए थे। इतनी तेजी से पैसा बांटने का मकसद यही था कि असली रकम का पता लगाना मुश्किल हो जाए।



साइबर एक्सपर्ट की जांच में एक और बात साफ हुई है। यह सभी 133 खाते म्यूल अकाउंट (किराए पर लिए गए खाते) हैं। इन खातों को कमीशन देकर खरीदा गया था। यानी असली खाताधारकों को कुछ पैसे देकर उनके खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया।



देशभर में फैला है ठगी का नेटवर्क

इस मामले में सिर्फ एक राज्य या एक शहर का नेटवर्क शामिल नहीं है। ठगों ने अपना जाल कई राज्यों में फैला रखा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में इनका नेटवर्क सक्रिय है। इसके अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, गुजरात और राजस्थान में भी इनके एजेंट काम करते हैं। यह एजेंट म्यूल खाते तैयार करते हैं। फिर ठगी की रकम को इन खातों के जरिए जल्दी से खुर्दबुर्द कर देते हैं।



कैसे शुरू हुई पूरी ठगी की कहानी

यह पूरा मामला ग्वालियर शहर का है। यहां सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा इलाके में रहने वाली 69 साल की मीनाक्षी नाखरे को ठगों ने निशाना बनाया। उनके पति रमेश नाखरे एक रिटायर्ड अधिकारी हैं। क्राइम ब्रांच में दी गई शिकायत में मीनाक्षी ने पूरी घटना बताई। उन्होंने बताया कि 10 मई 2026 को उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम डिपार्टमेंट का अधिकारी अशोक गुप्ता बताया था।



उसने महिला से कहा कि उनके नाम पर एक और मोबाइल नंबर चल रहा है। उसी नंबर से मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी काम होने का आरोप लगाया गया था। महिला ने साफ कहा कि यह नंबर उनका नहीं है। इसके बाद ठगों ने डर का नया खेल शुरू किया।



उन्होंने कहा कि दो घंटे में दिल्ली आना होगा, नहीं तो गिरफ्तारी होगी। इसके बाद ठगों ने खुद को आईपीएस और सीबीआई अफसर बताकर महिला को 33 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान धीरे-धीरे पूरे 1.58 करोड़ रुपए ठग लिए गए।



सीएसपी ने बताई जांच की मौजूदा स्थिति

इस मामले में सीएसपी (सिटी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पोलिस) रोबिन जैन ने अपनी बात रखी है। उनके मुताबिक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लगभग एक करोड़ 58 लाख रुपए की ठगी की गई थी। अब इस मामले में पुलिस को सफलता मिलना शुरू हो गया है।



महाराष्ट्र के नासिक से क्राइम ब्रांच ने पहली गिरफ्तारी की है। पकड़े गए लोहा कारोबारी के खाते में ठगी की रकम से 19 लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर हुए थे। इसमें से कुछ रकम फ्रीज कर दी गई है। उन्होंने बताया कि खाते में और भी कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं, जिनकी पूछताछ जारी है।



डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें

साइबर ठगी के मामलों में डिजिटल अरेस्ट सबसे ज्यादा डराने वाला तरीका बन गया है। आम तौर पर ठग खुद को सीबीआई, ईडी या साइबर क्राइम अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। वे पीड़ित को कोई पुरानी गलती बताकर डराते हैं। फिर 24 घंटे कैमरे के सामने रहने का दबाव डालते हैं। ऐसे में डरने की जरूरत नहीं है।



डर लगे तो परिवार वालों से बात करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं। कॉल करने वाले का बताया कोई भी ऐप कभी डाउनलोड न करें। यदि पहले से ऐसा कोई ऐप डाउनलोड हो गया है तो उसे तुरंत डिलीट करें। फोन को फॉर्मेट कर एंटीवायरस जरूर डालें। जितनी देर होगी, पैसा वापस आने के चांस उतने कम होते जाएंगे। इसलिए ऐसी घटना होने पर जल्द से जल्द रिपोर्ट करना सबसे फायदेमंद है।



FAQ

  1. डिजिटल अरेस्ट में फंसकर पैसे ट्रांसफर हो जाएं तो क्या करें?
    जितनी जल्दी हो सके साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जिन खातों में पैसे गए हैं, उनकी जानकारी पुलिस को दें ताकि खाते होल्ड कराए जा सकें। अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करें।

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