दिग्विजय ने जीतू के आरोप को किया खारिज, बोले-ट्रस्ट को 1 रुपए में जमीन देने में कुछ गलत नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- दिग्विजय ने जीतू के आरोप को बताया झूठ, दी सरकार को क्लीन चिट।
- 500 करोड़ वाला आरोप गलत है, दिग्विजय ने डीड दिखाकर समझाया।
- कमलनाथ भी थे इसी ट्रस्ट के अध्यक्ष, दिग्गी का जवाब।
- दिग्विजय बोले: दलालों का खेल है यह, आरोप में दम नहीं।
- अपनी ही पार्टी के आरोप को दिग्विजय ने किया खारिज।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को उज्जैन में कहा कि वीर भारत न्यास को 1 रुपए में जमीन देने में कोई गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने ट्रस्ट की डीड दिखाकर मोहन सरकार को क्लीन चिट दे दी।
यह बयान इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि दो दिन पहले उन्हीं की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में यही मामला उठाया था। पटवारी ने आरोप लगाया था कि उज्जैन में 500 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन इस ट्रस्ट को 1 रुपए में दे दी गई। दिग्विजय ने इसे दलालों का खेल बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।
दिग्विजय बोले: मैं रिसर्च करके आया हूं, आरोप गलत है
शनिवार को उज्जैन में पत्रकारों से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने ट्रस्ट की डीड सामने रखी। उन्होंने साफ कहा कि वे हमेशा रिसर्च करके आते हैं और यह आरोप पूरी तरह गलत है।
दिग्विजय ने बताया कि वीर भारत न्यास मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट एक्ट (MP Public Trust Act), 1951 की धारा 4 के तहत पंजीकृत है। इसका पंजीयन 26 अप्रैल, 2013 को हुआ था। उन्होंने कहा कि यह एक शासकीय संस्था है। इसके अध्यक्ष हमेशा प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हैं।
कमलनाथ भी रह चुके हैं इसी ट्रस्ट के अध्यक्ष
दिग्विजय ने एक अहम बात कही कि जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद इस ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे हैं।
इसका मतलब साफ है कि यह ट्रस्ट किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि सरकारी ढांचे का हिस्सा है। दिग्विजय के मुताबिक जो जमीन और बिल्डिंग ट्रस्ट को दी गई है वह सिंधिया परिवार द्वारा बनाई गई इमारत है। नियमानुसार उसे वीर भारत न्यास को सौंपा गया है।
सिंधिया की बिल्डिंग को लेकर दिग्विजय ने दिया पूरा संदर्भ
दिग्विजय ने बताया कि एक समय इस बिल्डिंग को किसी होटल को देने की बात चल रही थी। चर्चा थी कि इसे हेरिटेज होटल बनाया जाए, लेकिन बाद में तय हुआ कि यहां वीर भारत न्यास बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जमीन का 1 रुपए में हस्तांतरण इसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए इसमें घोटाले जैसी कोई बात नहीं है।
दिग्विजय ने कहा: यह दलालों का खेल है
आरोप लगाने वालों पर दिग्विजय ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ऐसे दलाल घूम रहे हैं जो झूठे आरोप लगाकर पैसे वसूलते हैं। उनका कहना था कि इस मामले में भी यही हो रहा है।
हालांकि, उन्होंने सीधे जीतू पटवारी का नाम नहीं लिया। लेकिन उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि यह आरोप उन्हीं की पार्टी के अध्यक्ष ने लगाया था।
दो दिन पहले पटवारी ने दिल्ली से उठाया था यह मामला
दो दिन पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने कहा था कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को 500 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन मात्र 1 रुपए में दे दी गई।
पटवारी ने यह भी कहा था कि इस ट्रस्ट में मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी का नाम शामिल है। इस आरोप से प्रदेश की राजनीति में काफी हलचल मची थी।
अब सवाल यह है कि कांग्रेस में एक सुर क्यों नहीं?
दिग्विजय सिंह का यह बयान कांग्रेस के भीतर एकजुटता पर सवाल खड़ा करता है। एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर बड़ा घोटाले का आरोप लगाते हैं। दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह उसी आरोप को गलत बता देते हैं। पार्टी का आधिकारिक रुख अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
FAQ
- वीर भारत न्यास को 1 रुपए में जमीन देने का विवाद क्या है?
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को 500 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन मात्र 1 रुपए में दे दी गई। उन्होंने कहा था कि इस ट्रस्ट में मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी भी शामिल हैं। दिग्विजय सिंह ने ट्रस्ट की डीड दिखाकर इस आरोप को गलत बताया है। - दिग्विजय सिंह ने मोहन सरकार को क्लीन चिट क्यों दी?
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वीर भारत न्यास एक शासकीय संस्था है जो MP Public Trust Act, 1951 के तहत पंजीकृत है। इसके अध्यक्ष हमेशा मुख्यमंत्री होते हैं और कांग्रेस शासन में कमलनाथ भी इसके अध्यक्ष रह चुके हैं। इसलिए जमीन का हस्तांतरण नियमानुसार है।
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