कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में 150 करोड़ का गेहूं घोटाला: दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप, जांच की मांग

Sanjay Dhiman | Apr 15, 2026, 19:40 IST
Photograph: (the sootr)
दिग्विजय सिंह ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में 150 करोड़ के गेहूं घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर EOW जांच की मांग की।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में 150 करोड़ रुपए के गेहूं घोटाले की बात कही है। इस मामले में दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर ईओडब्ल्यू से जांच कराने की मांग की है। दिग्विजय ने यह आरोप लगाया कि सरकारी गोदामों में रखे गेहूं की देखरेख में भारी लापरवाही हुई, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ है।



घोटाले का लगाया आरोप

दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस घोटाले में राज्य के विभिन्न सरकारी गोदामों का इस्तेमाल किया गया। इन गोदामों में रखे गेहूं की देखरेख और किराए में 150 करोड़ रुपए का खर्च हुआ। इसके परिणामस्वरूप 35 करोड़ रुपए की लागत वाले गेहूं सड़ गए। इस घोटाले से सरकार को भारी आर्थिक हानि हुई।



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मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

दिग्विजय सिंह ने जुलाई 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने "न खाऊं, न खाने दूं" के सिद्धांत को लेकर घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। अब एक बार फिर उन्होंने सीएम मोहन यादव इस मामले की जांच की अपील की है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।



दोषियों के खिलाफ कार्रवाई

कांग्रेस नेता ने सरकार से यह भी अनुरोध किया कि दोषी अधिकारियों और निजी गोदाम मालिकों के खिलाफ राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि सरकारी गोदामों में सुरक्षा और निगरानी की कमी ने घोटाले को जन्म दिया और जनता को नुकसान पहुंचाया।



40 हजार टन गेहूं बना कचरा, कौन जिम्मेदार?

सरकारी आंकड़ों और आरोपों की मानें तो करीब 40 हजार टन गेहूं गोदामों में सड़ गया। यह वह अनाज था जो गरीबों के पेट की आग बुझाने के काम आता। अधिकारियों की लापरवाही और निजी गोदाम मालिकों की मिलीभगत ने इसे मिट्टी में मिला दिया। दिग्विजय सिंह ने अब इस पूरे मामले की जांच राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक बड़ी जांच नहीं होगी, सच सामने नहीं आएगा।



भ्रष्टाचार की जड़ें और निजी गोदामों का खेल

इस पूरे मामले में निजी गोडाउन मालिकों की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि घटिया गेहूं को सुरक्षित दिखाने के लिए कागजों पर हेरफेर की गई। सरकार ने गेहूं की सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान निजी मालिकों को किया। जबकि हकीकत में अनाज गोदामों के अंदर धीरे-धीरे सड़कर पूरी तरह से बर्बाद हो रहा था। यह सीधे तौर पर सरकारी अधिकारियों और निजी माफियाओं के बीच की सांठगांठ को दर्शाता है।



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