अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह बोले-मैं 50 का महसूस करता हूं तो किसी को आपत्ति क्यों?
शिवधाम से रामधाम की पदयात्रा
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ( Digvijay Singh) 20 अक्टूबर को दशहरे के दिन पदयात्रा शुरू करेंगे। उज्जैन से अयोध्या पदयात्रा महाकाल मंदिर से चलेगी, रामलला के मंदिर पर खत्म होगी। करीब 950 से 1000 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को उन्होंने शिवधाम से रामधाम बताया। यह Ayodhya padyatra ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ नाम से होगी।
80 साल की उम्र, 1000 किलोमीटर का सवाल
यह जवाब उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में पदयात्रा के सवाल पर दिया। सोचिए एक बार। 80 की उम्र में 1000 किलोमीटर पैदल चलना आसान है क्या?
सनातन और हिंदुत्व पर क्या बोले
उनके मुताबिक सनातन धर्म की मूल भावना पर गलत धारणा बनाई जा रही है। उन्होंने हिंदू शब्द को फारसी बताया। उनके मुताबिक सनातन ने वसुधैव कुटुंबकम (पूरी दुनिया एक परिवार) का संदेश दिया।
उनका आरोप है कि आरएसएस (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh) और वीएचपी (VHP – Vishwa Hindu Parishad) इस भावना को बिगाड़ रहे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा और चंदे पर आरोप
अब जरा पीछे चलते हैं। ने राम मंदिर को लेकर अपने पुराने आरोप दोहराए। राम मंदिर चढ़ावा, चंदा और निर्माण, तीनों पर उन्होंने सवाल उठाए।
उनके मुताबिक पहले चंदे में घपला हुआ, फिर निर्माण में गड़बड़ी। बाद में रामलला की चढ़ोत्री में कथित हेराफेरी हुई। उन्होंने कहा कि इसमें विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोग शामिल हैं।
चंपत राय रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं। दिग्विजय के मुताबिक वे आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपराओं से उनका कोई लेना-देना नहीं। उनका आरोप है कि चढ़ावा आरएसएस के चुनावी चंदे में लग रहा है। दिग्विजय ने कहा कि वे इसके खिलाफ लड़ेंगे।
200 से 300 करोड़ की कथित चोरी
उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे की नकदी, विदेशी मुद्रा और गहनों की चोरी हुई। उन्होंने एसआईटी (SIT – Special Investigation Team) जांच का हवाला दिया। उनके मुताबिक आरोपियों ने 2 से 3 करोड़ रुपए की चोरी मानी।
उनका आरोप है कि चोरी कैमरों में कैद हुई। आठ महीने का सीसीटीवी (CCTV – Closed Circuit Television) फुटेज डिलीट किया गया। कुल कथित चोरी 200 से 300 करोड़ रुपए हो सकती है (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)। ठेकों में कमीशनखोरी और मंदिर के पास जमीन खरीद के आरोप भी लगाए।
3264 करोड़ दान और लागत का हिसाब
दिग्विजय के मुताबिक ट्रस्ट गठन के समय अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपए थी। निर्माण 2200 करोड़ रुपए में हुआ। उनका दावा है कि श्रद्धालुओं ने 3264 करोड़ रुपए दान दिए। यह रकम 1000 रुपए देने वाले करीब 3.26 करोड़ लोगों के बराबर है। आखिर इस दान का हिसाब किसके पास है?
हिसाब देने की बात अधर्म कैसे हुई?
यह सवाल उन्होंने दान और लागत के आंकड़ों पर उठाया।
1989 की रामशिला और चांदी की ईंटें
दिग्विजय ने 1989 के रामशिला पूजन अभियान का जिक्र किया। विश्व हिंदू परिषद से उन्होंने जुटाई राशि और चांदी की ईंटों का हिसाब मांगा। उनका दावा है कि 1400 करोड़ रुपए जुटने की जानकारी आई थी (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)। वीएचपी के अनुसार राशि 8 करोड़ 25 लाख रुपए थी। पूरा हिसाब क्यों नहीं दिया गया? चांदी की ईंटें कहां गईं?
दिग्विजय आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की विचारधारा का समर्थन नहीं करते। लेकिन मंदिर निर्माण के पक्ष में हमेशा रहे। उन्होंने 1989 में श्रद्धानुसार योगदान दिया और बाद में दान भी दिया।
गैर राजनीतिक यात्रा, सबके लिए खुली
दिग्विजय के मुताबिक धर्म व्यक्ति को भीतर से बदलता है। उनका कहना है कि कुछ लोग श्रीराम के नाम पर सत्ता में आए। वे राम को लूटकर रामभक्त नहीं कह सकते। उन्होंने यात्रा को पूरी तरह गैर राजनीतिक बताया। हर वर्ग, पंथ और विचारधारा के लोग इसमें शामिल हो सकते हैं। अब सबकी नजर 20 अक्टूबर पर है। यात्रा का संदेश उनके मुताबिक साफ है।