दिग्विजय-उमा केस में 7 साल से नहीं हुई बहस, अब हाईकोर्ट ने की स्टेटस रिपोर्ट की तलब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दिग्विजय सिंह और उमा भारती के बीच चल रहा मानहानि का यह मामला पिछले सात वर्षों से तारीखों की जाल में फंसा हुआ है। साल 2017 से आज तक इस प्रकरण में मुख्य बहस शुरू नहीं हो पाई है। रिकॉर्ड के मुताबिक, कभी दिग्विजय सिंह तो कभी उमा भारती के वकीलों द्वारा स्थगन (Adjournment) ले लिया जाता है, जिससे सुनवाई लगातार आगे बढ़ती रही।
हाईकोर्ट ने मामले की स्टेटस रिपोर्ट की तलब
जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस प्रमोद अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मामले में हो रही देरी पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने अब प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से भोपाल जिला अदालत में चल रही सुनवाई की स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है। आगामी 27 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में यह रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जाएगी, जिससे साफ होगा कि निचली अदालत में मामला किस स्थिति में है।
भोपाल जिला अदालत में लंबित दो दशक पुराना विवाद
इस विवाद की शुरुआत साल 2003 में भोपाल की जिला अदालत से हुई थी। दिग्विजय सिंह ने उमा भारती के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। करीब 21 साल पहले दायर किए गए इस मानहानि के मामले ने लंबा सफर तय किया है। जिला अदालत में वर्षों तक चली सुनवाई के बाद, अब हाईकोर्ट की नजर इस बात पर है कि इतने लंबे समय में वहां कितनी प्रगति हुई है।
एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई से पहले हाईकोर्ट की तारीख
साल 2018 में इस मामले को भोपाल विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) के सुपुर्द कर दिया गया था। जहां एक ओर हाईकोर्ट में 27 अप्रैल को स्टेटस रिपोर्ट पेश होगी, वहीं दूसरी ओर भोपाल की विशेष अदालत में इस मामले की नियमित सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
सियासी गलियारों में फिर चर्चा में मामला
मध्य प्रदेश की राजनीति के दो धुरंधरों के बीच की यह कानूनी लड़ाई हमेशा से चर्चा में रही है। अब हाईकोर्ट की सक्रियता और स्टेटस रिपोर्ट मांगे जाने के बाद यह माना जा रहा है कि वर्षों से लंबित इस मामले में अब त्वरित कार्यवाही देखने को मिल सकती है। दोनों ही पक्षों की नजरें अब 27 और 30 अप्रैल की महत्वपूर्ण तारीखों पर टिकी हैं।
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