दिग्विजय सिंह ने मचा दी सांवेर में सनसनी, मंत्री तुलसी सिलावट खेमा चिंता में, सोनकर खुश
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की गुगली ने मंत्री तुलसी सिलावट और उनके समर्थकों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। वहीं सोनकर खेमा खुश है।ट
द सूत्र ने गुरुवार 23 जुलाई को एक्सक्लूसिव खबर दी थी कि दिग्गी ने सीएम मोहन यादव से मुलाकात में कहा कि तुलसी का टिकट कट रहा है।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और सीएम मोहन यादव की मुलाकात, बोले तुलसी का टिकट कटेगा
दरअसल इंदौर एयरपोर्ट पर 23 जुलाई को पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की सीएम मोहन यादव से हुई 15 मिनट की चर्चा, जिसमें 5 मिनट कानाफूसी थी, वह राजनीतिक गलियारों में गूंज रही है।
इस मुलाकात से जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के कान खड़े हैं, वहीं इसने सांवेर की राजनीति में भी हलचल मचा दी है।
खासकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी और म.प्र. के मंत्री तुलसीराम सिलावट और उनके समर्थकों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं।
क्या बोल गए थे दिग्गी
दिग्गी ने इंदौर एयरपोर्ट पर चुनिंदा बीजेपी नेताओं की उपस्थिति में एमपी राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (कैबिनेट मंत्री का दर्जा) के सावन सोनकर से एक लाइन कही।
दिग्गी ने सीएम की मौजूदगी में कहा कि सावन सांवेर विधानसभा से 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी करो। इस बार तुलसी का टिकट कट रहा है।
कौन हैं सावन सोनकर
सावन सोनकर एमपी में सांवेर विधानसभा के धाकड़ बीजेपी नेता और मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे प्रकाश सोनकर के परिवार से हैं।
सोनकर अभी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के प्रमुख हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। लंबे समय से सावन सोनकर भी सांवेर (एससी सीट) से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
सिलावट म.प्र. के सबसे वरिष्ठ विधायक
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के साथ तुलसीराम सिलावट ही ऐसे सक्रिय राजनेता हैं जो साल 1985 में विधायक बने थे। छात्र संघ की राजनीति और अध्यक्ष बनने के बाद वह साल 1982-83 में कांग्रेस के टिकट पर पार्षद बने थे। आज सिलावट 71 साल के हैं।
तुलसीराम सिलावट 1985 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर सांवेर सीट से उतरे और विधायक बने। उन्होंने बीजेपी के प्रकाश सोनकर को हराया था।
साल 1990 और 1993 में सिलावट बीजेपी के प्रकाश सोनकर से हार गए। फिर सिलावट 1998 से 2003 तक ऊर्जा विकास निगम में रहे और चुनाव नहीं लड़ा।
वहीं साल 2007 में सोनकर के निधन के बाद वह फिर सांवेर विधानसभा लौटे और उपचुनाव में जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव साल 2008 में भी जीते लेकिन साल 2013 में बीजेपी के राजेश सोनकर से हार गए। फिर साल 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और विधायक बने, साथ ही कमलनाथ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने।
कांग्रेस से बीजेपी में आए, दो बार चुनाव जीते
साल 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक और मंत्री बनने वाले सिलावट, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मार्च 2020 में बीजेपी में शामिल हो गए। साथ ही विधायक पद से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद सिलावट इसी साल नवंबर 2020 के उपचुनाव में भारी बहुमत से जीते और साल 2023 विधानसभा चुनाव में भी भारी मतों से जीते। अभी वह जल संसाधन मंत्री हैं।
सोनकर परिवार अपनी विरासत लेना चाहता है
दरअसल सिलावट के बीजेपी में आने के बाद प्रकाश सोनकर परिवार की विरासत थम गई। जब प्रकाश सोनकर का निधन हुआ तो बीजेपी ने साल 2008 में निशा सोनकर को टिकट दिया लेकिन वह हार गईं।
इसके बाद सोनकर परिवार को टिकट नहीं मिला। साल 2013 और 2018 में डॉ. राजेश सोनकर को बीजेपी ने टिकट दिया।
तुलसी के बीजेपी में आने के बाद उन्हें भी सांवेर से हटा दिया और सोनकच्छ भेज दिया गया। वहीं सांवेर में सिलावट काबिज हो गए।
अब सावन सोनकर एक बार फिर सक्रिय हैं और उनकी चाहत है कि उन्हें सांवेर से विधानसभा टिकट दिया जाए। इस बार उनकी प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे, विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ के साथ अच्छी तिकड़ी भी जम रही है।
इसे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का भी साथ है। अब दिग्गी की कानाफूसी ने नया जोश भर दिया है और सिलावट के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
जल संसाधन मंत्री सिलावट की विधानसभा में ही बह गया 2 करोड़ का स्टॉप डैम
इंदौर में मंत्री तुलसी सिलावट की विधानसभा में पोस्टर से गायब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
PCC में दिग्गी-सिंघार की जुगलबंदी: पटवारी का ऐलान, आदिवासियों के लिए करेंगे आंदोलन