BJP जिलाध्यक्ष चुनाव : सिंधिया समेत कई मंत्रियों के जिलों में घमासान
मध्य प्रदेश में भाजपा के जिलाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर कई जिलों में बड़ा तनाव देखने को मिल रहा है। संगठन चुनाव के तहत जिलाध्यक्ष पद के लिए रायशुमारी में बड़े नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की पसंद और दबाव के चलते सहमति बन पाना मुश्किल हो रहा है।
राजधानी में मंत्री और सांसद आमने-सामने
सागर में नेतृत्व की खींचतान
सागर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव एवं भूपेंद्र सिंह के बीच जिलाध्यक्ष पद को लेकर टकराव जारी है। यह संघर्ष संगठन में आंतरिक असंतोष को उजागर करता है।
ग्वालियर और गुना में सिंधिया की पकड़
ग्वालियर ग्रामीण और नगर के साथ-साथ गुना, शिवपुरी और अशोकनगर जिलों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पसंद के जिलाध्यक्ष को नियुक्त करना चाहते हैं। इस कोशिश में उनके विरोधी खेमे से टकराव की स्थिति बनी हुई है।
टीकमगढ़ में वीरेंद्र कुमार बनाम अन्य नेता
टीकमगढ़ में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार अपने संसदीय क्षेत्र के सभी जिलों में अपनी पसंद के जिलाध्यक्ष को नियुक्त करना चाहते हैं। उनके इस प्रयास का बाकी नेता विरोध कर रहे हैं। पूर्व विधायक राकेश गिरी और मौजूदा जिलाध्यक्ष अमित लूना भी इस दौड़ में शामिल हैं।
बालाघाट में परिवारवाद का आरोप
बालाघाट में पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को जिलाध्यक्ष बनवाने के लिए प्रयासरत हैं, जबकि पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे खुद जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं। तीसरे दावेदार अभय कोचर अपनी साफ छवि के कारण चर्चा में हैं।
जबलपुर और छिंदवाड़ा में आपसी असहमति
अब खबर है कि जबलपुर में अजय विश्नोई, प्रभात साहू और मंत्री राकेश सिंहके बीच मतभेद बढ़ गए हैं। वहीं, छिंदवाड़ा में सांसद बंटी साहू और पूर्व मंत्री चौधरी चंद्रभान सिंह अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवार को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
रीवा और सतना में नेतृत्व परिवर्तन की मांग
रीवा में मौजूदा जिलाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल को प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का समर्थन प्राप्त है, लेकिन उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और सांसद जनार्दन मिश्रा नए जिलाध्यक्ष की मांग कर रहे हैं। सतना में भी सांसद गणेश सिंह और मंत्री प्रतिभा बागरी के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
ग्वालियर-चंबल अंचल: सिंधिया बनाम तोमर खेमे की खींचतान
राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री की चेतावनी
राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने स्पष्ट कर दिया है कि चार से पांच साल के कार्यकाल वाले जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा। हालांकि, कुछ जिलाध्यक्षों को उनके राजनीतिक आका दोबारा नियुक्त कराने के लिए पार्टी पर दबाव डाल रहे हैं।
FAQ
- 1. भाजपा के जिलाध्यक्ष चुनाव में समस्या क्या है?
जिलाध्यक्ष पद पर नेताओं की गुटबाजी और उनकी व्यक्तिगत पसंद से संगठन में समन्वय बनाना मुश्किल हो रहा है। - 2. कौन-कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं?
भोपाल, सागर, ग्वालियर, टीकमगढ़, जबलपुर और बालाघाट जैसे जिले प्रमुख रूप से प्रभावित हैं। - 3. ग्वालियर-चंबल अंचल में खींचतान क्यों है?
ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के खेमे के बीच नेतृत्व के लिए संघर्ष चल रहा है। - 4. राष्ट्रीय संगठन महामंत्री शिवप्रकाश का क्या निर्देश है?
चार-पांच साल कार्यकाल वाले जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका नहीं देने की सिफारिश की गई है। - 5. क्या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कोई कदम उठाया है?
पार्टी शीर्ष नेतृत्व जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया पर नजर रख रहा है और जल्द समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
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