दीपावली का तोहफा पड़ा फीका! 2% डीए-डीआर बढ़ने के बाद भी कर्मचारी और पेंशनर्स मायूस क्यों?
दुखी क्यों हैं कर्मचारी और पेंशनर्स?
मध्यप्रदेश के लगभग साढ़े सात लाख कर्मचारियों की मायूसी केंद्र सरकार के आदेश के बाद बढ़ी। केंद्र ने अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स का डीए-डीआर बढ़ाकर 63 फीसदी कर दिया था। उस समय प्रदेश के कर्मचारियों को 58 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा था।
कम से कम पांच फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद थी
प्रदेश के कर्मचारियों को मोहन सरकार से कम से कम पांच फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद थी। हालांकि, राज्य सरकार ने केवल दो फीसदी डीए बढ़ाने का ऐलान किया। इससे कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लगा। वहीं, पेंशनर्स को भी राहत के बजाय मायूसी हाथ लगी। सरकार ने उनके लिए भी महंगाई राहत (डीआर) में दो फीसदी बढ़ोतरी की। जबकि पेंशनर्स कम से कम तीन फीसदी डीआर बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
इस तरह प्रदेश के कर्मचारी पहले केंद्र से पांच फीसदी पीछे थे। अब यह अंतर घटकर तीन फीसदी रह गया है। सरकार ने नौ महीने का एरियर देने की भी घोषणा की है। यह राशि कर्मचारियों को तीन किस्तों में दी जाएगी। इसके बावजूद कर्मचारी केंद्र के बराबर डीए और डीआर देने की मांग कर रहे हैं।
पेंशनर्स एसोसिएशन ने आदेश को बताया असंवैधानिक
द सूत्र ने पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना से बातचीत की। उन्होंने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। सक्सेना के मुताबिक एक जुलाई 2026 से दो फीसदी महंगाई राहत देने का आदेश असंवैधानिक है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।
उनका कहना है कि संविधान सभी को समानता का अधिकार देता है। इसके बावजूद प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स के साथ भेदभाव हो रहा है। सक्सेना ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार लाड़ली बहनों के लिए हजारों करोड़ रुपए का प्रावधान कर सकती है। लेकिन कर्मचारियों की मांग पर फंड की कमी बताकर उन्हें टाल दिया जाता है।
किस राज्य में कितना डीए, डीआर?
| राज्य | डीए | डीआर |
| छत्तीसगढ़ | 60% | 60% |
| राजस्थान | 60% | 60% |
| महाराष्ट्र | 60% | 60% |
| उत्तरप्रदेश | 60% | 60% |
इन राज्यों में भी बढ़ोतरी का इंतजार
राजस्थान में कर्मचारियों का डीए और डीआर बढ़ाने की तैयारी चल रही है। दावा है कि जल्द ही इसमें तीन फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी बढ़ोतरी का फैसला होना बाकी है। इन दोनों राज्यों के कर्मचारी और पेंशनर्स भी अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।