एमपी में शिक्षक बनने की राह में डीएलएड डिप्लोमा परीक्षा का रोड़ा
News in Short
मध्यप्रदेश में ईएसबी की शिक्षक चयन और माशिमं की डीएलएड परीक्षा के टाइम टेबल ने खड़ी की मुश्किल।
जून में डीएलएड परीक्षा होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को चयन परीक्षा से पहले नहीं मिलेगा डिप्लोमा सर्टिफिकेट।
शिक्षक वर्ग 3 के लिए अभ्यर्थी डीएलएड डिप्लोमा सर्टिफिकेट के आधार पर ही परीक्षा में हो सकते हैं शामिल।
प्रदेश में हजारों डीएलएड पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्र कर रहे हैं अप्रैल माह में डिप्लोमा एग्जाम कराने की मांग।
माध्यमिक शिक्षा मंडल सचिव से मुलाकात कर अपनी परेशानी बता चुके हैं पात्रता परीक्षा में सफल रहे अभ्यर्थी।
News in Detail
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा शिक्षक वर्ग -3 और वर्ग- 2 की चयन परीक्षा का आयोजन जुलाई- अगस्त माह में प्रस्तावित है। वर्ग 3 की चयन परीक्षा के लिए डीएलएड का डिप्लोमाधारी होना जरूरी है। इधर माध्यमिक शिक्षा मंडल सत्र 2024- 25 और 2025- 26 के डीएलएड पाठ्यक्रम की परीक्षा जून माह में कराने जा रहा है। यानी इस परीक्षा का परिणाम जुलाई- अगस्त माह के बाद ही आ सकेगा। यही वजह डिप्लोमा पाठ्यक्रम के परीक्षार्थियों को परेशान कर रही है। ये परीक्षार्थी शिक्षक पात्रता परीक्षा पहले ही पास कर चुके हैं। अब उन्हें चयन परीक्षा में शामिल होने के लिए डिप्लोमा सर्टिफिकेट हासिल करने की जरूरत है।
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चयन परीक्षा से पहले हो डिप्लोमा एग्जाम
डीएलएड परीक्षार्थियों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल को प्रतिनिधिमंडल के जरिए अपनी परेशानी से अवगत कराया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल सचिव आईएएस बुद्धेश कुमार वैद्य को इस संबंध में पत्र भी सौंपे गए हैं। पात्रता परीक्षा पास कर चुके इन अभ्यर्थियों का कहना है ईएसबी द्वारा पहले ही परीक्षा कैलेंडर जारी किया गया है। जबकि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा डीएलएड एग्जाम के लिए हाल ही में परीक्षा तिथि जारी की गई है। ऐसे में अभ्यर्थी चयन परीक्षा से पहले डिप्लोमा सर्टिफिकेट मिलने को लेकर असमंजस में है।
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माशिमं से संवेदनशीलता की आस
शिक्षक बनने का सपना देख रहे डीएलएड पाठ्यक्रम के अभ्यर्थी अब माध्यमिक शिक्षा मंडल से संवेदनशीलता दिखाने की उम्मीद लगाए हैं। उनका कहना है मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती के बीच दो से चार साल का अंतराल है। यदि इस साल माशिमं डिप्लोमा एग्जाम का टाइम टेबल नहीं बदलता तो इन हजारों अभ्यर्थियों के सामने संकट खड़ा होना तय है। क्योंकि उन्हें सर्टिफिकेट न मिलने से वे चयन परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सकेंगे।
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चयन परीक्षा के अंतराल अनियमित
हाईकोर्ट एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान इन अभ्यर्थियों के पक्ष में उतरे हैं। उनका कहना है मध्य प्रदेश में चयन परीक्षा नियमित आयोजित नहीं हो रही हैं। इनमें कभी दो साल तो कभी तीन या उससे भी अधिक साल का अंतराल रहता है। इस वजह से कई अभ्यर्थी शिक्षक बनने की आस लगाए ही रह जाते हैं। सैकड़ों अभ्यर्थी ओवर एज होने की कगार पर हैं। उनसे यह मौका छिनता है और चयन परीक्षा नहीं होती तो उनका सपना टूट जाएगा।