अतुल सुभाष जैसे आपके आसपास भी हैं, MP के आंकड़े जानकर रह जाएंगे हैरान

Jitendra Shrivastava | Dec 13, 2024, 17:25 IST
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शादी से जुड़े झूठे मामलों के कारण पुरुष आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 2022 में भारत में 4237 पुरुषों ने शादी के बाद विवादों के चलते सुसाइड की। इनमें अकेले मध्य प्रदेश में 358 पुरुषों ने अब तक खुदकुशी कर ली है...

परिस्थितियों से थक-हारकर जीवनलीला समाप्त करने वाले अतुल सुभाष अकेले पुरुष नहीं, न आखिरी हैं। यह सिलसिला ऐसे ही चल रहा है। इस घटना के बाद से दहेज कानून के दुरुपयोग और उससे पुरुषों पर पड़ने वाले असर पर चर्चा हो रही है। कानून, जज, वकील और पुलिस के गठबंधन में फंसने के बाद पुरुष पूरी तरह टूट जाता है। बता दें कि अतुल सुभाष के केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दहेज कानून में बदलाव की याचिका को स्वीकार कर लिया है।



मध्य प्रदेश के आंकड़े कर रहे हैरान

दहेज प्रताड़ना के झूठे आरोप में आत्महत्या के लिए मजबूर

कई मामलों में पुरुषों और उनके परिवारों को झूठे दहेज प्रताड़ना के केस में फंसाया जा रहा है। इस दबाव में पुरुषों का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है और वे आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठा रहे हैं। इंडिया इन पिक्सल्स संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में भारत में 4237 पुरुषों ने शादी से जुड़े विवादों के चलते आत्महत्या की। इनमें से 358 पुरुष मध्य प्रदेश से थे, जो देश में तीसरे स्थान पर है। इन सभी सुसाइड का कारण शादी से जुड़ा विवाद था। इंडिया इन पिक्सल्स रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि देशभर में आत्महत्या करने वाले 60-70% लोग पुरुष होते हैं।



ग्वालियर-चंबल अंचल में विवादित शादियां बनीं सिरदर्द

मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में पिछले 6 महीनों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं, जहां पत्नियों ने पतियों पर झूठे दहेज के आरोप लगाकर केस दर्ज कराए हैं। इस अंचल में 6 महीने में 959 शादीशुदा जोड़ों में झगड़े के मामले सामने आए। इनमें से 486 मामलों में समझौता हो गया, जबकि 207 केस अदालत तक पहुंचे। पत्नियों द्वारा पतियों के खिलाफ 239 एफआईआर दर्ज कराई गईं। यह सिर्फ एक जिले की बात है। मध्य प्रदेश में ऐसे 55 जिले हैं।



मध्यप्रदेश में ये जिले टॉप पर

पति-पत्नी में विवाद के आकड़ों को सही मानें तो भोपाल में सबसे ज्यादा 684 मामले दर्ज हुए हैं। इंदौर में 532, जबलपुर में 412 और ग्वालियर में 561 मामले सामने आए। राजगढ़ में 426, सागर में 424 और रीवा में 225 मामले दर्ज किए गए। मुरैना में 279, धार में 201 और अशोकनगर में 134 मामले हैं। बुरहानपुर में 120, छतरपुर में 168 और दमोह में 163 मामले हैं। बालाघाट में 136, बड़वानी में 64 और भिंड में 101 मामले दर्ज हुए।डिंडोरी में 122, नर्मदापुरम में 190 और उज्जैन में 191 मामले सामने आए। शिवपुरी में 152 और अलीराजपुर में सिर्फ 7 मामले दर्ज हुए। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर के आंकड़े बताते हैं कि यहां घरेलू विवादों और दहेज प्रताड़ना के झूठे मामलों में पुरुषों का जीवन तनावपूर्ण हो गया है।



दहेज कानून में एक बार फंसे तो निकलना मुश्किल

पुलिस का इस मामले में कहना है...

पुलिस अधिकारियों का इस मामले में मानना है कि कई बार छोटे-छोटे झगड़े बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं। ग्वालियर महिला थाना डीएसपी किरण अहिरवार ने बताया कि संयुक्त परिवारों में विवाद की स्थिति ज्यादा होती है। कई बार विवाद का कारण मोबाइल भी बनता है, क्योंकि पति-पत्नी के बीच मोबाइल पासवर्ड शेयर करने को लेकर विवाद हो जाता है।


वहीं, थाना प्रभारी दीप्ति तोमर का कहना है कि विवादों के मामलों में पति-पत्नी दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से मामला सुलझ जाता है। लेकिन अगर मामला नहीं सुलझता, तो महिला द्वारा एफआईआर दर्ज कराई जाती है।



दहेज कानून में बदलाव की मांग

दहेज प्रताड़ना के झूठे मामलों का सामना करने वाले पुरुष और उनके परिवार कड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करते हैं। इस मुद्दे पर पुरुषों के अधिकार के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि दहेज कानून का दुरुपयोग हो रहा है।



खबर से नंबंधित सामान्य सवाल

  1. दहेज प्रताड़ना के मामलों में पुरुषों की आत्महत्या क्यों बढ़ रही है?
    दहेज प्रताड़ना के झूठे आरोपों और कानूनी प्रताड़ना के कारण पुरुष आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठा रहे हैं।
  2. मध्यप्रदेश में पुरुष आत्महत्या के कितने मामले सामने आए हैं?
    2022 में मध्य प्रदेश में 358 पुरुषों ने शादी से जुड़े विवादों के कारण आत्महत्या की।
  3. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कितने विवादित मामले दर्ज हुए हैं?
    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में पिछले 6 महीनों में 959 विवादित मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से 239 मामलों में पतियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
  4. क्या झूठे दहेज केसों के खिलाफ कोई कानून है?
    फिलहाल झूठे दहेज केसों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है, लेकिन पुरुष संगठन दहेज कानून (dowry law) में संशोधन की मांग कर रहे हैं।
  5. पुरुषों के लिए न्याय पाने का क्या तरीका है?
    अगर पुरुष झूठे दहेज केस का शिकार हैं, तो वे कोर्ट में साक्ष्य और सबूत के जरिए खुद को निर्दोष साबित कर सकते हैं। पुरुषों के अधिकार के लिए काम करने वाले संगठनों से भी मदद ली जा सकती है।

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