नकली दूध और जहरीली सब्जियों से बचना होगा आसान, DRDO की नई किट से घर बैठे कर सकेंगे जांच
दूध में डिटर्जेंट और दाल में केमिकल का खेल
दूध में यूरिया, डिटर्जेंटऔर स्टार्च मिलाकर बेचा जा रहा है। वहीं हरी सब्जियों और दालों को सुंदर व चमकदार दिखाने के लिए उन पर खतरनाक सिंथेटिक रंग चढ़ाए जा रहे हैं।
दाल और सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन, मेटानिल येलो और सीसा यानी लेड जैसे खतरनाक रसायनों का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। ये सारे केमिकल्स हमारे शरीर में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं। इसी खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने यह आसान समाधान निकाला है।
किन चीजों में कौन से केमिकल मिलाए जा रहे हैं?
- दूध (Milk): दूध में मुनाफा बढ़ाने के लिए यूरिया, डिटर्जेंट और स्टार्च मिलाया जाता है। यह पेट और पूरे पाचन तंत्र के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होता है।
- दालें (Pulses): दालों को ज्यादा पीला और चमकदार दिखाने के लिए मेटानिल येलो और सस्ते सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं। यह शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
- मटर और हरी सब्जियां (Peas & Vegetables): इन्हें लंबे समय तक एकदम ताजा और हरा-भरा दिखाने के लिए मैलाकाइट ग्रीन और सीसा (लेड) जैसे जहरीले केमिकल का इस्तेमाल होता है। यह भी सेहत के लिए जानलेवा खतरा बन सकते हैं।
घर पर खुद कैसे करें जांच?
डीआरडीओ की इस नई किट से जांच करने का तरीका बहुत ही सरल है। इसे कोई भी व्यक्ति अपने किचन में आसानी से कर सकता है।
- सबसे पहले किट में मिली टेस्ट ट्यूब यानी परखनली में तय मात्रा में घोल डालें।
- अब नापने वाले कप से दाल या मटर का थोड़ा सा नमूना लेकर उसी घोल में डाल दें।
- इस घोल को 30 से 60 सेकंड तक अच्छी तरह हिलाएं।
- हिलाने के बाद परखनली को थोड़ी देर सीधा रख दें, ताकि रंग घोल में घुल जाए और अलग-अलग परतें साफ दिखने लगें।
- इसके बाद परखनली की तय परत से एक बूंद घोल निकालें और टेस्टिंग पट्टी के जांच वाले हिस्से पर डालें।
- कुछ मिनट तक पट्टी को देखें। अगर पट्टी का रंग बदल जाता है, तो समझ जाइए कि उस दाल या मटर में खतरनाक केमिकल मिला हुआ है।
DRDO की लैब का बदला नाम
मैसूर में स्थित डीआरडीओ की जिस लैब ने इसे तैयार किया है, उसे पहले रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला यानी डीएफआरएल (DFRL) के नाम से जाना जाता था। अब इसका नाम बदलकर रक्षा जैव-रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान यानी डीआईबीटी (DIBT) कर दिया गया है।
इस संस्थान को अब डीआरडीई (DRDE) ग्वालियर के प्रशासनिक नियंत्रण में सौंपा गया है, ताकि देश में बायो-डिफेंस के लक्ष्यों पर और तेजी से काम हो सके।
वहीं डीआरडीई के निदेशक डॉ. एम.एम. परीडा ने बताया कि दूध में मिलावट की जांच के लिए पहले से ही किट मौजूद है। अब दाल और मटर में खतरनाक रसायनों की पहचान के लिए भी यह नई परीक्षण किट विकसित कर ली गई है।