67 करोड़ की ड्रग्स, 31 छापे और 44 गिरफ्तारियां, एमपी के रास्ते दिल्ली-मुंबई तक हो रही ड्रग्स की सप्लाई
एमपी बना ड्रग्स तस्करों का ट्रांजिट रूट
मध्य प्रदेश अब ड्रग तस्करों के लिए नशे की खेप दूसरे शहरों तक पहुंचाने का बड़ा रास्ता बन गया है। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की हालिया जांच में यह बात सामने आई है।
यहां से गुजरने वाली करीब 90 फीसदी ड्रग्स की खेप बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भेजी जा रही थी। इंदौर और भोपाल में हुई जांच से पता चला है कि तस्करों का पूरा ध्यान देश के बड़े शहरों तक नशे की खेप पहुंचाने पर है।
सार्वजनिक परिवहन में ड्रग्स की तस्करी
तस्करी के इस पूरे खेल में पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपराधी अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। सितंबर और अक्टूबर में सामने आई 10 बड़ी कार्रवाइयों में से 4 मामलों में स्लीपर बसों और 2 मामलों में ट्रेनों के जरिए नशीले पदार्थों की खेप भेजी जा रही थी।
वहीं पिछले छह महीनों के आंकड़े देखें तो करीब 50 फीसदी मामलों में स्लीपर बसों और ट्रेनों का इस्तेमाल हुआ है। लंबी दूरी की स्लीपर बसों में कम चेकिंग का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य तक नशीले पदार्थ पहुंचा रहे थे।
यूपी और महाराष्ट्र की छोटी फैक्ट्रियों में बन रहा था नशा
DRI की जांच में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर मामलों में ड्रग्स (Madhya Pradesh drugs smuggling) उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के छोटे इलाकों में चल रही गुप्त फैक्ट्रियों में बनाई जा रही थी। वहीं, जांच एजेंसियों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब महाराष्ट्र के धुले में एक प्राणी संग्रहालय की 7 एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध गांजे की खेती पकड़ी गई।
सितंबर और अक्टूबर की प्रमुख कार्रवाइयां
- 8 सितंबर: 2 ट्रकों से 375.95 किलो गांजा बरामद, जिसकी अनुमानित कीमत 1.88 करोड़ रुपए रही।
- 9 सितंबर: स्लीपर बस के जरिए ले जाई जा रही 2 किलो एम्फेटामाइन जब्त, कीमत 1.6 करोड़ रुपए।
- 23 सितंबर: ट्रेन से भेजी जा रही 2 किलो एम्फेटामाइन बरामद, कीमत 1.6 करोड़ रुपए।
- 24 सितंबर: ट्रेन के जरिए 2.368 किलो एम्फेटामाइन पकड़ी गई, कीमत 1.9 करोड़ रुपए।
- 30 सितंबर: निजी वाहन से ले जाई जा रही 7.116 किलो एम्फेटामाइन जब्त, कीमत 5.69 करोड़ रुपए।
- 14 अक्टूबर: स्लीपर बस से 2.604 किलो एम्फेटामाइन बरामद, कीमत 2.08 करोड़ रुपए।
- 20 अक्टूबर: स्लीपर बस से 9 किलो मेथाम्फेटामाइन की बड़ी खेप पकड़ी गई, कीमत 7.32 करोड़ रुपए।
छह महीनों में की गई कुल 31 कार्रवाइयों में जांच एजेंसियों ने 44 तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें 10 विदेशी नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए रूट पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
ये खबर क्यों जरूरी है?
स्लीपर बसों और ट्रेनों जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों से ड्रग्स की तस्करी (मध्य प्रदेश ड्रग्स तस्करी) होना आम यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। बड़े शहरों के युवाओं तक नशा पहुंचाने वाला यह नेटवर्क समाज को नुकसान पहुंचा रहा है। साथ ही, छोटे शहरों और राज्यों को भी अनजाने में इस अपराध से जोड़ रहा है। इस खुलासे के बाद दूसरे राज्यों में आने-जाने वाले वाहनों और ट्रेनों की निगरानी बढ़ाने के साथ जांच व्यवस्था को भी और सख्त करने की जरूरत है।