कौन है वसूली आरोपों से घिरीं नेहा पच्चीसिया, जो एयर होस्टेस की नौकरी छोड़ बनी थी DSP
वसूली के गंभीर आरोपों से घिरीं कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती जा रही हैं। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं, वहीं हाईकोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।
कानून और व्यवस्था के कड़े संदेश के बीच आज प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहीं नेहा पच्चीसिया की यह स्थिति उनके अब तक के सफर के ठीक उलट नजर आती है।
आइए जानते हैं, इस विवाद से पहले कैसा था एयरहोस्टेस से डीएसपी बनने तक का उनका प्रेरणादायक सफर।
गलियों से निकलकर वर्दी तक का सफर
बता दें कि नेहा के लिए पचोर की गलियों से निकलकर डीएसपी की वर्दी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। नेहा पच्चीसिया की कहानी हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को लेकर उलझन में है। एक छोटे कस्बे में जन्मी नेहा ने बड़े शहरों की चमक छोड़कर अपने ही इलाके में बदलाव लाने की ठानी। उनकी कहानी बताती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत हमेशा रंग लाती है।
पचोर का मध्यमवर्गीय परिवार
नेहा की 4 बहनें हैं जिनमें से वे सबसे बड़ी हैं। उनके पिता स्कूल में टीचर हैं। मां हाउसवाइफ हैं। घर का माहौल पढ़ाई को लेकर हमेशा सजग रहा, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। मध्यमवर्गीय परिवार में बेटियों की पढ़ाई को लेकर उस दौर में कई तरह की झिझक होती थी। नेहा के परिवार में भी शुरुआत में यही हुआ। लेकिन मां का हौसला हमेशा बेटियों के साथ रहा।
मां का त्याग, बदला फैसला
जब नेहा स्कूल जाने की उम्र में थीं तब पचोर में कोई अच्छा हिंदी स्कूल नहीं था। कस्बे में सिर्फ एक इंग्लिश मीडियम स्कूल था। परिवार के बुजुर्ग वहां एडमिशन के लिए राजी नहीं थे। उन्हें डर था कि स्कूल में पढ़ने से बेटी का धर्म बदल सकता है। इस उलझन के बीच नेहा की मां बेहद परेशान हो गई थीं। बेटी के भविष्य की चिंता में उन्होंने 3 दिन तक खाना नहीं खाया। यह त्याग परिवार के लिए एक बड़ा संदेश बन गया। आखिरकार परिवार ने एडमिशन के लिए हामी भर दी। यह फैसला नेहा की जिंदगी का पहला बड़ा मोड़ साबित हुआ। आज नेहा खुद मानती हैं कि उनकी सफलता के पीछे मां का यही जिद भरा फैसला था। एक मां की जिद ने बेटी की पूरी दिशा बदल दी।
एयरहोस्टेस से डीएसपी तक
12वीं के बाद नेहा ने एविएशन में डिप्लोमा किया। इसके बाद उन्होंने एयर इंडिया में एयरहोस्टेस की नौकरी शुरू की। यह नौकरी ग्लैमरस थी और विदेशी कंपनियों से भी ऑफर आने लगे थे। लेकिन नेहा को अंदर से संतोष नहीं मिल रहा था। जानकारी के अनुसार एक बार वे वापस पचोर गईं। वहां उन्होंने देखा कि कई लड़कियां आज भी सीमित मौकों में जी रही हैं। उन्हें लगा कि वे खुद तो बाहर निकल आई हैं, लेकिन बाकी लड़कियों की मदद कैसे हो। यही सवाल उनकी जिंदगी की नई दिशा बन गया। नेहा (CSP नेहा पच्चीसिया) ने एयरहोस्टेस की नौकरी छोड़ दी। उन्होंने पीएससी की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस सेवा में चयन से पहले उन्होंने वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में भी काम किया। यह अनुभव उनके आगे के करियर के लिए मददगार साबित हुआ। 2012 से 2016 तक नेहा ने पीएससी के प्रिलिम्स और मेन्स एग्जाम दिए। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2016 में जब इंटरव्यू हुए, तो वे एक साथ चारों एग्जाम में सिलेक्ट हो गईं। MPPSC में उन्हें 20वीं रैंक मिली। यह उनकी मेहनत का बड़ा नतीजा था।
सीएम ने किया सम्मान
कोरोना महामारी के दौरान नेहा ने ड्यूटी में बेहतरीन काम किया। उस समय के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके प्रशासनिक काम की पहचान बना। गुना में सीएसपी रहते हुए नेहा ने पुलिस कर्मियों का हौसला भी बढ़ाया।
हौसले की मिसाल बनी नेहा
नेहा पच्चीसिया (कटनी सीएसपी नेहा पच्चीसिया) अक्सर युवाओं से मंजिल को लेकर बात करती हैं। उनका मानना है कि जुनून हो तो कोई भी मंजिल पाई जा सकती है। मेहनत के दम पर हर मुश्किल आसान हो जाती है। उनका यह सफर आज भी कई लड़कियों को हौसला देता है। छोटे कस्बों से निकलकर बड़े मुकाम तक पहुंचने की कहानियां कम ही सुनने को मिलती हैं। नेहा पच्चीसिया की कहानी बताती है कि सही सोच और मेहनत से हालात बदले जा सकते हैं। नेही कि यह यात्रा आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। पचोर जैसे छोटे कस्बों की लड़कियों के लिए वे एक जीता जागता उदाहरण हैं।
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