ई- टोकन तोड़ रहा किसानों का दम, खाद की राशनिंग बढ़ा रही पैदावार घटने की चिंता

Sanjay Sharma | May 27, 2026, 23:39 IST
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मध्यप्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ डीएपी, यूरिया और एनपीके की मांग बढ़ गई। सरकार ने ई-विकास पोर्टल पर ऑनलाइन टोकन प्रणाली लागू की है।

भाई साहब, मध्य प्रदेश में खरीफ की बुवाई का टाइम शुरू हो गया है, पर किसान का दिमाग ई-टोकन और आधा बोरी DAP में उलझा है। जून-जुलाई में सोयाबीन, कपास, मक्का और धान की बुवाई होती है। पर सरकार ने कहा था- अब खाद में गड़बड़ नहीं होगी। मोबाइल से टोकन लो, लाइन से बचो। पर हुआ उल्टा। अब हाल ये है कि किसान रात के 2 बजे से खाद वाले गोदाम के बाहर दरी बिछाकर बैठा है। ऊपर से DAP भी ऐसी नाप-तौल कर मिल रही है जैसे दवाई की दुकान पर गोली मिलती है।



डीएपी, यूरिया और एनपीके की मांग बढ़ी

प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही डीएपी, यूरिया और एनपीके की मांग बढ़ गई है। सरकार ने पूरा कोटा एक ही बार में देने का प्रावधान किया है। लेकिन कई ज़िलों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता न होने से किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। खरीद केंद्रों पर भीड़ और हंगामे के मामले सामने आ रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जिलों तक खाद पहुंचने में देरी हो रही है।



पहले समझो ये ई-टोकन है क्या

खाद की कालाबाजारी पर कंट्रोल के लिए सरकार ने नई व्यवस्था बनाई है। इसके लिए ‘ई-विकास’ पोर्टल पर ऑनलाइन खाद बुकिंग की जा रही है। सरकार का मानना है इस व्यवस्था के तहत किसानों को उनकी फार्मर आईडी के जरिए खेत के क्षेत्रफल के आधार पर निर्धारित मात्रा में डीएपी, यूरिया जैसे उर्वरक मिलेंगे। इससे बाजार में होने वाली कालाबाजारी पर नियंत्रण होगा। किसान अपने स्मार्ट फोन से पोर्टल पर जाकर खाद के लिए टोकन बुक करेंगे और इसी के आधार पर उन्हें खाद मिलेगा।



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इन मामलों से समझें स्थिति :

1. तीन दिन भूखे-प्यासे बैठे रहे 50 किसान

4 मई 2026 को विदिशा के गंजबासौदा केंद्र पर DAP आई। खबर सुनकर 50 किसान 3 मई की रात से ही लाइन में लग गए। 4 मई सुबह 10 बजे टोकन बंटने थे। पर 11 बजे तक सर्वर चला ही नहीं। दोपहर 2 बजे सर्वर आया तो 2 मिनट में 120 टोकन का कोटा फुल। 3 दिन से भूखे-प्यासे बैठे किसान खाली हाथ लौटे। धरनोदा के हरिप्रसाद बोले- “मूंग की बुवाई लेट हो गई। अब पैदावार गई समझो।”



2. खसरा लिंक न होने से पिछड़‍ गई बुआई

10 मई 2026 को खरगोन के कसरावद में 70 साल के रमेश पटेल टोकन लेने पहुंचे। 8 बीघा कपास की बुआई करने की तैयारी कर रहे किसान को दुकान पर पता चला कि फार्मर आईडी खसरे से लिंक नहीं है। रमेश पटेल को इसे लिंक कराने के लिए तीन दिन तहसील के चक्कर काटने पड़े और तब जाकर आईडी लिंक हुई और खाद मिलने में हुई देरी से बुआई पिछड़ गई।



3.ओटीपी के चक्कर में उलझी महिला किसान

18 मई 2026 को छिंदवाड़ा के सौंसर में विधवा किसान सुनीता बाई टोकन लेने गईं। बुकिंग के लिए उनके कीपैड मोबाइल पर ओटीपी की जानकारी न होने से ई-टोकन जारी नहीं हुआ। दुकान पर भीड़ के कारण कर्मचारी से भी मदद नहीं मिली।उससे मौका चूक गया और दो दिन बाद पुत्र के आने पर खाद की बुकिंग हो पाई, लेकिन तब तक स्टॉक खत्म हो गया।



4. टोकन मिला लेकिन खाद ही नहीं मिला

22 मई 2026 को देवास के टोंकखुर्द में 40 किसानों को ई-टोकन मिला था। पर्ची पर उन्हें खाद उठाने के लिए 24 मई की तारीख दी गई। ये किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचे तो गोदाम पर ताला लटका था। यहां- वहां दौड़भाग के बाद उन्हें पता चला कि डीएपी उपलब्ध नहीं है। जो स्टॉक था वह किसी अन्य जिले में भेजा गया है। घंटों तक परेशान किसानों को हंगामे के बाद दो दिन बाद की तारीख दे दी गई।



अब नई मुसीबत: DAP की राशनिंग

पहले किसानों को उनके खेत के क्षेत्रफल और फसल की जरूरत के हिसाब से डीएपी, यूरिया या दूसरे खाद उपलब्ध थे। वे दुकान से अपनी जरूरत के आधार पर खाद की खरीदी कर सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सरकार द्वारा व्यवस्था बदलकर खाद की राशनिंग कर दी गई है। अब किसानों को पहले https://evikas.mpkrishi.mp.gov.in पर ऑनलाइन बुकिंग कराना जरूरी है। बुकिंग के बाद भी किसानों को सरकार सरकार द्वारा खेत और फसल के आधार पर तय की गई मात्रा में ही खाद, डीएपी या दूसरे उर्वरक दिए जा सकते हैं। यानी सोयाबीन, उड़द, कपास या दूसरी उपज के लिए खाद की राशनिंग उसकी मात्रा निर्धारित करती है।



पैदावार घटने की आशंका से चिंता

किसान कमल सिंह, सुरेन्द्र सिंह रघुवंशी का कहना है अचानक खाद की राशनिंग पैदावार पर बुरा असर डालेगी। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे काश्तकारों पर होगा। दो, तीन या पांच बीघा वाले किसानों की पैदावार 10 से 20 फीसदी तक घटी तो वे कैसे अपना घर चला पाएंगे। उनकी चिंता थी कि अब तक किसान ज्यादा खाद और डीएपी उपयोग कर रहे थे। कम मात्रा में डालने पर पैदावार घटना तय है। प्रदेश के किसानों के लिए डीएपी और खाद की मात्रा एक जैसी तय की गई है जबकि हर क्षेत्र की मिट्टी अलग है। सरकार को इसका परीक्षण करते हुए राशनिंग करनी चाहिए।



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खरीफ में खाद की जरुरत और स्टॉक

मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के लिए कृषि विभाग ने उर्वरकों की कुल जरुरत लगभग 390.54 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें यूरिया 7.25 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 3.00 लाख मीट्रिक टन, एनपीके 2.50 लाख मीट्रिक टन, एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन व अन्य उर्वरक भी हैं। इसमें से प्रदेश के जिलों में मई 2026 की स्थिति में यूरिया का लगभग 5,627 मीट्रिक टन, डीएपी 2,393 मीट्रिक टन, एनपीके 9,986 मीट्रिक टन, एसएसपी 9,281 मीट्रिक टन उपलब्ध है।



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