MP में उद्योग लगाना हुआ आसान: फाइल रोकने वाले अफसरों पर लगेगा जुर्माना

Amresh Kushwaha | Aug 23, 2026, 10:43 IST
MP में उद्योग लगाना हुआ आसान
मध्य प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 लागू हो गया है। अब उद्योग लगाने की 76 मंजूरियां सिंगल विंडो से मिलेंगी। तय समय में काम न करने पर अफसरों पर जुर्माना लगेगा। फाइल अटकाने पर वह खुद बड़े अधिकारी के पास चली जाएगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 लागू हो गया है।
  • अब नया उद्योग लगाने के लिए 76 मंजूरियां सिंगल विंडो से मिलेंगी।
  • तय समय में काम न करने पर अफसरों पर जुर्माना लगेगा।
  • फाइल अटकाने पर वह अपने आप बड़े अधिकारी के पास चली जाएगी।
  • कम प्रदूषण वाले उद्योगों को अब 3 साल तक जांच नहीं होगी।

नया कानून क्या बदलेगा

मध्य प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। नया उद्योग लगाने में लगने वाली 76 तरह की मंजूरियां अब अलग-अलग नहीं मांगनी होंगी। ये सभी मंजूरियां अब सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी। यह सुविधा तय समय सीमा के भीतर मिलेगी।



यदि कोई अफसर तय समय में काम नहीं करेगा तो उस पर जुर्माना लगेगा। साथ ही उसकी फाइल अपने आप आगे बड़े अधिकारी के पास ट्रांसफर हो जाएगी। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 लागू कर दिया गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है।



सिंगल विंडो सिस्टम कैसे करेगा काम

अब उद्यमियों को पर्यावरण, बिजली और श्रम जैसी मंजूरियों के लिए अलग-अलग दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा। ये सभी काम एक ही डिजिटल पोर्टल से हो जाएंगे। इसे सिंगल विंडो सिस्टम नाम दिया गया है। सरकार ने इसके लिए एमपीआईडीसी (Madhya Pradesh Industrial Development Corporation) को एजेंसी बनाया है।



इस नए कानून का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब कोई भी फाइल सरकारी दफ्तरों में अटकाई नहीं जा सकेगी। पहले सबसे बड़ी दिक्कत यही थी कि फाइलें महीनों तक दफ्तरों में पड़ी रहती थीं। अब अगर कोई अधिकारी तय समय सीमा में आवेदन पर फैसला नहीं लेता, तो कंप्यूटर सिस्टम खुद उस फाइल को बड़े अधिकारी के पास भेज देगा। इससे किसी एक अफसर के भरोसे फाइल नहीं रुकेगी।



MP में उद्योग लगाना हुआ आसान


बार-बार सवाल पूछने पर रोक

पहले अफसर अक्सर थोड़ी-थोड़ी जानकारी मांगकर फाइल को अटका देते थे। इससे उद्यमियों को कई बार दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब नए नियम में इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अधिकारी को जो भी जानकारी या दस्तावेज चाहिए, वह आवेदन मिलने के सात दिन के अंदर केवल एक बार ही मांग सकता है। बार-बार आपत्ति लगाने की छूट अब खत्म कर दी गई है। इससे आवेदन प्रक्रिया तेज और आसान होगी।



देरी पर सीधा जुर्माना

अगर कोई अधिकारी बिना वजह किसी आवेदन को लटकाता है, तो उसे नुकसान उठाना पड़ेगा। समय पर मंजूरी नहीं देने पर लोक सेवा गारंटी कानून के तहत सीधा जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना संबंधित अधिकारी की जेब से भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे अफसरों पर जवाबदेही तय होगी। उद्यमियों को अब देरी की शिकायत लेकर बार-बार भटकना नहीं पड़ेगा।



MP में उद्योग लगाना हुआ आसान


कम प्रदूषण वाले उद्योगों को बड़ी राहत

कम प्रदूषण या बिना प्रदूषण वाले उद्योगों के लिए नियम और आसान बनाए गए हैं। ऐसे उद्यमी सिर्फ एक स्व-घोषणा पत्र जमा करके तुरंत अपना काम शुरू कर सकते हैं। उन्हें किसी मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही उन्हें तीन साल तक सरकारी निरीक्षण यानी जांच का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। अभी तक हर उद्योग को जांच से गुजरना पड़ता था। अब इस झंझट से पूरी तरह निजात मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम उद्यमियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।



जमीन से जुड़े नियम भी हुए आसान

औद्योगिक जमीन के नियमों को भी सरल बनाया गया है। अब उद्यमी सिर्फ एक सूचना देकर अपनी औद्योगिक जमीन का बंटवारा कर सकेंगे। इसी तरह जमीन का उप-पट्टा यानी सब-लीज (Sub Lease) भी आसानी से हो सकेगा। इसके लिए अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पट्टे की जमीन को फ्रीहोल्ड यानी खुद के मालिकाना हक में बदलने का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। इससे उद्यमियों को अपनी जमीन पर काम करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा।



MP में उद्योग लगाना हुआ आसान


उद्योगों को कुल मिलाकर क्या फायदा होगा

इस नए कानून से मध्य प्रदेश में उद्योग लगाना पहले से आसान हो जाएगा। समय पर मंजूरी मिलने से नए निवेशक राज्य की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। अफसरों की मनमानी पर लगाम लगने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम होगी। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में औद्योगिक माहौल बेहतर होगा। छोटे उद्यमियों को कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।



FAQ

  1. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 क्या है?
    यह मध्य प्रदेश सरकार का नया कानून है जो उद्योग लगाने की प्रक्रिया आसान बनाता है। इसके तहत नया उद्योग लगाने के लिए जरूरी 76 तरह की मंजूरियां सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी। यह मंजूरियां तय समय सीमा में देनी होंगी। अगर अफसर देरी करते हैं तो उन पर जुर्माना लगेगा और फाइल अपने आप बड़े अधिकारी के पास चली जाएगी।

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