सुप्रीम कोर्ट के आदेश से MP बार काउंसिल में महिलाओं की एंट्री, रिटायर्ड जस्टिस अंजलि पालो समेत 2 सदस्य मनोनीत
मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को सह-चयनित करने की प्रक्रिया पूरी की गई है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने रिटायर्ड जस्टिस अंजलि पालो और जबलपुर की अधिवक्ता सुधा श्रीवास्तव को को-ऑप्ट किया है।
हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्मिन्दर सिंह ने 10 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने से जुड़े निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था 30% महिला प्रतिनिधित्व
सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को योगमाया एमजी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में निर्देश दिया था कि प्रत्येक स्टेट बार काउंसिल में महिला अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व 30% सुनिश्चित किया जाए। इसमें 20% प्रतिनिधित्व चुनाव के जरिए और शेष 10% सह-चयन के जरिए पूरा किया जाना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बार काउंसिल जैसे पेशेवर निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
चीफ जस्टिस को सौंपी गई दो महिला सदस्यों के चयन की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के आदेश में सह-चयन की प्रक्रिया स्पष्ट की। इसके अनुसार, संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दो महिला सदस्यों को नामित कर सकते हैं। इनमें हाई कोर्ट की पूर्व महिला जज या संबंधित राज्य की वरिष्ठ महिला अधिवक्ता शामिल हो सकती हैं।
चीफ जस्टिस को स्टेट बार काउंसिल के नवनिर्वाचित सदस्यों से परामर्श भी करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया में निष्पक्षता, स्वतंत्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
पूर्व जज और वरिष्ठ महिला अधिवक्ता हो सकती हैं पात्र
सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर 2026 के आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ महिला अधिवक्ता होने का अर्थ केवल सीनियर एडवोकेट की औपचारिक उपाधि प्राप्त होना नहीं है। लंबे समय से वकालत कर रही और उपयुक्त मानी जाने वाली महिला अधिवक्ता भी इस प्रक्रिया के लिए पात्र हो सकती हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बार काउंसिल का चुनाव लड़ चुकीं, लेकिन हार गईं महिला उम्मीदवारों को भी सह-चयन के लिए विचार में लिया जा सकता है। पूर्व हाई कोर्ट जजों को भी इस व्यवस्था के तहत सदस्य बनाए जाने में कोई बाधा नहीं है।
अंजलि पालो और सुधा श्रीवास्तव को मिली जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 10 अक्टूबर 2026 के पत्र क्रमांक A/3649 के अनुसार, रिटायर्ड जस्टिस अंजलि पालो और अधिवक्ता सुधा श्रीवास्तव को स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्य प्रदेश में सह-चयनित किया गया है। दोनों जबलपुर से हैं। अधिवक्ता सुधा श्रीवास्तव का पंजीयन क्रमांक SBCMP/1530/1994 है। रजिस्ट्रार जनरल धर्मिन्दर सिंह ने यह जानकारी बार काउंसिल के सचिव आशीष आनंद पांडे को भेजी है।
बार काउंसिल के गठन और आगे की प्रक्रिया से जुड़ा है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को एम. वरधन् बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में निर्देश दिया था कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सह-चयन की प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी करें।
इसके बाद स्टेट बार काउंसिल के गठन की अधिसूचना एक सप्ताह के भीतर जारी करने और फिर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों के चुनाव दो सप्ताह में कराने को कहा गया था। अदालत ने सभी स्टेट बार काउंसिल से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी थी।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में नई व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2026 के आदेश में महिला अधिवक्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की इस पहल को कानूनी पेशे में समान भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। अदालत ने उम्मीद जताई कि भविष्य में संसद और कार्यपालिका भी बार काउंसिलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए उपयुक्त व्यवस्था बनाएंगी।
फिलहाल, अदालत द्वारा तय की गई यह व्यवस्था लागू रहेगी। मध्य प्रदेश में दो महिला सदस्यों का सह-चयन इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
- मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में सह-चयनित महिला सदस्यों का चयन कब और किस प्रक्रिया के तहत किया गया?
मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों, रिटायर्ड जस्टिस अंजलि पालो और अधिवक्ता सुधा श्रीवास्तव, का सह-चयन 10 अक्टूबर 2026 को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा किया गया। - सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए क्या निर्देश दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को निर्देश दिया था कि प्रत्येक स्टेट बार काउंसिल में 30% महिला अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए, जिसमें 20% चुनाव और 10% सह-चयन के जरिए पूरा किया जाए। - कौन-कौन सी महिलाओं को स्टेट बार काउंसिल में सह-चयन के लिए पात्र माना गया है?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट की पूर्व महिला जजें और वरिष्ठ महिला अधिवक्ता, साथ ही लंबे समय से वकालत कर रहीं महिलाएं और चुनाव में हार चुकीं उम्मीदवारें भी सह-चयन के लिए पात्र हैं।