इंदौर EOW का बड़ा एक्शन : 33 लाख के लोन घोटाले में बैंक मैनेजर सहित जालसाजों पर FIR

Sanjay Gupta | Mar 17, 2026, 16:00 IST
Photograph: (the sootr)
ईओब्ल्यू ने इंदौर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए ₹33 लाख का लोन लेने वाले आरोपियों और बैंक अधिकारियों पर केस दर्ज किया। जांच में बैंक की अनियमितताएं सामने आईं।

indore.आर्थिक अन्वेषण विंग यानी ईओडब्ल्यू ने इंदौर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ₹33 लाख का लोन प्राप्त करनें वाले आरोपियों एवं बैंक अधिकारियों पर केस किया है। इन्होंने फर्जी संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से 33 लाख का ऋण प्राप्त किया गया। पहले से ही एक अन्य बैंक में यह संपत्तियां बंधक थी और वहां से भी यह लोन ले चुके थे। इसमें लोन लेने वालों के साथ ही बैंक अधिकारियों और पैनल वकील व मूल्याकंनकर्ताओं की भूमिका संदिग्ध पाई गई।



इन सभी को बनाया आरोपी

  • ऋण लेने वाला मेसर्स अबू रोड लाइन्स का प्रोपेराईटर करामत खान पिता स्व अब्दुल रहमान
  • संपत्ति को बंधक रखने वाला मोहम्मद रफीक पिता स्व. हुसैन मोहम्मद
  • तत्कालीन ब्रांच मैनेजर जतिन गुप्ता पिता घनश्यामदास गुप्ता
  • तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी पिता स्व. लक्ष्मण दास दरवानी
  • मूल्यांकनकर्ता इंजीनियर सुनील जैन पिता स्व. ताराचंद जैन
  • जावेद खान व मोहम्मद इरफान खान

इस तरह किया खेल

केनरा बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर आनंद टोटड ने इसकी शिकायत की थी। आरोप है कि मेसर्स अबू रोड लाइन्स के संचालक करामत खान एवं अन्य ने वर्ष 2017 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिंडीकेट बैंक (वर्तमान केनरा बैंक), नंदानगर शाखा इन्दौर से दो करोड़ 33 लाख का ऋण लिया। पहले केनरा बैंक नंदानगर शाखा में खाता खोलकर ₹10 लाख का ऋण लिया गया था। बाद में ऋण सीमा बढ़ाने हेतु मकान नंबर 435-A, ग्रीन पार्क कॉलोनी इन्दौर के कूटरचित दस्तावेज बैंक में प्रस्तुत किए।



पैनल एडवोकेट एवं मूल्यांकनकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई भ्रामक एवं गलत रिपोर्ट के आधार पर दिनांक साल 2017 में ₹33 लाख का ऋण स्वीकृत किया गया। लोन नहीं चुकाने पर 2019 में इसे एनपीए घोषित किया गया। जांच में यह सामने आया कि उक्त संपत्ति पूर्व से ही इण्डियन बैंक में बंधक थी तथा वर्ष 2021 में बैंक द्वारा नीलाम की जा चुकी थी। EOW(आर्थिक अन्वेषण शाखा) जांच में बैंक अधिकारियों द्वारा आवश्यक सत्यापन, KYC में गंभीर अनियमितताएं पाई गई।



इन धाराओं में किया केस

आरोपियों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर बैंक से धोखाधड़ी की गई। इस पर धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी एवं भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 (सी) का अपराध पंजीबद्ध किया गया है।



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