जबलपुर में नगर निगम अधिकारी पर EOW का शिकंजा, कई ठिकानों पर मारे छापे

Neel Tiwari | Jun 16, 2026, 15:40 IST
जबलपुर में नगर निगम अधिकारी पर छापा
जबलपुर नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोलाराव के ठिकानों पर EOW ने छापेमारी की है। आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में फ्लैट, प्लॉट और कई गाड़ियों के दस्तावेज मिले हैं।

EOW ने नगर निगम जबलपुर में पदस्थ प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोलाराव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में हुई है।



ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) की टीम ने कोर्ट से सर्च वारंट लेने के बाद उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। शुरुआती जांच में पोलाराव के नाम पर कई चल-अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि ये संपत्तियां उनकी घोषित आय के हिसाब से सही हैं या नहीं।



इस कार्रवाई की खबर फैलते ही नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा का माहौल बन गया है।



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फ्लैट, भूखंड और कृषि भूमि के दस्तावेज मिले

छापेमारी के दौरान EOW को एक आवासीय फ्लैट, लगभग 10 हजार वर्गफुट का भूखंड प्राप्त हुआ है। साथ ही आंध्र प्रदेश में खरीदी गई कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी प्राप्त हुए हैं।



जांच अधिकारियों के अनुसार बरामद दस्तावेजों से यह संकेत मिले हैं कि, संबंधित अधिकारी ने विभिन्न स्थानों पर संपत्तियों में निवेश किया है। इन संपत्तियों की खरीद के समय, भुगतान के स्रोत और घोषित आय के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है।



एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्तियां वैध आय से अर्जित की गई हैं। या फिर आय से अधिक संपत्ति के दायरे में आती हैं।



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बैंक खाते और नकद लेन-देन भी जांच के दायरे में

EOW की टीम ने कार्रवाई के दौरान चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों, निवेश संबंधी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। साथ ही नकद लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं।



जांच एजेंसी इन वित्तीय अभिलेखों का विश्लेषण कर रही है। ताकि अधिकारी की वास्तविक आय, निवेश और संपत्ति के बीच अंतर का आकलन किया जा सके। बैंकिंग लेन-देन और निवेश पैटर्न की भी गहन जांच की जा रही है।



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आय और संपत्ति का तुलनात्मक परीक्षण

सूत्रों के अनुसार EOW द्वारा जब्त दस्तावेजों और संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन कराया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य अधिकारी की वैध आय और उनके स्वामित्व वाली संपत्तियों के कुल मूल्य के बीच अंतर का निर्धारण करना है।



वहीं यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।



फिलहाल EOW की जांच जारी है। एजेंसी ने मामले से जुड़े अन्य वित्तीय पहलुओं की भी पड़ताल शुरू कर दी है।



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