आज दिन-रात बराबर 12-12 घंटे के, सूर्य की खास स्थिति के चलते बनी खगोलीय घटना, अब दिन बड़े और रातें होंगी छोटी

Sanjay Dhiman | Mar 21, 2026, 17:58 IST
Photograph: (the sootr)
आज 21 मार्च को सूर्य के विषुवत रेखा पर लंबवत होने से दिन और रात बराबर होंगे। यह खगोलीय घटना "वसंत संपात" कहलाती है। पढ़ें इस घटना के बारे में।

News in Short

  • बराबरी का बंटवारा: आज पूरी पृथ्वी पर दिन और रात पूरे 12-12 घंटे के बराबर होंगे।
  • सूर्य की स्थिति: सूर्य आज ठीक विषुवत रेखा के ऊपर लंबवत होकर अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराएगा।
  • वसंत संपात: इस दुर्लभ खगोलीय घटना को विज्ञान की भाषा में 'वसंत संपात' या 'Equinox' कहते हैं।
  • उज्जैन का प्रमाण: उज्जैन वेधशाला के यंत्रों ने सूर्य की शून्य क्रांति और सीधी परछाईं को प्रमाणित किया।
  • गर्मी की दस्तक: कल से सूर्य उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करेगा, जिससे अब दिन बड़े और गर्मी बढ़ेगी।

News in Detail

ujjain. आज, 21 मार्च को एक खास खगोलीय घटना "वसंत संपात" घट रही है। इस दिन सूर्य अपनी स्थिति में विषुवत रेखा पर बिल्कुल लंबवत आता है। इसका मतलब है कि पूरी पृथ्वी पर दिन और रात का समय बराबर होगा। इस घटना को वैज्ञानिक भाषा में "सौर विषुव" कहा जाता है।



उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला में इस खगोलीय घटना को देखने के लिए खगोलप्रेमियों और छात्रों की भीड़ जुटी। वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमण करता है, जिससे वह कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच गतिशील प्रतीत होता है। जब सूर्य विषुवत रेखा पर लंबवत होता है, तब यह खास स्थिति बनती है, जिसे हम "वसंत संपात" के नाम से जानते हैं।



सूर्य की क्रांति और दिन-रात के बदलाव

इस खगोलीय घटना में सूर्य की क्रांति लगभग शून्य होती है (0°)। इसके बाद सूर्य उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ने लगता है और दिन धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं, जबकि रातें छोटी होती जाती हैं। यह प्रक्रिया 21 जून तक जारी रहती है, जब उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन होता है।



पारंपरिक यंत्रों से घटना का निरीक्षण

इस खगोलीय घटना को वेधशाला में पारंपरिक यंत्रों से देखा गया। शंकु यंत्र और नाड़ी वलय यंत्र का उपयोग कर इसे प्रत्यक्ष रूप से परखा गया। खास बात यह थी कि शंकु की छाया पूरे दिन एक सीधी रेखा (विषुवत रेखा) पर चलती रही, जो इस घटना का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संकेत था।



ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत

22 मार्च से सूर्य उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करेगा, जिससे उसकी किरणों की तीव्रता बढ़ने लगेगी। इसके साथ ही ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव भी बढ़ने लगेगा। यह खगोलीय घटना न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह छात्रों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला का अनुभव भी प्रदान करती है।



शंकु यंत्र ने दी 'ग्राउंड रिपोर्ट'

जैसे एग्जिट पोल से नतीजे पता चलते हैं, वैसे ही वेधशाला में मौजूद 'शंकु यंत्र' और 'नाड़ी वलय यंत्र' ने आज की सटीक जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने दिखाया कि आज शंकु की परछाईं बिल्कुल सीधी रेखा में चल रही है। यह इस बात का सबूत है कि सूर्य एकदम सेंटर में है।



22 मार्च से गर्मी का 'कैंपेन' तेज हो जाएगा। सूर्य की किरणें अब सीधे हमारे ऊपर अपनी ताकत दिखाएंगी। इसके बाद 21 जून तक दिन बड़े होते जाएंगे, जो साल का सबसे लंबा दिन होगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे-जैसे चुनाव करीब आते हैं, चुनावी पारा बढ़ने लगता है। वैसे ही अब मौसम का पारा भी चढ़ने वाला है।



आमजन और छात्रों के लिए क्या है इसमें खास?

यह घटना सिर्फ कागजों या दूरबीन तक सीमित नहीं है। यह हमें सिखाती है कि ब्रह्मांड कैसे एक तय नियम से चलता है। छात्रों के लिए तो यह एक 'लाइव लेबोरेटरी' जैसा अनुभव था। जब किताबों में पढ़ा हुआ विज्ञान आंखों के सामने घटता है, तो उसकी विश्वसनीयता और बढ़ जाती है। अब हम आधिकारिक तौर पर कह सकते हैं कि वसंत ऋतु ने अपनी दस्तक दे दी है और ग्रीष्म ऋतु अपना नामांकन दाखिल करने के लिए तैयार है।



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