फेल होने के बावजूद प्रमोशन! मध्य प्रदेश पुलिस में हुआ बड़ा गड़बड़झाला

Sanjay Dhiman | Apr 27, 2026, 11:02 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में एक बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। यहां एसआई परीक्षा में फेल होने के बावजूद कुछ पुलिस कर्मियों को प्रमोशन मिला और वे थानेदार बने। अब सरकार ने अब उन एसआई की सूची मांगी है, जिनका प्रमोशन फेल होने के बावजूद हुआ है।

News in Short

  • मध्य प्रदेश पुलिस में फेल एसआई को प्रमोशन मिलने का मामला सामने आया है।
  • 41 एसआई के थानेदार बनने के बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू की है।
  • फेल हुए एसआई को दोबारा ट्रेनिंग और पूरक परीक्षा देने का निर्देश दिया गया है।
  • सिंगरौली जिले के थानेदार कपूर त्रिपाठी पर नकल करने का आरोप था।
  • एमपी सरकार ने पीएचक्यू से सभी फेल एसआई की सूची मांगी है और कार्रवाई की शुरुआत की है।

News in Detail

मध्य प्रदेश के पुलिस विभाग में एक बड़ा मामला सामने आया है। कुछ पुलिस कर्मियों को SI ट्रेनिंग परीक्षा में फेल होने के बावजूद प्रमोशन मिला और थानेदार(इंस्पेक्टर) बना दिया गया। यह मामला तब सामने आया जब सिंगरौली जिले के मोरबा थाने के कार्यवाहक इंस्पेक्टर कपूर त्रिपाठी पर आरोप लगे।



सरकार ने लिया संज्ञान

एमपी सरकार ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया। पुलिस मुख्यालय भोपाल (पीएचक्यू) से उन एसआई(सब-इंस्पेक्टर) की सूची मांगी, जो एसआई ट्रेनिंग परीक्षा में फेल हो चुके थे। फेल होने के बाद भी उन्हें प्रमोशन मिल गया था। अब तक 41 एसआई के नाम सामने आ चुके हैं जिनके प्रमोशन में गड़बड़ी हुई है।



प्रमोशन वापसी और परीक्षा

अब शासन ने फैसला लिया है कि इन फेल थानेदारों से उनकी फील्ड और थाना पोस्टिंग ले ली जाएगी। इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी भेजा जाएगा। यहां उनकी दोबारा ट्रेनिंग होगी और फिर पूरक परीक्षा ली जाएगी। इन सभी थानेदारों को बार-बार परीक्षा में बैठने के लिए कहा गया, लेकिन कोई भी परीक्षा देने नहीं आया।



सिंगरौली जिले का मामला

सिंगरौली जिले के मोरबा थाने में थानेदार कपूर त्रिपाठी पर आरोप थे कि वे एसआई ट्रेनिंग परीक्षा में नकल करते हुए पकड़े गए थे। इसके बाद भी 2021 में उन्हें कार्यवाहक इंस्पेक्टर बनाया गया। इस दौरान कपूर त्रिपाठी का नाम एसआई परीक्षा में फेल होने वालों की सूची में आया था। इसके बाद उनका तबादला पीएचक्यू ने 26 मार्च को भौरी किया।





लिस्ट में शामिल 41 एसआई के नाम

सागर स्थित जेएनपीए ने फेल एसआई की सूची भेजी है, जिसमें कुल 41 नाम शामिल हैं। इनमें कुछ एसआई हैं जो पहले सेमेस्टर में फेल हुए, तो कुछ दूसरे सेमेस्टर में। इन फेल एसआई के नामों में राशि सोनी, गीता भदौरिया, सुधीर गुर्जर, राजेंद्र चौहान, कुणाल राठौर, और कई अन्य थानेदारों के नाम शामिल हैं।



'जेएनपीए सागर' ने जारी की फेल हुए एसआई की लिस्ट

'जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी (जेएनपीए) सागर' द्वारा भेजी गई सूची में 41 सब इंस्पेक्टरों के नाम हैं जिनमें



  • राशि सोनी (बैच 87): डीआर, II सेमेस्टर में फेल।
  • गीता भदौरिया (बैच 87): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • सुधीर गुर्जर (बैच 87): डीआर II-सेमेस्टर में फेल।
  • राजेंद्र चौहान (बैच 87): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • कुणाल राठौर (बैच 87): डीआर में फेल।
  • अंशुल बोरकर (बैच 87): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • आलोक बंसोड (बैच 87): II-सेमेस्टर में फेल।
  • रश्मि तंतुवाय (बैच 89): आधारभूत परीक्षा में फेल।
  • स्वाति गोदरे (बैच 89): आधारभूत परीक्षा में फेल।
  • भावना यादव (बैच 89): आधारभूत परीक्षा में फेल।
  • वंदना परमार (बैच 89): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • प्रतीक्षा चंदेल (बैच 89): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • सीमा परमार (बैच 91): आधारभूत परीक्षा में फेल।
  • रवि नरवरिया (बैच 91): आधारभूत परीक्षा में फेल।
  • जय रघुवंशी (बैच 91): आधारभूत परीक्षा में फेल।
  • प्रियंका पटेल (बैच 91): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • प्रज्ञा परोहा (बैच 91): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • सुरेश मुवेल (बैच 91): 1-सेमेस्टर में फेल।
  • विंध्या तोमर (बैच 91): 1-रोमेस्टर में फेल।
  • आरएस अनुरागी (बैच 91): सेमेस्टर परीक्षा में फेल।
  • ईश्वर बघेल (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।
  • सुरेश मुवेल (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।
  • विंध्या तोमर (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।
  • अजय सिंह शाक्य (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।
  • गंगा सिंह मार्को (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।
  • योगेश कुमरे (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।
  • आदिल खान (बैच 91): II-सेमेस्टर में फेल।

सूची और भी लंबी है, लेकिन इतना तो साफ है कि 'खाकी' के इस खेल में नियमों को ताक पर रखकर अपनों को फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई है।



निष्कर्ष: क्या होगा इन 'फेली' थानेदारों का?

भोपाल के पुलिस महकमे में मचे इस हड़कंप ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इस पूरे गड़बड़झाले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने फेल होने के बावजूद इन लोगों को प्रमोशन दिया?



सबसे बड़ा सवाल- क्या ये 'फेली' थानेदार अब पूरक परीक्षा पास कर पाएंगे या इनकी थानेदारी चली जाएगी? यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तो तय है कि इस खबर ने मध्य प्रदेश पुलिस की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में कितनी सख्ती दिखाती है और क्या वाकई 'योग्य' पुलिसकर्मियों को ही 'थानेदारी' का मौका मिलता है!



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