फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: विदेशी जॉब के नाम पर करते थे ठगी, जानें कैसे होते हैं ये फ्रॉड और इनसे कैसे बचें
News In Short
- गंजबासौदा में 5 साल से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर।
- विदेशी जॉब के नाम पर युवाओं से ठगी होती थी।
- फर्जी जॉब ऑफर और ज्वाइनिंग लेटर भी देते थे।
- 20 मोबाइल, 12 सिम और बैंक दस्तावेज जब्त।
- नोएडा का योगेंद्र और महिला साथी गिरफ्तार।
News In Detail
मध्य प्रदेश के गंजबासौदा (Ganjbasoda) में स्टेट साइबर पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर (Fake Call Center) का भंडाफोड़ किया है। आरोपी विदेशी कंपनियों में जॉब दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगते थे। फर्जी जॉब ऑफर लेटर देकर प्रोसेसिंग फीस वसूली जाती थी। पांच साल से यह धंधा बेखौफ चल रहा था।
गंजबासौदा में साइबर ठगी का खुलासा
मध्य प्रदेश स्टेट साइबर पुलिस (State Cyber Police MP) ने गंजबासौदा में बड़ी कार्रवाई की है। यहां से एक फर्जी कॉल सेंटर (Fake Call Center) का पर्दाफाश किया गया है।
आरोपी बॉलीवुड फिल्म बंटी और बबली (Bunty Aur Babli) की तर्ज पर ठगी करते थे। क्वीकर.जॉब (Quicker.Job) नाम की फर्जी कंपनी बनाकर काम किया जाता था। आईटी सेक्टर में विदेशी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता था।
फर्जी ऑफर लेटर देकर वसूली
आरोपियों का तरीका बेहद शातिराना था। भरोसा दिलाने के लिए वे फर्जी जॉब ऑफर लेटर (Fake Job Offer Letter) और ज्वाइनिंग लेटर तक तैयार करते थे।
इन दस्तावेजों को देखकर युवा आसानी से झांसे में आ जाते थे। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee) के नाम पर हजारों रुपए वसूले जाते थे। देशभर में टेलीकॉलिंग (Telecalling) के जरिए शिकार ढूंढे जाते थे। हर पीड़ित से अलग-अलग राशि ऐंठी जाती थी।
पांच साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा
MP साइबर पुलिस के अनुसार इस ऑनलाइन फ्रॉड के मुख्य आरोपी योगेंद्र सिंह मूलत: नोएडा, उत्तर प्रदेश (Noida, UP) का रहने वाला है। 45 वर्षीय योगेंद्र बीते पांच साल से गंजबासौदा में रहकर यह धंधा चला रहा था।
उसने सोचा था कि छोटे शहर में पुलिस की नजर नहीं पड़ेगी। इस कॉल सेंटर में एक दर्जन से अधिक लोग काम करते थे। काम करने वालों को खुद इस फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं थी। पांच साल तक स्थानीय पुलिस को भी इसकी भनक नहीं लगी।
महिला साथी भी गिरफ्तार
पुलिस ने योगेंद्र के साथ उसकी एक महिला साथी को भी गिरफ्तार किया है। दोनों मिलकर पूरे देश में ठगी का जाल बिछाते थे। महिला आरोपी टेलीकॉलिंग में अहम भूमिका निभाती थी। पीड़ितों को विश्वास दिलाने में वह माहिर थी। दोनों के खिलाफ साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने जब्त किया सामान
छापेमारी में पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया। 20 मोबाइल फोन और 12 सिम कार्ड (SIM Cards) बरामद किए गए।
तीन पासबुक और तीन चेकबुक भी जब्त की गई हैं। डेटा रजिस्टर और पेनड्राइव भी मिले हैं। पुलिस अब सभी बैंक खातों की जांच कर रही है। ठगी की कुल राशि का पता लगाया जा रहा है।
ऐसे होती है ऑनलाइन ठगी
ऑनलाइन जॉब के नाम पर ठगी अक्सर भरोसेमंद नौकरी दिखाकर, फिर फीस या डेटा चुराकर होती है। जानिए कैसे...
रजिस्ट्रेशन/ट्रेनिंग फीस का झांसा
स्कैमर वर्क‑फ्रॉम‑होम या टाइम‑पास जॉब का ऑफर भेजते हैं और रजिस्ट्रेशन, टेस्ट या ट्रेनिंग फीस के नाम पर 500–5,000 रुपए तक ले लेते हैं। भुगतान के बाद नंबर ब्लॉक हो जाता है।
फर्जी कंपनी और इंटरव्यू स्कीम
कई बार फर्जी HR अच्छी सैलरी का ऑफर देकर ऑनलाइन इंटरव्यू और फिर “सिक्योरिटी डिपॉजिट” या डॉक्यूमेंट‑वेरिफिकेशन फीस के नाम पर लाखों रुपये ले लेते हैं, जैसा एक लेक्चरर‑स्कॉलर मामले में देखा गया।
डेटा और अकाउंट तक पहुंच लेना
कुछ स्कैमर संदिग्ध लिंक भेजकर KYC या वेरिफिकेशन फॉर्म भरवाते हैं, जिससे UPI‑पासवर्ड जैसा डेटा चोरी होता है और अकाउंट खाली हो जाता है।
साइबर अपराध से कैसे बचें
इस मामले ने एक बार फिर साइबर ठगी (Cyber Fraud) के खतरे को उजागर किया है। किसी भी अनजान कंपनी से जॉब ऑफर (Job Offer) मिलने पर सतर्क रहना जरूरी है।
प्रोसेसिंग फीस मांगने वाली कंपनियों पर कभी भरोसा न करें। नौकरी के नाम पर पैसे मांगना हमेशा संदिग्ध होता है। किसी भी संदेह पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।
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