बिलासपुर में बने नकली जाति प्रमाणपत्र से 35 साल की आबकारी विभाग में नौकरी, SC-ST आयोग सख्त

Amresh Kushwaha | Mar 17, 2026, 15:42 IST
fake caste certificate bilaspur excise department case rajesh henry
मध्य प्रदेश आबकारी विभाग के अपर आयुक्त राजेश हेनरी पर फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए 35 साल तक नौकरी करने का आरोप है। SC-ST आयोग ने अब इस मामले में बिलासपुर कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है।

सरकारी सिस्टम में सेंधमारी कर अनुचित लाभ उठाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पदस्थ आबकारी विभाग के अपर आयुक्त राजेश हेनरी पर गम्भीर आरोप लगे हैं।



अपर आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे न केवल नौकरी हासिल की, बल्कि पिछले 35 साल से विभाग में ऊंचे पदों पर पदस्थ हैं। अब इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश शासन को तलब किया है।



1990-91 का वह दस्तावेज और संदिग्ध जाल

मामले की जड़ें साल 1990-91 में छिपी हैं। आरोप है कि राजेश हेनरी ने इसी दौरान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर तहसील की सील और हस्ताक्षर वाला एक अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रमाणपत्र बनवाया।



इसी दस्तावेज के आधार पर उन्होंने खुद को आदिवासी समुदाय का बताकर आबकारी विभाग में प्रवेश पाया। आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, जब बिलासपुर तहसील की केस रजिस्टर की जांच की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।



साल 1990-91 के रिकॉर्ड में हेनरी के नाम का कोई प्रकरण दर्ज ही नहीं है। इससे यह साफ होता है कि वह प्रमाण पत्र कभी आधिकारिक रूप से जारी ही नहीं हुआ था।



रसूख के आगे दो साल से सुस्त पड़ी जांच

इंदौर के आरटीआई एक्टिविस्ट और वकील राजेंद्र गुप्ता ने इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। उनकी शिकायत के बाद छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने मामले को जिला स्तरीय समिति को भेजा था।



वहीं, विडंबना देखिए कि रसूख के चलते यह जांच पिछले 2 साल से ठंडे बस्ते में धूल फांक रही है। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त संजय चंदेल ने पुष्टि की है कि हेनरी को कई बार दस्तावेजों के साथ बुलाया गया, लेकिन वे कभी उपस्थित नहीं हुए।



whatsapp-image-2026-03-16-at-72349-pm_1773670177-299662


विभागीय संरक्षण में मिली अफसरों की मदद

शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि आबकारी विभाग के बड़े अफसरों को इस फर्जीवाड़े की जानकारी सालों से थी। इसके बावजूद, विभाग के भीतर ही इस मामले को दबाने और हेनरी को बचाने की कोशिशें होती रहीं।



साथ ही आरोप है कि विभाग ने कभी भी गंभीरता से उनके दस्तावेजों की सत्यता की जांच नहीं करवाई। इससे एक संदिग्ध व्यक्ति 35 सालों तक अहम पदों पर बना रहा।



राष्ट्रीय आयोग ने 15 दिन में मांगा जवाब

जब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद कम दिखने लगी, तो मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग तक पहुंचा। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर और मध्य प्रदेश आबकारी विभाग के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सख्त लहजे में 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।



साहब ने चुप्पी साध ली

जब इस पूरे विवाद पर ग्वालियर में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने इस गंभीर मामले को विभागीय (Departmental Matter) बताते हुए कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, उनकी यह खामोशी अब कई और सवाल खड़े कर रही है।



ये खबर भी पढ़िए...



साडा को झटका: ग्वालियर उपभोक्ता आयोग ने दिया 13 लाख लौटाने का बड़ा आदेश



ग्वालियर में महापौर निधि को लेकर विवाद, मेयर पहुंची हाईकोर्ट, राज्य सरकार को नोटिस



ग्वालियर में 36 पुलिस जवान ट्रेनिंग से बाहर, AI से खाने में कीड़े की बनाई थी तस्वीर



मैहर मेला जाने वाले भक्तों को राहत, रेलवे ने की 14 जोड़ी ट्रेनों के ठहराव की घोषणा



Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • मध्यप्रदेश शासन
  • बिलासपुर
  • ग्वालियर
  • अनुसूचित जनजाति
  • आबकारी विभाग
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
  • आरटीआई एक्टिविस्ट
  • आदिवासी विकास विभाग