एक साथ 3 जिलों में नौकरी करने वाला शख्स डॉक्टर है ही नहीं, भतीजा बोला- असली मैं हूं

Pawan Modiya | Jul 17, 2026, 08:15 IST
फर्जी डॉक्टर केस
मध्य प्रदेश में तीन जिलों में एक नाम से चल रही डॉक्टर की नौकरी का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। अब असली डॉ. महेश चंद शर्मा ने सामने आकर अपने चाचा सतीश शर्मा पर पहचान चुराने का आरोप लगाया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में एक नाम से तीन जिलों में डॉक्टर की नौकरी का मामला उजागर हुआ।
  • 3 जुलाई को रीवा लोकायुक्त ने रिश्वत लेते एक संविदा चिकित्सक को पकड़ा।
  • जांच में पता चला कि यही नाम तीन अलग-अलग जिलों में दर्ज था।
  • अब असली डॉ. महेश चंद शर्मा ने खुद सामने आकर शिकायत दर्ज कराई है।
  • उन्होंने अपने चाचा सतीश शर्मा पर पहचान चुराने का आरोप लगाया है।

क्या था असल मामला

मध्य प्रदेश में बड़ा फर्जीवाड़ा 3 जुलाई को उजागर हुआ था। रीवा लोकायुक्त ने शहडोल जिले में एक संविदा चिकित्सक को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी कथित रिश्वत लेते हुए हुई थी। यह कार्रवाई लोकायुक्त टीम की रेड के दौरान हुई। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान डॉ. महेश चंद शर्मा के नाम से थी। वे शहडोल के ऊफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ थे। गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ गया। शुरू में यह एक सामान्य रिश्वत का मामला लग रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर पूरी तरह बदल गई।



कैसे खुला फर्जीवाड़ा

गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम (National Health Mission) हरकत में आया। एनएचएम ने दस्तावेजों की गहराई से जांच शुरू की। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि इसी नाम का चिकित्सक श्योपुर जिले में भी पदस्थ है। वहां यह नियुक्ति जून 2021 से चल रही थी। इसके अलावा खरगोन जिले के केली स्वास्थ्य केंद्र में भी यही नाम मिला। वहां फरवरी 2023 से नियुक्ति दर्ज थी। यानी एक ही नाम पर तीन जिलों में नौकरी चल रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि नाम में मामूली बदलाव किए गए। पिता के नाम में भी ऐसे ही बदलाव मिले। अलग-अलग दस्तावेज और तीन पैन कार्ड का इस्तेमाल हुआ। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे संविदा नियुक्तियां हासिल करने का शक है। खरगोन जिले से जुड़ा रिकॉर्ड भी एनएचएम को भेजा जा चुका है। यह पूरी प्रक्रिया कई सालों तक बिना पकड़ में आए चलती रही।



अब असली डॉक्टर सामने आए

अब इस मामले में बड़ा मोड़ आया है। एक एमबीबीएस चिकित्सक ने खुद को असली डॉ. महेश चंद शर्मा बताया है। उन्होंने शहडोल के जयसिंहनगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि उनकी पहचान का दुरुपयोग हुआ है। यह जानकारी उन्हें कुछ दिन पहले ही मिली थी। उन्हें पता चला कि उनके नाम से कोई और काम कर रहा है। वह व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर नौकरी कर रहा था। इसके बाद उन्होंने सीधे पुलिस से संपर्क किया। उन्होंने साफ कहा कि उनका इस नौकरी से कोई लेना-देना नहीं है। यह सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई।



फर्जी डॉक्टर


भतीजे ने चाचा पर लगाए आरोप

शिकायतकर्ता डॉक्टर ने अपने चाचा सतीश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि चाचा ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का दुरुपयोग किया। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे तीन जिलों में नौकरी हासिल की गई। आरोप है कि चाचा वर्षों तक शासन से मानदेय भी लेते रहे। यह पूरा मामला अभी जांच का विषय है। अभी यह दावा साबित होना बाकी है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान और दस्तावेज खंगाल रही है। इसी आधार पर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश हो रही है।



कैसे हुआ पहचान का दुरुपयोग

शिकायतकर्ता ने पुलिस को अपनी पूरी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2019 में एमबीबीएस पूरी की। यह डिग्री भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज से मिली थी। फिलहाल वे राजस्थान में कार्यरत हैं। वे डीग जिले के पूंछरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवाएं दे रहे हैं। उनकी असली नौकरी और कथित फर्जी नियुक्ति साथ-साथ चलती रही। यह बात लंबे समय तक किसी को पता नहीं चली। ऐसे मामलों में दस्तावेज सत्यापन की कमी अक्सर बड़ी वजह बनती है।



अब तक क्या कार्रवाई

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की शिकायत पर भोपाल के चुनाभट्टी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। आरोप है कि फर्जी पहचान से सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। अब शहडोल पुलिस ने भी शिकायत पर मामला दर्ज किया है। जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय बैगा ने जानकारी की पुष्टि की है। उनके अनुसार दो जिलों के दस्तावेज पुलिस को मिल चुके हैं। पुलिस अब दोनों शिकायतों को एक साथ जोड़कर देख रही है। इससे पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश हो रही है।



आगे की जांच जारी

पुलिस अब एमबीबीएस डिग्री का सत्यापन करा रही है। साथ ही अन्य प्रमाण-पत्रों की भी जांच हो रही है। तीसरे जिले खरगोन का रिकॉर्ड मिलना अभी बाकी है। रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि नियुक्ति में लापरवाही कहां हुई। यह भी देखा जाएगा कि फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्ति कैसे संभव हुई। फिलहाल आरोपित सतीश शर्मा की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।



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