न डिग्री, न UPSC, एआई से बना फर्जी IAS, जीवनसाथी पर महिला डॉक्टर से ठगे तीन लाख
समझें क्या है पूरा मामला...
- भदोही के संजय कुमार ने खुद को आईएएस अफसर बताया।
- उसने एआई से फर्जी तस्वीरें भी बनाईं।
- इसके बाद जीवनसाथी डॉट कॉम पर एक महिला डॉक्टर से दोस्ती की।
- मदद के नाम पर डॉक्टर से 3 लाख रुपए ठग लिए।
- नरसिंहपुर पुलिस ने उसे वाराणसी से गिरफ्तार कर लिया है।
आजकल सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल साइट्स पर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को चूना लगाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
यहां यूपी के भदोही जिले के रहने वाले संजय कुमार ने बिना किसी डिग्री और परीक्षा पास किए खुद को IAS अफसर (फर्जी आईएएस अधिकारी) बना लिया।
संजय कुमार AI की मदद से अपनी तस्वीरें एडिट करता था। वह खुद को बड़े सरकारी अफसरों, सरकारी दफ्तरों और बड़े कार्यक्रमों में बैठा हुआ दिखाता था।
इन तस्वीरों को देखकर कोई भी आसानी से धोखे में आ सकता था। इसी फर्जी पहचान के दम पर उसने जीवनसाथी डॉट कॉम पर नरसिंहपुर की एक महिला डॉक्टर से पहचान बढ़ाई।
मदद के बहाने ऐंठे 3 लाख
महिला डॉक्टर को अपनी बातों के जाल में फंसाकर आरोपी ने खुद को धार जिले में SDM के पद पर तैनात बताया। उसने दावा किया कि उसने MBBS, MD और DM की पढ़ाई की है।
इसके बाद उसका चयन UPSC में हुआ और उसे एमपी कैडर मिला। जब महिला डॉक्टर को उस पर भरोसा हो गया, तो आरोपी ने मदद के नाम पर उनसे लगभग तीन लाख रुपए ले लिए।
शिकायत के बाद पुलिस एक्शन में
जब महिला को ठगी का एहसास हुआ तो महिला डॉक्टर ने 10 अगस्त को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। संजय के जीवनसाथी डॉट कॉम अकाउंट और सोशल मीडिया प्रोफाइल की तकनीकी जांच की गई।
इसी बीच धार प्रशासन से भी जानकारी मांगी गई। प्रशासन ने साफ किया कि इस नाम का कोई अधिकारी वहां पदस्थ नहीं है। इससे साफ हो गया कि संजय की पूरी कहानी झूठी थी।
पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संजय को वाराणसी से गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि उसने महीनों तक यह फर्जी पहचान चलाई।
बैंक खाते और मोबाइल की जांच जारी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब संजय के बैंक खातों की जांच कर रही है। उसका मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण भी खंगाले जा रहे हैं। सोशल मीडिया अकाउंट की भी गहराई से पड़ताल हो रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या संजय ने इस फर्जी पहचान से किसी और को भी निशाना बनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी डॉ. ऋषिकेश मीना ने एक विशेष टीम बनाई है। यह टीम मामले की हर परत को खंगालेगी।
मैट्रिमोनियल फ्रॉड से कैसे बचें
बता दें कि ऐसे मामले अब आम होते जा रहे हैं। मैट्रिमोनियल साइट पर मिलने वाले किसी भी व्यक्ति की सरकारी नौकरी का दावा हमेशा आधिकारिक जरिए से जांचना चाहिए।
किसी भी अधिकारी की पोस्टिंग संबंधित जिले की वेबसाइट या कार्यालय से कन्फर्म की जा सकती है।
पैसों का लेनदेन शुरुआती दोस्ती में करने से बचना चाहिए। तस्वीरों और दस्तावेजों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। शक होने पर तुरंत नजदीकी थाने से संपर्क करना सही कदम है।
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