28 मौतों के बाद भी अस्पतालों में मिल रही अमानक दवाएं, जांच में 10 फेल

Aman Vaishnav | May 09, 2026, 08:12 IST
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जहरीली सिरप से 28 मौतों के बाद भी सिस्टम नहीं जागा है। जनवरी से अब तक सरकारी खरीदी की 10 दवाएं अमानक पाई जा चुकी हैं। जांच रिपोर्ट आने में देरी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है।

कफ सिरप कांडसे 28 लोगों की मौत के बाद भी मध्यप्रदेश में घटिया दवाओं का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी से लेकर अब तक सरकारी खरीद में 10 दवाएं अमानक पाई गई हैं। इन दवाओं में दर्द निवारक, एंटीबायोटिक इंजेक्शन, पैरासिटामॉल सिरप और ब्लड ग्रुपिंग किट तक शामिल हैं।



पेरासिटामॉल सिरप जांच में फेल

पिछले महीने जबलपुर में एक रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें पेरासिटामॉल सिरप को जांच में फेल पाया गया था। हालांकि यह रिपोर्ट सैंपल लेने के साल भर बाद आई, यानी जब तक रिपोर्ट आई तब तक महीनों तक मरीजों को यह घटिया सिरप दिया जा रहा था।



रिपोर्ट आने के बाद अब इसकी आपूर्ति को रोक दिया गया है। संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।



नुकसान के बाद कार्रवाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब तक जांच रिपोर्ट आती है, तब तक हर जिले में उस बैच की 50% से ज्यादा दवाएं मरीजों ने इस्तेमाल कर ली होती हैं। यानी हमेशा नुकसान होने के बाद ही कार्रवाई की जाती है।



कंपनी के भरोसे चल रही प्रोसेस

दवाओं की जांच प्रक्रिया कागजों पर तो चार स्तरों में बताई जाती है, लेकिन असल में सबसे बड़ी गलती शुरुआती दो स्तरों में ही हो रही है। दवा बनाने वाली कंपनी अपनी ही लैब में जांच कराके उसे ओके रिपोर्ट देती है। फिर वो एक और मान्यता प्राप्त लैब से जांच कराकर रिपोर्ट भी जोड़ देती है।



यानि शुरुआत में पूरी प्रक्रिया कंपनी के भरोसे चलती है। इसके बाद दवाएं अस्पतालों में पहुंचकर मरीजों को दी जाती हैं। सरकारी स्तर पर रैंडम सैंपलिंग और असल जांच तब होती है, जब दवा पहले ही बाजार में बिक चुकी होती है।



सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन सैंपलों की रिपोर्ट आने में छह महीने से लेकर एक साल तक का वक्त लग जाता है। इसका मतलब जब तक रिपोर्ट आती है तब तक लाखों मरीज वो दवा ले चुके होते हैं।



एलर्जी, संक्रमण, और किडनी पर असर

एनएचएम के पूर्व डायरेक्टर डॉ. पंकज शुक्ला बताते हैं कि, अमानक दवाएं मिलावटी नहीं होती हैं। इन दवाओं में दवा का साल्ट तय मानक से कम या ज्यादा होता है। जैसे 500 एमजी की दवा में 350 या 400 एमजी ही पाया जाता है।



कई बार दवाओं की स्ट्रिप फटी हुई या नमी वाली भी मिलती है। ऐसी दवाएं मरीज पर असर कम डाल सकती हैं या फिर साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इससे एलर्जी, संक्रमण, और किडनी समेत अन्य अंगों पर भी बुरा असर हो सकता है।



छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड (सितंबर-अक्टूबर 2025) मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में कोल्ड्रिफ नामक जहरीली कफ सिरप पीने से 20 से अधिक बच्चों की मौत का एक दुखद मामला है।



जांच में सिरप में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल नामक घातक केमिकल की पुष्टि हुई थी। इस कारण से बच्चों की किडनी फेल हो गई थी।



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