मध्य प्रदेश फर्जी पासपोर्ट कांड: बौद्ध भिक्षु को एसटीएफ ने किया गिरफ्तार, भिक्षु ने 50 पासपोर्ट में दी थी झूठी गवाही
भिक्षु पर 20 हजार रुपए का इनाम
करीब दस दिन पहले इस पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित हुआ। तब वह विदिशा जाने की बात कहकर मठ से फरार हो गया।
वह मूल रूप से झांसी का रहने वाला है। मध्य प्रदेश के बौद्ध विहारों में उसकी गहरी पैठ बताई जाती है। fake passport scam में ग्वालियर, विदिशा और भोपाल के मठों से उसका कनेक्शन मिला।
उसके तीन नाम सामने आए हैं: गुलाब राय गौतम, सम्यक बोधि और भंते।
कहां छिपा था भिक्षु
एसटीएफ ग्वालियर की जांच में सामने आया कि वह विदिशा गया ही नहीं। वह ग्वालियर के लक्ष्मीगंज संजय नगर में छिपकर रह रहा था।
एसटीएफ की टीम लगातार उसका पीछा कर रही थी। फिर पता चला कि वह छत्तीसगढ के बिलासपुर में है। टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
10 हजार रुपए में किराए पर खाता
आरोप है कि कमीशन के लालच में उसने अपना बैंक खाता मास्टरमाइंड को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया। मास्टरमाइंड का नाम रियाल चौधरी उर्फ भंते मैतानंद है।
यह बैंक खाता 2021-22 में एसबीआई की विदिशा शाखा में खुला था। खाता देने के बदले हर महीने 10 हजार रुपए किराया तय हुआ था। यानी सालभर में उसे 1 लाख 20 हजार रुपए मिलते थे।
खाते का पूरा कंट्रोल रियाल चौधरी के पास था। यहां तक कि बैंक में मोबाइल नंबर भी उसी का दर्ज था। अब सवाल है कि कोई अपना बैंक खाता किराए पर क्यों देगा? एसटीएफ के मुताबिक, इसकी वजह कमीशन का लालच था।
एसटीएफ का दावा है कि पासपोर्ट बनवाने से जुड़े पैसों का पूरा लेन-देन इसी खाते से होता था। यानी इस खाते का इस्तेमाल पैसों के लेन-देन के लिए किया जा रहा था, जबकि खाता किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर किराए पर लिया गया था।
50 पासपोर्ट और तीन गवाह
एसटीएफ के मुताबिक सिंडिकेट ने मध्य प्रदेश में करीब 70 जाली पासपोर्ट बनवाए। इनमें से करीब 50 पासपोर्ट सिर्फ तीन लोगों की गवाही पर जारी हुए। गुलाब राय खुद इन गवाहों में मुख्य था। यानी 70 में से 50 पासपोर्ट सिर्फ तीन गवाहों के सहारे बने।
सोचिए एक बार। 50 पासपोर्ट के पीछे कितने गवाह थे? सिर्फ तीन।
बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट में भूमिका
बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट के लिए जाली दस्तावेज तैयार हुए थे। एसटीएफ के मुताबिक गुलाब राय ने इन पर गवाह बनकर फर्जी दस्तखत किए। मकसद इन नागरिकों को भारतीय साबित करना था।
बौद्ध विहार फर्जी दस्तावेज की आधारशिला
एसटीएफ के मुताबिक बौद्ध विहार फर्जी दस्तावेज के खेल में गुलाब राय आधारशिला था। आवेदनों में पते बौद्ध मठों के दिए गए। मोबाइल नंबर भी इसी गिरोह के थे।
उसने अपने असर से गयाप्रसाद गौतम उर्फ ज्ञानज्योति जैसों को भी शामिल किया। आरोप है कि इन्होंने भी बांग्लादेशी नागरिकों के दस्तावेजों पर गवाही दी।
झूठी शिकायत और फरारी का नाटक
मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट कांड का खुलासा होने के बाद गुलाब राय ने खुद को बचाने की कोशिश की। उसने पुलिस को बताया कि रियाल चौधरी ने उसके खाते से पैसे निकाल लिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने यह बात खुद को बचाने के लिए कही थी।
इसके बाद वह विदिशा जाने का बहाना बनाकर ग्वालियर से फरार हो गया। एसटीएफ ने उस पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। अब मध्य प्रदेश एसटीएफ उससे पूछताछ करेगी।
फर्जी पासपोर्ट घोटाले की चार भूमिकाएं
एसटीएफ की जांच में गुलाब राय की चार भूमिकाएं सामने आई हैं। पहली, उसने 10 हजार रुपए महीने पर अपना बैंक खाता किराए पर दिया। दूसरी, वह करीब 50 पासपोर्ट में मुख्य गवाह बना। तीसरी, उसने दूसरे लोगों को भी गवाही देने के लिए जोड़ा। चौथी, खुद को बचाने के लिए उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
FAQ
- गुलाब राय गौतम कौन है और उसे कहां से गिरफ्तार किया गया?
गुलाब राय गौतम उर्फ सम्यक बोधि उर्फ भंते मूल रूप से झांसी का रहने वाला बौद्ध भिक्षु है। एसटीएफ ने उसे छत्तीसगढ के बिलासपुर से गिरफ्तार किया। वह इससे पहले ग्वालियर में छिपकर रह रहा था।
2. आरोपी पर क्या आरोप हैं?
एसटीएफ के मुताबिक उसने 10 हजार रुपए महीने में अपना बैंक खाता मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को किराए पर दिया। वह करीब 50 पासपोर्ट में मुख्य गवाह बना और गवाह के तौर पर फर्जी दस्तखत किए। ये आरोप अदालत में साबित होने बाकी हैं।
3. इस मामले में कितने पासपोर्ट बनाए गए?
एसटीएफ के मुताबिक सिंडिकेट ने मध्य प्रदेश में करीब 70 जाली पासपोर्ट बनवाए। इनमें से करीब 50 पासपोर्ट सिर्फ तीन लोगों की गवाही पर जारी हुए। गुलाब राय उन गवाहों में मुख्य था।