मध्यप्रदेश में पोर्टल ने रोकी 28 वाहनों की फिटनेस! केंद्र ने दी राहत, लेकिन पोर्टल पर नहीं आया विकल्प
इसकी वजह एनआईसी पोर्टल पर जरूरी विकल्प उपलब्ध नहीं होना बताया जा रहा है। सवाल है कि आदेश जारी होने के बाद भी व्यवस्था क्यों नहीं बदली?
राहत आरटीओ तक क्यों नहीं पहुंची?
मध्य प्रदेश में वाहनों की फिटनेस (Vehicle Fitness) जांच को लेकर तकनीकी समस्या सामने आई है। इससे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार ने कुछ वाहन श्रेणियों को एटीएस की अनिवार्यता से राहत दी थी। इसके बावजूद संबंधित वाहन मालिकों को पुरानी प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है।
समस्या परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से जुड़ी बताई जा रही है। पोर्टल पर मैनुअल फिटनेस जांच का विकल्प अभी उपलब्ध नहीं है। इस कारण आरटीओ अधिकारी नई व्यवस्था के तहत जांच पूरी नहीं कर पा रहे हैं। केंद्र का आदेश जारी हो चुका है। लेकिन उसे लागू करने वाला डिजिटल सिस्टम अभी तैयार नहीं है।
25 दिन में पोर्टल क्यों नहीं बदला?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया था। इसमें 28 वाहन श्रेणियों के लिए मैनुअल फिटनेस जांच की अनुमति दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक परिवहन विभाग के अधिकारी पोर्टल अपडेट कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) से संपर्क किया जा रहा है।
हालांकि 18 अक्टूबर तक पोर्टल पर जरूरी बदलाव नहीं होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में तकनीकी प्रक्रिया की समयसीमा पर सवाल उठ रहे हैं। पोर्टल अपडेट करने का अनुरोध एनआईसी को कब भेजा गया था? बदलाव पूरा करने की समयसीमा क्या तय की गई थी? देरी के लिए किस स्तर पर जवाबदेही तय होगी?
ई-रिक्शा मालिकों पर सबसे ज्यादा असर
इस तकनीकी देरी का असर खासतौर पर ई-रिक्शा संचालकों पर पड़ने की बात सामने आई है। पात्र वाहन मालिकों को भी फिलहाल एटीएस की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। फिटनेस जांच में परेशानी के कारण वाहन ट्रांसफर जैसे काम प्रभावित होने की शिकायतें हैं। इससे वाहन मालिकों की मुश्किलें बढ़ने की बात सामने आई है। एटीएस की जटिल प्रक्रिया और कथित अवैध वसूली की शिकायतें पहले भी उठ चुकी हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
निजी जांच केंद्रों को फायदा, वाहन मालिकों को इंतजार?
इस मामले में आर्थिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पात्र वाहन मालिक आरटीओ में मैनुअल फिटनेस जांच नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें एटीएस की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। पोर्टल अपडेट में देरी के दौरान कितने पात्र वाहनों की जांच एटीएस में हुई? इन वाहन मालिकों से कितना शुल्क लिया गया?
इन आंकड़ों से तकनीकी देरी के वास्तविक आर्थिक प्रभाव का पता चल सकेगा। हालांकि केवल देरी के आधार पर किसी जांच केंद्र को अनुचित लाभ पहुंचाने का निष्कर्ष उचित नहीं है। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड और शुल्क का आधिकारिक सत्यापन जरूरी होगा।
किन 28 वाहन श्रेणियों को मिली अनुमति?
उपलब्ध आदेश विवरण के अनुसार कई वाहन श्रेणियों को मैनुअल फिटनेस जांच की अनुमति मिली है। इनमें ई-रिक्शा, ई-रिक्शा कार्ट, डंपर, फोर्कलिफ्ट और क्रेन माउंटेड वाहन शामिल हैं। रिग लगे वाहन, कृषि ट्रैक्टर, पावर टिलर और रोड रोलर भी शामिल हैं। एक्सकेवेटर, बुलडोजर, हार्वेस्टर और अर्थ मूविंग उपकरण भी इस सूची में बताए गए हैं।
इसके अलावा विभिन्न निर्माण उपकरण वाहन और कमर्शियल ट्रैक्टर भी शामिल बताए गए हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली, निजी ट्रेलर और कृषि ट्रेलर भी सूची में हैं। कमर्शियल ट्रेलर, सेमी-ट्रेलर और ऑक्जिलरी ट्रेलर भी इनमें शामिल बताए गए हैं। मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलर जैसी श्रेणियों का भी उल्लेख है। हालांकि किसी वाहन की पात्रता उसकी आधिकारिक पंजीकरण श्रेणी से तय होगी। इसके लिए संबंधित आदेश की शर्तें भी लागू होंगी।
सबसे बड़ा सवाल, देरी का हिसाब कौन देगा?
परिवहन विभाग और एनआईसी (NIC Portal) को पोर्टल अपडेट की समयसीमा स्पष्ट करनी चाहिए। यह भी बताना चाहिए कि जरूरी तकनीकी बदलाव कब पूरे होंगे। देरी से प्रभावित वाहन मालिकों के लिए अंतरिम व्यवस्था की संभावना भी स्पष्ट होनी चाहिए। इससे पात्र वाहन मालिकों को फिटनेस जांच कराने में राहत मिल सकती है।
मामला केवल 28 वाहन श्रेणियों की फिटनेस जांच तक सीमित नहीं है। यह सरकारी आदेश लागू करने की प्रशासनिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। सबसे बड़ा सवाल है कि तकनीकी देरी से प्रभावित वाहन मालिकों को राहत कौन दिलाएगा? केंद्र का आदेश जारी होने के बावजूद व्यवस्था लागू करने की जवाबदेही किसकी होगी?